व्रत त्यौहार एवं धार्मिक उत्सव

इस वर्ष मकर संक्रान्ति १५ जनवरीको क्यों ?


मकर संक्रान्ति इस वर्ष कल अर्थात १५  जनवरीको पड रही है, इसीकारण प्रयागराजमें हो रहा कुम्भ भी इस वर्ष १५ जनवरीसे शुरू हो रहा हैं । साथ ही, प्रथम स्नान भी १५ जनवरीको होगा । मकर संक्रान्तिके दिन सूर्य धनु राशिको छोडकर मकर राशिमें प्रवेश करता है; इसलिए इस संक्रान्तिको मकर संक्रान्तिके नामसे जाना जाता […]

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दीपावली सात्त्विक रीतिसे कैसे मनाएं ? (भाग – ५)


दीपावलीके दिवस देवताका तत्त्व अपने घर या व्यावसायिक प्रतिष्ठानपर आकृष्ट करने हेतु बन्दनवार (तोरण) लगाएं । इसे आम्रपल्लव एवं गेंदेके पुष्पसे बनाएं । आजकल अनेक लोग रंग-बिरंगी कागदके (कागजके) या पॉलिथीनके तिरंगे आकृति समान या चिमचिमीके (रंगीन चमकनेवाले फॉयल समान)  बन्दनवार लगाते हैं या प्लास्टिकके मोतियोंकी मालासे घरके प्रवेश द्वारको सजाते हैं, ये सब तामसिक […]

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दीपावली सात्त्विक रीतिसे कैसे मनाएं ? (भाग – ४)


नूतन सात्त्विक भारतीय परम्परा अनुसार परिधान धारण करें, इससे भी देवताका तत्त्व आकृष्ट होता है । काले वस्त्र कमसे कम शुभदिनमें न पहनें । व्रत-त्योहारके दिवस विशिष्ट देवी या देवताका तत्त्व कार्यरत रहता है; अतः यदि हम सात्त्विक रीतिसे आचरण करते हैं तो उसे हम अधिकसे अधिक प्रमाणमें ग्रहण कर सकते हैं । आज कल […]

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दीपावली सात्त्विक रीतिसे कैसे मनाएं ? (भाग – ३)


शुभकामना पत्र देनेकी अपेक्षा मुहंसे बोलकर शुभकामनाएं दें, उससे शुभकामनाएं फलित भी होती हैं और प्रेम भी बढता है । शुभकामना पत्रका प्रचलन पाश्चात्योंने आरम्भ किया है और आज भी इसी माध्यमसे हमारे देशसे अनेक विदेशी प्रतिष्ठान अनेक कोटि रुपए लूटकर ले जाते हैं । हमारी वैदिक संस्कृतिके व्रत-त्योहार, प्रेम और सौहार्दका सन्देश देती हैं, […]

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दीपावली सात्त्विक रीतिसे कैसे मनाएं ? (भाग – २)


ट्यूनी बल्बसे सजावटकी अपेक्षा दीपोंकी लडीसे घरको सजाएं,  दीप सात्त्विक होता है और बिजलीके बल्बमें देवत्वको आकृष्ट करनेकी रत्ती भर भी क्षमता नहीं होती,

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दीपावली सात्त्विक रीतिसे कैसे मनाएं ? (भाग – १)


धर्म शिक्षणके अभावमें आजका हिन्दू व्रत-त्योहार भी सात्त्विक रीतिसे नहीं मनाता है, दीपावली सम्पूर्ण भारतमें पूरे हर्षोल्लासके साथ मनाया जानेवाला सामान्य जनमानसका त्योहार है; अतः अगले कुछ दिवस हम इसे सात्त्विक रीतिसे कैसे मना सकते हैं, इसके विषयमें प्रतिदिन कुछ न कुछ जानेंगे । अनेक हिन्दू आजकल दीपावलीमें दीपके स्थानपर मोमबत्ती जलाते हैं ।  मोमबत्ती […]

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पितृपक्ष (महालयपक्ष)


आश्विन माहके प्रथम पक्ष अर्थात् ‘कृष्णपक्ष’को `पितृपक्ष’ कहते हैं । यह पक्ष पितरोंको विशेष रूपसे प्रिय होता है । पितृपक्षके समय पितर पृथ्वीके समीप आते हैं । इन अतृप्त पितरोंकी तृप्ति हेतु इस कालमें श्राद्धविधिकी जाती है । इस पक्षमें पितरोंका महालयश्राद्ध करनेका विधान शास्त्रोंमें बताया गया है, इससे पितर वर्षभर तृप्त रहते हैं । […]

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राखी बांधते समय ‘येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबल:’ का श्लोक क्यों कहा जाता है ?


लक्ष्मीजीने सर्वप्रथम राजा बलिको बांधी थी । ये बात हैं जब दानवेन्द्र राजा बलि अश्वमेध यज्ञ करा रहें थे, तब नारायणने राजा बलिको छलनेके लिये वामन अवतार लिया और तीन पगमें सब कुछ ले लिया और पाताल लोकका राज्य रहनेके लिये दे दिया तब उसने प्रभुसे कहा कि कोई बात नहीं मैं रहनेके लिये सिद्ध […]

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गंगा दशहरा


  प्रति वर्ष ज्येष्ठ माहकी शुक्ल पक्षकी दशमीको गंगा दशहरा मनाया जाता है, इस वर्ष गंगा दशहरा ४ जून २०१७ के दिन मनाया जाएगा । शास्त्र वचन है – दशमी शुक्लपक्षे तु ज्येष्ठमासे बुधेsहनि । अवतीर्णा यत: स्वर्गाद्धस्तर्क्षे च सरिद्वरा ।। ज्येष्ठशुक्लदशम्यां तु भवेत्सौम्यदिनं यदि । ज्ञेया हस्तर्क्षसंयुक्ता सर्वपापहरा तिथि: ।। ज्येष्ठस्य शुक्लादशमी सम्वत्सरमुखा स्मृता […]

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पूजन एवं ज्ञानका महापर्व वसन्त पंचमी


अ. विद्याकी देवी, वाग्देवी मां सरस्वतीकी आराधनाका पर्व है वसन्त पंचमी कलियुग वर्ष ५११८ के माघ शुक्ल पंचमीको (१ फरवरी २०१७) वसन्त पंचमी है, इस पर्वसे ही ‘वसन्त ऋतु’का आगमन होता है । वसन्त पंचमी वाग्देवी मां सरस्वतीकी आराधनाका पर्व है । ब्राह्मण-ग्रन्थोंके अनुसार वाग्देवी मां सरस्वती ब्रह्मस्वरूपा, कामधेनु तथा समस्त देवोंकी प्रतिनिधि हैं । […]

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