‘बीबीसी’ने उगला विष, रोहिग्याओंके जैसे प्रवासी भारतीयोंको भगानेका स्वप्न देख रहे हैं वुसतुल्लाह !


२ सितम्बर, २०१९

‘बीबीसी’ने एक लेख प्रकाशित किया है। इस लेखको वुसतुल्लाह खानने लिखा है। खान भारतीयोंको चेतावनी दे रहे हैं। बीबीसी कह रहा है कि यदि ब्रिटेनके प्रधानमन्त्री बॉरिस जॉनसन अपने देशमें रह रहे सभी भारतीयोंको बोरिया-बिस्तर समेटनेका आदेश दे दें तो क्या होगा ?  इसीप्रकार कनाडा और अमेरिकामें भी किया जाए तो क्या होगा ? रोहिंग्या घुसपैठियोंके प्रति सहानुभूति प्रकट करते हुए ‘बीबीसी’ लिखता है कि भारतीयोंको भी विदेशोंसे निकाला जा सकता है।

यद्यपि, ‘बीबीसी’ यहां रोहिंग्या घुसपैठियों और प्रवासी भारतीयोंकी तुलना करते समय इस बातको पूर्ण रूपसे अनदेखा कर देता है कि भारतीय नागरिक जहां भी रहते हैं, वहांकी अर्थव्यवस्थामें महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वे आतंकवादी नहीं बनते। एक प्रकारसे वुसतुल्लाह खान ‘बीबीसी’के मध्यसे ब्रिटेनके प्रधानमंत्री बॉरिस जॉनसन, अमेरिकाके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और कनाडाके राष्ट्रपति जस्टिन ट्रुडोको यह युक्ति सुझा रहे हैं कि प्रवासी भारतीयोंको निकाल बाहर किया जाए।

यह इतना सरल है क्या? आइए, देखते हैं । संयुक्त राष्ट्र अमेरिकामें अनुमानित ३० लक्ष भारतीय मूलके लोग रहते हैं। भारतीय उद्योग  (कम्पनियां) अमेरिकाकी ‘जीडीपी’में वार्षिक ५७ ‘बिलियन डॉलर’से भी अधिक का योगदान देती हैं। अमेरिकामें रहने वाले भारतीयोंकी घरेलू आय सभी प्रवासियोंमें सबसे अधिक है। इसके अतिरिक्त वे सबसे अधिक व्यापार-पसंद भी हैं। ‘गूगल’, ‘फेसबुक’, ‘ओरेकल’, ‘एडोबी’, ‘सॉफ्टबैंक’, ‘कॉग्निजेंट’ और ‘मास्टरकार्ड’ सहित कई बडी उद्योगोंमें सर्वोच्च पदोंपर भारतीय पदाधिकारी हैं ।

“ऐसी पत्रकारिताका राष्ट्रव्यापी विरोध होना चाहिए !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : ऑप इंडिया



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