कश्मीर घाटीमें पृथकतावादियों व पत्थरबाजोंपर नियन्त्रण, १५० से अधिक बन्दी बनाए गए !!


फरवरी २३, २०१९

जम्मू रियासतमें शुक्रवार, २२ फरवरीकी रात्रि सुरक्षा बलोंने छापेमारीकर १५० से अधिक पृथकतावादियों और पत्थरबाजोंको बन्दी बनाया है । इनमें अधिकतर ‘जमात-ए-इस्लामी’से जुडे हुए हैं । ‘जमात-ए-इस्लामी’के राज्य प्रमुख अब्दुल हमीद फयाज भी पकडे गए हैं । उच्चतम न्यायालयमें ‘अनुच्छेद ३५-ए’पर २६ फरवरीसे आरम्भ हो रही सुनवाईसे पूर्व घाटीमें व्याप्त तनावके कारण यह धरपकड की गई है । यद्यपि, पुलिसने इसे नियमित प्रक्रिया बताते हुए कहा कि कुछ नेताओं और पत्थरबाजोंको बन्दी बनाया गया है ।


‘जमात’ने लोगोंको बन्दी बनाए जानेकी निंदा करते हुए कहा कि यह क्षेत्रमें और अनिश्चितताकी राह प्रशस्त करनेके लिए भली-भांति रचा गया षडयन्त्रका भाग है ।

इसके अतिरिक्त पुलिसने जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिकको भी बन्दी बनाकर ‘सेंट्रल कारावास’ भेज दिया था ।


बताते हैं कि ‘जमात-ए-इस्लामी’पर यह प्रथम बडी कार्यवाही है । संगठन पूर्वमें आतंकी संगठन ‘हिजबुल मुजाहिदीन’की राजनीतिक शाखाके रुपमें कार्य करता था । यद्यपि, उसने सदैव स्वयंको एक सामाजिक और धार्मिक संगठन बताया !

महबूबा मुफ्तीने ‘जमात-ए-इस्लामी’पर छापेमारीकी वैधतापर प्रश्न किया है । कहा कि मनमाने ढंगसे राज्यमें प्रकरण जटिल ही होगा । आप एक व्यक्तिको बन्दी रख सकते हैं; परन्तु उनके विचारोंको नहीं !

“कितना विचित्र है कि ‘हिजबुल मुजाहिदीन’की राजनीतिक शाखाके रुपमें कार्य करनेवाला तथाकथित धार्मिक संगठन ‘जमात-ए-इस्लामी’पर आजतक कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई !! आतंकियोंको तो जब हम स्वयं आश्रय दे रहे हैं तो वे क्यों पोषित नहीं होंगें ? भारत महान है; परन्तु इतना भी महान नहीं होना चाहिए कि शत्रुओंका ही पोषण करना पडे ! क्या हम ऐसी कार्यवाहीके लिए हमारे वीर सैनिकोंके मरनेकी प्रतिक्षा करते रहेंगें ? अब मोदी शासन इसपर अन्तिम कार्यवाहीकर इसे परिणामतक पहुंचाए, ऐसी उनसे अपेक्षा है । – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : अमर उजाला



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