पितृ दोष

अतृप्त पितर जन्म, मृत्यु और विवाह तीनोंमें ही अडचनें निर्माण करते हैं


अतृप्त पितर जन्म, मृत्यु और विवाह तीनोंमें ही अडचनें निर्माण करते हैं एवं समाजके १०० प्रतिशत लोगोंको पितृदोष होनेके कारण आजकल विवाहमें भी अनेक प्रकारकी अडचनें या दुर्घटनायें होती हैं । विवाह एक महत्त्वपूर्ण सोलह संस्कार है; अतः इसे करते समय इसके आध्यात्मिक महत्त्वको अवश्य ध्यानमें रखकर सूक्ष्म जगतकी अनिष्ट शक्तियां किसी भी प्रकारकी अडचनें […]

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अतृप्त पितर वंशजोंको हानि करते हैं !


मैंने अपने आध्यात्मिक शोधमें पाया है कि जिनके घर अत्यधिक पितृदोष होता है, उनके अतृप्त पितर, कई बार गर्भस्थ पुरुष-भ्रूणकी योनि, जन्मके दो या तीन माह पूर्वमें परिवर्तित कर देते हैं एवं ऐसे पुत्रियोंको जन्मसे ही अत्यधिक अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट होता है; क्योंकि उनपर गर्भकालमें ही आघात हो चुका होता है………

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जन्मब्राह्मणोंको पितृदोषके कारण


पितृयज्ञं तु निर्वर्त्य विप्रश्चन्द्रक्षयेsग्निमान् । पिण्डान्वाहार्यकं श्राद्धं कुर्यान्मासानुमासिकं ।। – मनुस्मृति (२:१२२) अमावस्याकी तिथिको पितृ श्राद्ध कर प्रति माह पिण्डान्वाहार्यकं श्राद्ध करना एक गृहस्थ ब्राह्मणका कर्तव्य है । आज अनेक जन्मब्राह्मण शास्त्रोक्त धर्माचरण नहीं करते; परिणामस्वरूप उनके घरमें तीव्र स्तरका ‘पितृदोष’ पाया गया है । मनुस्मृतिके इस श्लोकके आधारपर सभी पुरुष जो जन्मब्राह्मण हैं, वे […]

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मृत जीवात्माओंको गति देना खेल नहीं !


एक सिक्थ-वर्तिका (मोमबत्ती) जलानेसे और दो मिनट मौन रखनेसे यदि मृत आत्माको शान्ति (गति) मिल जाती तो भगीरथ मुनिको पूर्वजोंकी गति हेतु साठ सहस्र वर्ष तपस्या कर गंगाको पृथ्वीपर क्यों लाना पडता ? वे भी दो मिनट मौन रखते एक सिक्थ-वर्तिका जलाते और उनके सारे पूर्वज शान्त हो जाते !…..

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शास्त्रानुसार विधिसे ही पितर तृप्त होते हैं


पितृपक्षमें या वार्षिक श्राद्धमें अथवा किसीकी मृत्यु हो जानेपर कुछ व्यक्ति समाचार पत्रमें श्रद्धाञ्जलिके रूपमें पितरोंके छायाचित्र (फोटो) छपवा देते हैं और सोचते हैं कि ऐसा करनेसे उनके पितरोंको गति मिल जाएगी ! कुछ लोग श्राद्ध या ब्राह्मण भोजनके स्थानपर निर्धनोंको या दरिद्रको खिला देते हैं, तो ध्यानमें रखें शास्त्र अनुसार जो विधि बताई गई […]

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नास्तिकों एवं अहिन्दुओंका भी श्राद्ध अनिवार्य !


एक आनंदकी बात बताती हूं, मेरे लेखोंको पढने या ‘यूट्यूब’के वीडियोको देखनेके पश्चात कुछ समयसे कुछ अहिन्दू भी हमें पितृदोष निवारण हेतु सम्पर्क करने लगे हैं ! अर्थात अहिन्दुओंको यह समझमें आने लगा है कि वैदिक सनातन धर्मके सिद्धान्त सभी जीवात्माओंपर एक समान लागू होते हैं ! अर्थात आप पुनर्जन्म, वैदिक रीतिसे श्राद्ध या मृत्योपरान्तकी […]

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सनातन धर्ममें मृत्यु उपरांत पितृकर्मको इतना महत्त्व क्यों दिया गया है ?


एक प्रवचनके मध्य जोधपुरमें अनेक जैन संप्रदायके साधकोंसे परिचय हुआ, वे सब तीन दिवसीय प्रवचनमें आए थे, सभीको तीव्र स्तरके पितृ दोषके कारण विचित्र प्रकारके कष्ट थे, इससे समझमें आता है कि सनातन धर्ममें मृत्यु उपरांत पितृकर्मको इतना महत्त्व क्यों दिया गया है ! और जिन संप्रदायोंने सनातन धर्मके इस अंगको स्वीकार नहीं किया है […]

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अन्य पन्थोंके लोगोंके घरमें तीव्र पितृ दोष


जिन पन्थोंके संस्थापकोंने मृत्योपरान्त अन्त्येष्टि एवं पितृ-कर्मकी विधि वैदिक सनातन धर्म अनुसार करनेकी आज्ञा नहीं दी, आज उन सभी पन्थोंके सदस्योंके घरमें तीव्र पितृदोष एवं अनिष्ट शक्तिके कष्ट देखनेको मिल रहे हैं और वे स्वतः ही अपने कष्टोंके निवारण हेतु सनातन धर्म अनुसार प्रयत्न करने लगे हैं । यह एक प्रकारका ईश्वरीय नियोजन है, जिससे […]

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समाचारपत्रमें मृत व्यक्तिको श्रद्धाञ्जलि अर्पणसे कोई आध्यात्मिक लाभ नहीं मिलता !


अनेक धनवानोंको लगता है कि अपने मृत पूर्वजके चित्र समाचार पत्रमें छपवा देनेसे वे पितृ ऋणसे ऊऋण हो जाएंगे ! मृत्योपरान्तकी यात्रामें जीवात्माको गति देना इतना सरल होता तो हमारे ऋषि मुनि श्राद्ध एवं तत्सम धार्मिक कृति जैसी कठिन आध्यात्मिक प्रक्रिया क्यों बताते ? समाचार पत्रमें श्रद्धाञ्जलि ज्ञापन करनेसे आपके मनको समाधान मिलता है, पितरोंको […]

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हिन्दू धर्मंमें श्राद्धका विधान


मृत व्यक्तिकी जीवात्मा किसी विषयसे आसक्त हो अटक न जाए, इस लिए हिन्दू धर्मंमें श्राद्धका विधान बताया गया है | श्राद्धके विधानसे मृत व्यक्तिकी जीवात्मा यदि कसी कारणवश किसी विषय-वासनामें अटक गई हो तो श्राद्धसे उत्पन्न शक्ति उस जीवात्माको मृत्योपरांतकी यात्रामें शक्ति प्रदान करता है | -परात्पर गुरु – तनुजा ठाकुर

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