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आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २७.८)


‘भाग – २७.७’में हमने करेलेके लाभोंके विषयमें जाना था, आज हम इसके प्रयोगमें रखनेवाली आवश्यक सावधानियोंके विषयमें जानेंगें, जिससे करेलेका सम्पूर्ण लाभ लिया जा सकता है ।
सावधानियां :
१. करेला क्रय करते समय, ताजा और गहरे हरे रंगका ही चुनें । जिन करेलोंपर पीले या नारंगी रंगके धब्बे हो या फिर नरम स्थल हो उन्हें क्रय न करें ।
२. करेलेका शाक अथवा रस बनानेसे पूर्व इसे अच्छी प्रकारसे ठण्डे जलसे धो लें ।
३. एक दिवसमें अधिकसे अधिक १ या २ करेलेका ही सेवन करना चाहिए । इसके अत्यधिक सेवनसे पेटमें वेदना या अतिसार हो सकता है ।
४. गर्भवती महिलाओंको अधिक करेला खानेसे बचना चाहिए; क्योंकि यह समयसे पूर्व ही शिशु-जन्मका कारक बन सकता है । करेलेके रसमें ‘मोमोकैरिन’ नामक तत्त्व होता है, जो मासिकके बहावको बढा देता है । गर्भावस्थाके समय करेलेका अधिक सेवन करनेसे गर्भपात तक हो सकता है ! इसके साथ ही करेलेमें ‘एंटी लैक्टोलन’ तत्त्व भी होते हैं, जो गर्भावस्थाके समय दूध बननेकी प्रक्रियामें कठिनाई उत्पन्न करते हैं ।
५. गर्भधारण की योजना करनेवाले महिलाओं व पुरुषों दोनोंके लिए ही करेलेका अधिक सेवन हानिकारक हो सकता है ।
६. करेलेका अधिक सेवन रक्तमें शर्कराको अल्प करता है और कई बार शर्कराके स्तरको इतना अल्प कर देता है कि यह ‘हाइपोग्लाइकोम‌िया कोमा’ नामक मानसिक समस्या भी उत्पन्न कर सकता है ।
७. करेलेके अत्याधिक सेवनसे ‘हेमोलाइट‌िक अनीमिया’ हो सकता है । यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीरकी लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं । इस स्थितिमें उदरमें वेदना, सिरमें वेदना, ज्वर जैसी समस्याएं हो सकती हैं ।
आशा है, आप करेलेके विषयमें दी गई इन जानकारियोंको जीवनमें अपनाकर लाभान्वित होंगें ।



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