प्रेरक प्रसंग

साधकके गुण (भाग-८)


साधना करते समय धैर्यका  होना
साधनाका पथ बहुत लम्बा, अदृश्य व कठिनतम होता है ! अनके बार साधना करनेपर यदि किसी साधकको त्वरित उसका प्रभाव नहीं दिखता है तो वे अपना धैर्य खो देते हैं……

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प्रेरक कथा – विषयोंमें दुर्गन्ध


एक धर्मनिष्ठ राजा एक महत्माकी पर्णकुटीपर जाया करते थे । उन्होंने एक बार महात्माको अपने राजप्रसादमें(महल) पधारनेके लिए विनती की; परन्तु महत्माने यह कहकर टाल दिया कि ‘मुझे तुम्हारे राजप्रसादमें बडी दुर्गन्ध आती……

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प्रेरक कथा – संयमका प्रभाव


एक समयकी बात है देवताओं और असुरोंमें घोर युद्ध हो रहा था । राक्षसोंके अस्त्र-शस्त्र, बल और युद्ध कौशलके सम्मुख देवता बारम्बार पराजित हो रहे थे; इसी क्रममें एक बार वह पराजित होकर किसी प्रकार अपने प्राणोंकी रक्षा हेतु वहांसे पलायनकर गए एवं सभी एकत्रित होकर दत्तात्रेय देवताके आश्रममें आए और उन्हें अपनी विपत्तिकी गाथा […]

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प्रेरक कथा – दक्षिणा


सोमदत्त नामक एक ब्राह्मण राजा भोजके पास गया और बोला, “महाराज, आपकी आज्ञा हो तो आपके नगरके नागरिकोंको भागवत कथा सुनाना चाहता हूं, इससे प्रजाका हित होगा एवं मुझ ब्राह्मणको यज्ञके लिए दक्षिणाका लाभ भी प्राप्त ……..

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प्रेरक कथा- आत्मज्ञान हेतु सुपात्रका होना आवश्यक !


एक बार संत ज्ञानेश्वर महाराजसे, किसी भोली माईने पूछा, “महाराज, जब भगवान सभीके हैं, तो वे सभीको आत्मज्ञान क्यों नहीं देते ?” यह सुनकर संत ज्ञानेश्वर बोले, “माई, यह सत्य है कि, प्रभु सभीके हैं, किन्तु सभीकी योग्यता……..

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सभी जीवोंमें है परमेश्वरका वास


इसके पश्चात् संत महाराज शिष्यको समझाते हुए बोले, यदि तुम यह चाहते हो कि, मैं अपने इसी स्थूल स्वरूपमें आऊं तो तुम मुझे नहीं, मेरी इस देहको पूजते हो । इसी कारण जब मैं रूप परिवर्तित करके तुम्हारे पास आया तो तुमने मुझे कुछ भी नहीं दिया । इसके गूढ अर्थको………

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प्रेरक कथा – गुरु आज्ञापालन कर चरवाहासे ऐसा बना वह सन्त


गुजरातके सुरेन्द्रनगर जिलेके कांत्रोडी गांवमें मेघजी नामका दरिद्र बालक एक सेठके यहां गाय चरानेकी चाकरी करता था । एक दिवस जंगलमें गाय चराते समय, उसे गुफामें एक साधनारत  महात्माजीके दर्शन हुए । मेघजीने महात्माजीको……..

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प्रेरक कथा – अनोखा दण्ड


अति प्राचीन बात है । दक्षिण भारतमें वीरसेन नामक राजा राज्य करते थे ।  उन्हींके राज्यमें विष्णुदेव नामक एक ब्राह्मण था । एक बार अकालके कारण भिक्षा मिलनी बंद हो गई । पूर्व कालमें ब्राह्मणका मूल धर्म होता था, साधना करना और समाजको धर्मशिक्षण……..

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एक वृद्धाने चाणक्यको सिखाए सफलताके सूत्र


एक समयकी बात है । आर्य चाणक्य अपमान भुला नहीं पा रहे थे । शिखाकी खुली गांठ हर क्षण भान कराती थी कि धनानन्दके राज्यको शीघ्रातिशीघ्र सिंहासनच्युत करना है । चन्द्रगुप्तके रूपमें एक ऐसा योग्य शिष्य उन्हें मिला था, जिसको उन्होंने बाल्यकालसे ही मनोयोगपूर्वक सिद्ध (तैयार) किया था । यदि चाणक्य प्रकाण्ड विद्वान थे तो […]

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प्रेरक कथा – साधना हेतु पुरुषार्थ आवश्यक


किसी नगरमें एक सेठ रहता था । उसके पास अपार धन सम्पदा थी, बहुत बडी कोठी थी, नौकर-चाकर भी थे, अर्थात् सभी सुख सुविधा थी, किन्तु इसके पश्चात् भी सेठको एक क्षणकी भी शान्ति नहीं…..

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