अध्यात्म

विवेकसे ही उचित अनुचितका बोध!


बुद्धिका रूपांतरण विवेकमें होनेसे धर्म, अधर्म, पाप, पुण्य, उचित अनुचितका बोध होता है | आज अधिकांश लोगोंमें विवेकके जागृत न होनेसे वे व्यावहारिक दृष्टिसे बुद्धिमान होते हुए भी योग्य निर्णय लेनेमें असमर्थ होते हैं और अनुचित निर्णय लेनेसे उनका आध्यात्मिक पतन होता है या पापकर्म निर्माण होता है ! ध्यान रहे भारतमें ९५ % भ्रष्टाचार […]

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खरा साधकत्व जीवनमें विषम स्थिति आनेपर ही ज्ञात होता है!


अध्यात्मके सिद्धान्तोंको अपने जीवनमें उतारनेपर, वृद्धावस्था, अपने निकटके परिजनकी अकाल मृत्यु एवं महामारीमें भी मन स्थिर और शांत रहता है, यही अध्यात्म व साधनाका महत्त्व है । अपने मनके अनुसार  साधना करनेसे हम स्वयंको साधक या भक्त समझ सकते हैं; किन्तु खरा साधकत्व जब जीवनमें विषम स्थिति आती है तो ही ज्ञात होता है और […]

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आई.वी.एफसे उत्पन्न सन्तानका आध्यात्मिक स्तर कैसा होता है ?

आई.वी.एफसे उत्पन्न सन्तानका आध्यात्मिक स्तर कैसा होता है ? आईवीएफसे सन्तान प्राप्त करनी चाहिए ? – श्री कमलकिशोर शर्मा, बीकानेर, राजस्थान


सर्वप्रथम यह जान लें कि आई.वी.एफ.से उत्पन होनेवाले शिशुओंका और आध्यात्मिक स्तरका कोई सम्बन्ध नहीं है । उच्च स्तरकी आध्यात्मिक जीवात्माएं सामान्यत: सात्त्विक माता-पिताके घर जन्म लेते हैं……..

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सन्तान प्राप्तिके लिए क्या उपाय कर सकते हैं ?


यदि दोनों पति-पत्नीको शारीरिक दृष्टिसे कोई कष्ट न हो एवं तब भी उन्हें सन्तान नहीं हो रहा हो तो वह कष्ट आध्यात्मिक कारणोंसे हो सकता है ! आध्यात्मिक स्तरके कष्टके अनेक कारण हो सकते हैं, जैसे………….

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उत्तराधिकारी घोषित करनेके सम्बन्धमें संतों और आजके राजनेताओंमें भेद !


अध्यात्म प्रसारके मध्य पिछले कुछ वर्षोंमें कुछ खरे संतोंके आश्रमोंसे परिचय हुआ है और मैंने पाया है कि जब उस आश्रमके मुखिया पदपर आसीन संतको यदि कोई योग्य उत्तराधिकारी नहीं मिलते हैं तो वे अपने देह-त्यागके पश्चात उनकेद्वारा किया जा रहा धर्मकार्य निर्विघ्न होता रहे, इस हेतु एक न्यासकी स्थापना कर, सर्वकार्य न्यासके योग्य सदस्योंको […]

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सांसारिक वस्तुसे प्राप्त होनेवाले सुखकी अपेक्षा साधनासे प्राप्त होनेवाले आनंदका अधिक महत्त्व होना!


सांसारिक वस्तुसे प्राप्त होनेवाले सुखकी अपेक्षा साधनासे प्राप्त होनेवाले आनंदका अधिक महत्त्व है, किन्तु यह वही समझ सकता है जो साधनारत है | बुद्धिसे इस तथ्यको समझना सम्भव नहीं !

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आटेका पलथन रोटी बनानेके पश्चात पुनः आटेके पात्र, टिन, डब्बा इत्यादिमें डालनेसे भण्डार होता है अशुद्ध !


कुछ स्त्रियां आटेका पलथन रोटी बनानेके पश्चात उसे पुनः आटेके पात्र, टिन, डब्बा इत्यादिमें डाल देती हैं इससे भण्डार अशुद्ध……

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मात्र साधनाद्वारा प्राकृतिक आपदाओंको टाला जा सकता है


विज्ञान चाहे जितनी भी प्रगति कर ले, प्राकृतिक आपदाओंको न ही रोक सकता है और न ही नियन्त्रित कर सकता है, मात्र और मात्र साधनाद्वारा पञ्च तत्त्व एवं उसके अधिष्ठाता देवताओंको प्रसन्नकर ही प्राकृतिक आपदाओंको टाला जा सकता है; किन्तु निधर्मी समाजको यह बात कहां समझमें आती है ?! (६.५.२०१८)

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मांसाहार क्यों न करें ? (भाग – १५)


मांस खानेवाले प्राणियोंकी आंतोंसे मनुष्य और अन्य शाकाहारी प्राणियोंकी आंतें छोटी होती हैं । मांसाहारी प्राणियोंकी आंतें लम्बी होती हैं। वह मांसाहारी प्राणियोंके पाचन तंत्रमें…..

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वास्तुशास्त्रके अनुसार कौनसे वृक्ष या पौधे लगाए जा सकते हैं ? (भाग – ६)


वास्तुशास्त्र अनुसार केलेके पौधेको भी शुभ माना गया है । केला एक दिव्य गुणोंसे भरा सात्त्विक एवं औषधीय पौधा है । शास्त्रोंमें तुलसीके पश्चात केलेके पौधेको अत्यंत शुभ…..

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