देवस्तुति

दुर्गा स्तोत्र


जय भगवति देवि नमो वरदे जय पापविनाशिनी बहुफलदे । जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे ।।१।। अर्थ : हे वरदायिनी देवी, हे भगवति, तुम्हारी जय हो ! हे पापोंको नाश करनेवाली और अनन्त फलोंको प्रदान करनेवाली देवी, तुम्हारी जय हो ! हे शुम्भ-निशुम्भके मुण्डोंको धारण करनेवाली देवी, तुम्हारी जय हो ! हे मनुष्योंकी पीडा हरनेवाली […]

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दुर्गा स्तुति


सौम्या सौम्यतराह्‌शेष सौम्येभ्यस त्वतिसुन्दरी । परापराणां परमा त्वमेव परमेश्वरी ॥ अर्थ तुम सौम्य और सौम्यतर हो । इतना ही नहीं, जितने भी सौम्य और सुन्दर पदार्थ हैं, उन सबकी अपेक्षा तुम अधिक सुन्दर हो । परा और अपरा, सबसे पृथक रहनेवाली परमेश्वरी तुम्हीं हो ।

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भगवान श्रीकृष्णके अनके नामोंमेंसे कुछ नामोंके अर्थ (भाग – ४)


३१. गुडाकेश : निद्राको जीतनेवाले ३२. हृषिकेश : इन्द्रियोंको जीतनेवाले ३३. सारथी : अर्जुनका रथ चलनेके कारण ३४. पूर्ण परब्रह्म : अखिल ब्रह्माण्डके स्वामी ३५. देवेश : देवोंके ईश (स्वामी) ३६. नाग नथिया : कलिया नागको नथनेवाला ३७. यदुपति : यादवोंके स्वामी ३८. यदुवंशी : यदु वंशमें अवतार धारण करनेके कारण ३९. सारथी : अर्जुनका […]

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भगवान श्रीकृष्णके अनके नामोंमेंसे कुछ नामोंके अर्थ (भाग – ३)


२१. मदन : सुन्दर २२. मनोहर : मनका हरण करनेवाले २३. मोहन : सम्मोहित करनेवाले २४. जगदीश : जगतके स्वामी २५. पालनहार : सबका पालन-पोषण करनेवाले २६. कंसारी : कंसके शत्रु २७. रुक्मिणी वल्लभ: रुक्मणीके पति २८. केशव : केशी नाम दैत्यको मारनेवाले या पानीके ऊपर निवास करनेवाले या जिनके केश सुंदर हों २९. वासुदेव […]

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भगवान श्रीकृष्णके अनके नामोंमेंसे कुछ नामोंके अर्थ (भाग -२)


११.  चक्रधारी : जिसने सुदर्शन चक्र या ज्ञान चक्र या शक्ति चक्रको धारण किया हो १२.  श्याम : सांवले रंगवाला १३.  माधव : मायाके पति १४.  मुरारी :  मुर नामक दैत्यके शत्रु १५.  असुरारी : असुरोंके शत्रु १६.  बनवारी : वनोंमें विहार करनेवाले १७.  मुकुंद : जिनके पास निधियां हो १८. योगीश्वर : योगियोंके ईश्वर […]

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भगवान श्रीकृष्णके अनके नामोंमेंसे कुछ नामोंके अर्थ (भाग -१)


१.  कृष्ण : सबको अपनी ओर आकर्षित करनेवाला २.  गिरिधर : गिरि अर्थात पर्वत, धर अर्थात धारण                करनेवाला अर्थात गोवर्धन पर्वतको उठानेवाले ३.  मुरलीधर : मुरलीको धारण करनेवाले ४.  पीताम्बरधारी : पीत अर्थात पिला, अम्बर: अर्थात         वस्त्र, पीले वस्त्रोंको धारण करनेवाले   ५.  मधुसूदन : […]

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कृष्ण स्तुति


न वासुदेवभक्तानामशुभं विद्यते क्वचित् । जन्ममृत्युजराव्याधिभयं नैवोपजायते ।। अर्थ :  वासुदेवके भक्तोंका अशुभ कदापि नहीं होता; उनमें जन्म, जरा, व्याधि, भय एवं मृत्यु आदि दोष कदापि सम्भव नहीं होते ।

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सरस्वती स्तुति


पातु नो निकषग्रावा मतिहेम्न: सरस्वती । प्राज्ञेतरपरिच्छेदं वचसैव करोति या ॥ अर्थ : बुद्धिरूपी सोनेके लिए कसौटीके समान सरस्वतीजी, जो केवल वचनसे ही विद्धान् और मूर्खोंकी परीक्षा कर देती है, हमलोगोंका पालन करें ।

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राम स्तुति


श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ अर्थ : मैं एकाग्र मनसे श्रीरामचंद्रजीके चरणोंका स्मरण और वाणीसे गुणगान करता हूं, वाणी द्धारा और पूरी श्रद्धाके साथ भगवान् रामचन्द्रके चरणोंको प्रणाम करता हुआ मैं उनके चरणोंकी शरण लेता हूं |

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सरस्वती स्तुति


सरस्वतीं च तां नौमि वागधिष्ठातृदेवताम् । देवत्वं प्रतिपद्यन्ते यदनुग्रहतो जना: ॥ भावार्थ  : वाणीकी अधिष्ठात्री, उन देवी सरस्वतीको प्रणाम करता हूं, जिनकी कृपा से मनुष्य देवता बन जाता है ।

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