धर्म

आर्य वैदिक सनातन हिन्दू धर्मकी विशेषता (भाग – ६)


विश्वके अधिकांश पंथका (तथाकथित धर्मका) अध्यात्म छिछला या सतही होनेके कारण वे पुनर्जन्मके सिद्धांतको मान्य नहीं करते हैं ! हिन्दू धर्मका अध्यात्मशास्त्र अत्यन्त प्रगत अवस्थामें…..

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आर्य वैदिक सनातन हिन्दू धर्मकी विशेषता (भाग – ५)


वैदिक सनातन धर्ममें नास्तिक और आस्तिक दोनों ही मतोंको मान्यता प्राप्त है ! अन्य अहिंदू पंथों समान यहां नास्तिकोंके साथ किसी भी प्रकारकी क्रूरता नहीं की जाती है…..

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आर्य वैदिक सनातन हिन्दू धर्मकी विशेषता (भाग – ४)


विश्वके अन्य पंथोंकी (तथाकथित धर्म) तुलनामें हिन्दू धर्मकी एक विशेषता यह है इस धर्ममें ईश्वरप्राप्तिके अनेक मार्ग है जिसे योगमार्ग, साधना पद्धति, या उपासना पद्धति कह सकते….

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आर्य वैदिक सनातन हिन्दू धर्मकी विशेषता (भाग – ३)


वैदिक सनातन धर्ममें अध्यात्म और साधनाका कोई अन्त नहीं, ध्यानस्थ शिव हमें यही सीख देते हैं । विश्वके सभी पंथोंका अध्यात्म स्वर्ग लोकपर आकर समाप्त हो जाता है ! वैदिक सनातन धर्ममें सप्त उच्च लोकका (भू, भुव, स्वर्ग….

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आर्य वैदिक सनातन हिन्दू धर्मकी विशेषता (भाग – २)


विश्वमें सनातन धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है जो सगुण और निर्गुण दोनों ही साधना पद्धतियोंको मात्र मान्यता ही नहीं देती है, अपितु इसके भिन्न तत्त्वोंके सूक्ष्म पक्षका गहनतासे विवरण देते हुए साधकोंको इनमेंसे किसी भी मार्ग या सिद्धांतपर चलनेकी छूट देती है । सनातन धर्मके सगुण और निर्गुण तत्त्वके उपासकोंमें कभी भी आपसी संघर्ष […]

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दुर्जन स्त्री भी दण्डकी अधिकारी है


कुछ लोग कहते हैं कि दुर्जन यदि स्त्री हो तो उसे कठोर दण्ड नहीं देना चाहिए ! शास्त्र कहता है, मात्र गर्भवती स्त्रीको कठोर शारीरिक या मानसिक दण्ड नहीं दिया जाना चाहिए, अन्यथा यदि स्त्री अधर्म करे तो उसे भी अवश्य ही दण्ड देना चाहिए ! और इसका बहुत अच्छा उदाहरण रावणकी बहन शूर्पनखा है, […]

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हिन्दू धर्ममें जाति व्यवस्थाकी उत्पत्ति कैसे हुई ?


किसी व्यक्तिका वर्ण (अर्थात आध्यात्मिक क्षमता ) क्या है ?, यह कोई आत्मज्ञानी संत ही बता सकते हैं , जैसे जैसे युगोंका प्रवाह होता गया , धर्मका एक-एक अंग नष्ट होता गया; अतः आजके उत्पत्ति-सम्बन्धी विज्ञान….

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सनातन धर्म सर्व पन्थोंका मूल है


यूरोप धर्मयात्राके मध्य २१ जून २०१३ को इटलीमें रहनेवाले भिन्न देशोंके नागरिकोंद्वारा अनुसरण किए जानेवाले भिन्न धर्मों एवं पन्थोंके प्रतिनिधियोंको एक स्थानीय मेलेके उद्घाटन समारोहमें अपने-अपने धर्मके विषयमें कुछ मिनिट…..

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मार्गदर्शक सदैव योग्य व शास्त्रसम्मत आचरण करें !


कुछ धर्मगुरु या मार्गदर्शक अपने भक्तोंके आग्रहपर पाश्चात्य संस्कृतिका अनुकरण करते हैं ।  जैसे एक धर्मगुरुके जन्मदिनके कार्यक्रममें मुझे आमन्त्रित किया गया था । उनके कार्यक्रममें एक भक्त केक……

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गीताकी सीखको आत्मसात करें


वर्तमान कालमें हिन्दू समाजको गीताके खरे ज्ञानकी सीख देनेवाले धर्मगुरुओंकी है, अत्यधिक आवश्यकता भगवद्गव्यका ज्ञान भगवान श्रीकृष्णने अर्जुनको उसे अपने क्षत्रिय धर्ममें पुनः प्रवृत्त करने हेतु दिया था । अर्थात गीता हमें अन्याय एवं अधर्मके विरुद्ध धर्मपालन करनेकी सीख देती है । यदि सम्पूर्ण गीता कण्ठस्थ हो और समाजमें व्यभिचार, अराजकता, अनाचार, भ्रष्टाचार इत्यादि व्याप्त […]

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