‘उपासना’ के प्रेरणास्रोत – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले

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वैदिक उपासना पीठके प्रेरणास्त्रोत – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी का परिचय 

 

१. आन्तरराष्ट्रीय ख्याति के सम्मोहन उपचार-विशेषज्ञ
परात्पर गुरु डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजी ने चिकित्साशास्त्र की पढाई पूरी करने के पश्‍चात वर्ष १९७१ से १९७८ तक ब्रिटेन में उच्च शिक्षा प्राप्त कर, सम्मोहन उपचार-पद्धति के विषय में शोध किया । इस शोध में उन्होंने, अनुचित कृत्यों का बोध तथा उनपर नियंत्रण(मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया पद्धति; साइको-फीडबैक टेक्निक), अनुचित प्रतिक्रियाआें के विरुद्ध उचित प्रतिक्रियाएं उत्पन्न करना (प्रतिक्रिया प्रतिस्थापना पद्धति; रिस्पॉन्स सब्स्टीट्यूशन टेक्निक), घटना का मन में पूर्वाभ्यास करना (सम्मोहक विसुग्राहीकरण पद्धति; हिप्नोटिक डिसेंसिटाइजेशन टेक्नीक); आदि सम्मोहन-उपचार से संबंधित नई पद्धतियों को प्रस्तुत किया ।

२. गुरु का आशीर्वाद और सनातन संस्था की स्थापना
परात्पर गुरु डॉ. आठवले को अध्यात्म की श्रेष्ठता ज्ञात होनेपर उन्होंने अध्यात्मप्रसार के लिए अपने सद्गुरु परम पूज्य भक्तराज महाराज के आशीर्वाद से सनातन संस्था की स्थापना   की ।
३. विश्‍व के उद्धार हेतु संतों की भेंट देनेवाले परात्पर गुरु !
जिज्ञासुआें को ईश्‍वर की प्राप्ति शीघ्र हो, इसके लिए परम पूज्य डॉक्टरजी ने कर्म, ज्ञान और भक्ति योगमार्गों का संगम, गुरुकृपायोग प्रतिपादित किया है । जुलाई २०१६ तक इस गुरुकृपायोग के अनुसार साधना कर, ६८ साधक संत बन चुके हैं । इस साधनामार्ग पर चलकर, विदेश के जिज्ञासु भी अपना उद्धार कर रहे हैं ।
४. हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के प्रेरणास्रोत !
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए सनातन प्रभात नामक नियतकालिकों का प्रकाशन आरंभ किया है । उनके मार्गदर्शन से अनेक लोग, हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए संगठित होकर कार्य कर रहे हैं । हिन्दुत्ववादी संगठनों को भी उनसे प्रेरणा मिलती है ।
५. हिन्दू धर्म की श्रेष्ठता सिद्ध करनेवाले आध्यात्मिक शोध !
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने विपुल शोधकार्य किया है; उदाहरणस्वरूप, आध्यात्मिक कष्ट का आध्यात्मिक उपचार; हिन्दुआें के आहार, वेशभूषा, धार्मिक कृत्य आदि से व्यक्ति को होनेवाले लाभ इत्यादि ।
६. संकल्पित प्रकल्प : अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की स्थापना !
प्राचीन काल में तक्षशिला, नालंदा आदि विश्‍वविद्यालयों के माध्यम से वेद, शास्त्र, कला, तत्त्वज्ञान आदि का प्रचार होता था । अब उस धार्मिक ज्ञान का प्रसार करने के लिए परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के मार्गदर्शन में अध्यात्म विश्‍वविद्यालय का निर्माण किया जा रहा है ।

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