बादामके औषधीय गुण भाग – १


बादामके(ईषद्विर्य, वातामके ) वृक्ष, पर्वतीय क्षेत्रोंमें अधिक पाए जाते हैं । इसके तने मोटे होते हैं । इसके पत्ते लम्बे, चौडे और मुलायम होते हैं। इसके फलके भीतरके  मींगीको बादाम कहते हैं । बादामके वृक्ष एशियामें ईरान, ईराक, सउदी अरब आदि देशोंमें अधिक मात्रामें पाए जाते हैं । हमारे देशमें जम्मू कश्मीरमें इसके पेड पाए जाते हैं । बादामकी दो जातियां होती हैं एक कडवी तथा दूसरी मीठी । इसका तेल भी निकाला जाता है । कडवी बादाम हमें उपयोगमें नहीं लानी चाहिए क्योंकि यह शरीरके लिए हानिकारक होती है ।
आस्ट्रेलिया, कैलिफोर्निया, अफ्रीका और भारतमें सबसे अधिक पाए जानेवाला बादाम प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज लवणोंका सबसे बडा स्रोत हैं । यह न केवल आपके व्यंजनके स्वादको बढाता है अपितु इसके औषधीय लाभ भी हैं ।
इनमें प्रोटीन और वसाके अतिरिक्त विटामिन जैसे बी१, बी२, बी५, बी६ और ई पाए जाते हैं। इसमें अच्छी मात्रामें खनिज जैसे आयरन, पोटाशियम, मैग्नीशियम, कापर, जिंक, मैंगनीज, कैल्शियम आदि पाए जाते हैं । बादाममें सोडियमकी मात्रा न के बराबर होती है और फाइबर ३.५ % प्रोटीन ६ %, वसा – १४ %, विटामिन ई ३७%, मैगनीज ३२%, मैग्नीशियम २०% मात्रामें पाए जाते हैं ।
बादाम अपने औषधीय गुणोंके कारण हमारी भोज्य पदार्थका अभिन्न अंग है | इसके कुछ औषधीय गुण निम्नलिखित हैं –

नेत्रोंके रोग – आंखोंसे पानी गिरना, आंखे आना, आंखोंकी दुर्बलता, आंखोंकी थकना आदि रोगोंमें बादामको भिगोकर प्रातः पीसकर जल मिलाकर पी जाएं तथा इसके पश्चात् दूध पीनेसे लाभ होता है ।

चेचक – ५ बादामको जलमें प्रातःकाल पीनेसे चेचकके दाने शीघ्र भर जाते हैं एवं ठीक भी हो जाते हैं ।

पीलिया – ६ बादाम, ३ छोटी इलायची और २ छुहारे लेकर रात्रिके समय मिट्टीके कुल्हडमें भिगो दें तथा प्रातःकाल इन सबको बारीक पीसकर इसमें ७० ग्राम मिश्री, ५० ग्राम मक्खन मिलाकर चाटनेसे पीलियाके रोगमें लाभ मिलता है । इस प्रयोगके करनेसे तीसरे दिन ही मूत्रके पीलेपनमें लाभ मिलेगा ।

झांइयां, दागधब्बे – ५ बादामकी गिरीको रात्रिको जलमें भिगों दें, प्रातः इनका छिलका उतारकर बहुत बारीक पीसकर शीशीमें भरकर रख दें। फिर इसमें ६० ग्राम गुलाबजल, १५ बून्द चन्दनका इत्र (परफ्यूम) मिलाकर हिलाएं। चेहरे या शरीरपर जहां कहीं भी काले धब्बे, झांइयां हों वहां इसे प्रतिदिन दिनमें ३ बार लगाना चाहिए। जहां गहरा धब्बा हो वहां इसे अधिक मात्रामें लगा देते हैं। इस प्रयोगसे झाइयों और दाग-धब्बोंमें लाभ मिलता है ।

दांत खट्टे होना अथवा होंठोंका फटना –  दांत खट्टे होने अथवा होंठोंके फटनेपर ५ बादामको खानेसे लाभ मिलता है ।

दांतोंकी वेदना४० ग्राम बादामके छिलके, २० ग्राम कालीमिर्च, २० ग्राम फिटकरी, २० ग्राम रुमीमस्तांगी तथा काजूको एकसाथ मिलाकर बारीक पीसकर मन्जन बना लें । यह मन्जन प्रतिदिन करनेसे दांतोंसे खूनका बहना बन्द हो जाता है और दांतोंका हिलना भी बन्द हो जाता है ।

दांत स्वच्छ और चमकदार करना – बादामका छिलका जलाकर किसी बर्तनसे ढक दें । दूसरे दिन इसकी राखको पांच गुणा फिटकरीके साथ मिलाकर बारीक पीसकर मन्जन बना लें । इससे प्रतिदिन मन्जन करनेसे दांत स्वच्छ, चमकदार तथा शसक्त बनते हैं ।
बादामके छिलकेको जला लें तथा इसकी राखको सैंधानमकके साथ मिलाकर बारीक पीसकर मंजन बना लें। यह मंजन प्रतिदिन करनेसे दांत स्वच्छ और सशक्त होते हैं ।

नाखूनका घाव – नाखूनका घाव नाखूनके उखडनेके कारण हो तो पहले नाखूनोंको कुछ उष्ण जलसे अच्छी तरहसे धो लें। उसके बाद १०-१० ग्राम घी, हल्दी और बादामको अच्छी तरहसे पीसकर नाखूनोंपर लगानेसे नाखूनोंकी वेदना और घाव मिट जाता है।

होठोंके लिए –  २० ग्राम बादाम रोगनको आगपर रखकर बहुत अधिक गर्म करके इसके भीतर ५ ग्राम देशी मोम डालकर पिघला लें । उसके पश्चात इसे नीचे उतारकर इसमें २ ग्राम सफेद कत्था और सुरमा डालकर मिला लें । इसे होठोंपर लगानेसे होंठोंका फटना, पपडी उतरना (होठोंकी खाल उतरना) और कुरंड रोग ठीक हो जाता है और होंठ बिल्कुल कोमल और चिकने हो जाते हैं।
●   ५ बादाम नियमित सवेरे और संध्या समय खानेसे होठ नहीं फटते हैं।
●   रातको सोते समय होठोंपर बादाम रोगन लगाकर सो जाएं। इससे होठोंकी पपडी हट जायेगी और होठ कोमल हो जायेंगे और आगेसे होठोंपर पपडी भी नहीं जमेगी । सदैव ध्यान रखें कि होठोंपर जमी हुई पपडीको नाखून या दांतसे कभी नहीं नोचे और मुंहसे श्वास न लें ।

श्वासके रोग –  बादामको उष्ण जलमें डालकर संध्याके समय रात भरके लिए भिगोकर रख देते हैं । दूसरे दिन प्रातः बादामको थोडी देर पकाकर उसका पेय बना लेते हैं । इस पेयको २० से ४० मिलीलीटर तककी मात्रामें नियमित सेवन करनेसे श्वासके सारे रोग ठीक हो जाते हैं ।

पागल कुत्तेके काटनेपर – ४ ग्राम बादामकी मींगीकी मात्राको मधुके साथ मिलाकर खानेसे पागल कुत्तेका विष दूर हो जाता है ।

कनखजूरेके कांटे चुभ जानेपर –  कनखजूरेके कांटे चुभ जानेपर बादामका तेल लगानेसे लाभ मिलता है ।

बन्द आवाज खोलना – ७ बादामकी गिरी और ७ कालीमिर्चको थोडेसे जलमें डालकर और उसमें थोडी सी पिसी हुई मिश्री मिलाकर चाटनेसे खांसी और खराशके कारण  बन्द हुए स्वर खुल जाते हैं ।

बवासीर (अर्श) – १० ग्राम बादाम, आंवला, ६-६ ग्राम हल्दी, भांग और १० ग्राम मैदाको एक साथ पीसकर गुनगुना करके बवासीरपर बांधनेसे अर्शरोग (बवासीर) ठीक होता है । (क्रमश:)



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution