प्रेरक प्रसंग

एक वृद्धाने चाणक्यको सिखाए सफलताके सूत्र


एक समयकी बात है । आर्य चाणक्य अपमान भुला नहीं पा रहे थे । शिखाकी खुली गांठ हर क्षण भान कराती थी कि धनानन्दके राज्यको शीघ्रातिशीघ्र सिंहासनच्युत करना है । चन्द्रगुप्तके रूपमें एक ऐसा योग्य शिष्य उन्हें मिला था, जिसको उन्होंने बाल्यकालसे ही मनोयोगपूर्वक सिद्ध (तैयार) किया था । यदि चाणक्य प्रकाण्ड विद्वान थे तो […]

आगे पढें

सशस्त्र संघर्षके पुरोधा आदि क्रान्तिकारी वासुदेव बलवन्त फडके


१७ फरवरी २०१७ को वीर सेनानी वासुदेव बलवन्त फडकेका स्मृतिदिवस है । आइए ! इस दिवसके उपलक्ष्यमें हम इस हुतात्माके विषयमें जानकर उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करें ! १. सशस्त्र संघर्षका जनक भारतमें जब १८५७ की क्रान्तिमें अंग्रेज भारतीयोंपर अत्याचार कर रहे थे, उस समय इस बालककी आयु मात्र १२ वर्ष थी; परन्तु यह […]

आगे पढें

महाराणा प्रतापकी शौर्य गाथा


विक्रम संवत अनुसार माघ शुक्ल पक्ष एकादशीको अर्थात ७ फरवरीको भारतके महावीर महाराणा प्रतापजीका स्मृतिदिन है, उनके नामसे भारतीय इतिहास आज भी गूंजायमान है । वह भारत भूमिके ऐसे वीर सुपुत्र थे जिन्होंने मुगलोंको छठीका दूध स्मरण करा दिया था । इनकी वीरताकी कथासे भारतकी भूमि अत्यन्त गौरान्वित है । वह मेवाडकी प्रजाके प्राण थे […]

आगे पढें

स्वामी तैलंग – एक अवधूत सिद्ध महायोगी


(आविर्भाव-पौष शुक्ल ११, जनवरी १६०७, महाप्रयाण-पौष शुक्ल ११, जनवरी १८८७)  अ. सन्त ही समाजके आदर्श क्यों ?  पौष शुक्ल एकादशीके दिवस अवधूत एवं सिद्ध महायोगी तेलंग स्वामीजीकी जयन्ती एवं पुण्यतिथि दोनों ही है; इसीलिए आज हम उनके जीवनसे सम्बन्धित कुछ विशेष प्रसंगोंके विषयमें जानेंगे ! हमारी वर्तमान निधर्मी शिक्षण पद्धतिमें सन्तोंके विषयमें कुछ भी ज्ञान […]

आगे पढें

प्रेरक कथा – शिष्यकी परीक्षा


वैराग्य किसीको भी और कभी भी हो सकता है; किन्तु इसके लिए भी ईश्वरकी कृपा होना आवश्यक है । वैरागियोंकी चर्चामें भर्तृहरिका(भरथरी) नाम प्रमुखतासे लिया जाता है । उज्जयिनीके (उज्जैन) राजा भर्तृहरिके पास ३६५ पाकशास्त्री(रसोइए) थे, जो राजा और उसके परिवार तथा अतिथियोंके भोजन बनाने के लिए नियुक्त थे । एक पाकशास्त्रीको वर्षमें केवल एक […]

आगे पढें

सुसंस्कारित मन ही ज्ञानका खरा पात्र होता है !


एक बार समर्थ स्वामी रामदासजी भिक्षा मांगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए। उन्होंने दरवाजा खटखटाया और आवाज लगाई- “जय जय रघुवीर समर्थ!” घर से महिला बाहर आई। उसने उनकी झोली मे भिक्षा डाली और कहा- “महात्माजी, कोई उपदेश दीजिए!” यह सुनकर स्वामीजी बोले- “आज नहीं, कल दूंगा।” दूसरे दिन स्वामीजी ने पुन: उस […]

आगे पढें

सुंदरता दृष्टिमें होती है


देवराज इंद्र अपनी सभामें समस्त देवताओंके साथ बैठे पृथ्वीकी स्थितिपर चर्चा कर रहे थे । पृथ्वीके जीवन, वहांकी समस्याओं व मांगोंके विषयमें सभी अपने-अपने विचार रख रहे थे । इंद्रका आग्रह था कि पृथ्वीके जीवनके विषयमें उन्हें यथार्थताका ज्ञान हो जाए तो वे सुधारकी दिशामें कुछ सकारात्मक प्रयास कर सकें । देवताओंने उन्हें पर्याप्त सूचनाएं […]

आगे पढें

संतोंकी प्रत्येक लीला निराली होती है


एक बार कबीरदास जी को लगने लगा की उनके पास साधक कम और सांसारिक इच्छा की पूर्ती करनेवाले लोग अधिक आने लगे हैं अतः  एक दिन उन्होंने सबके सामने एक वैश्या के घर चले गए | वहां उपस्थति अधिकांश लोग कानाफूसी करने लगे और कहने लगे “देखा, मैंने  तो पहले ही कहा था की ये ढोंगी […]

आगे पढें

ईश्वरसे प्रेम !


एक संतने एक रात स्वप्न देखा कि उनके पास एक देवदूत आया है । देवदूतके हाथमें एक सूची है । उसने कहा, “यह उन व्यक्तियोंकी सूची है, जो प्रभुसे प्रेम करते हैं ।’ संतने कहा, ‘मैं भी प्रभुसे प्रेम करता हूं । मेरा नाम तो इसमें अवश्य होगा ।’ देवदूत बोला, ‘नहीं, इसमें आपका नाम […]

आगे पढें

आज हिंदुओंकी स्थिति भी इन रट्टू तोते समान है |


एक बार एक साधु बाबा ने अपने कुटिया में कुछ तोते पाल रखे थे और उन सभी तोते को अपनी सुरक्षा हेतु एक गीत सिखा रखा था “शिकारी आएगा जाल बिछाएगा पर हम नहीं जाएँगे |” एक दिन साधु बाबा भिक्षा मांगने हेतु पास ही के एक गाँव में गए | इसी बीच एक बहेलियाने […]

आगे पढें

© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution