ममता बनर्जीने की मुख्यमंत्री पदसे त्यागपत्र देनेकी बात, चुनाव आयोगपर लगाए गम्भीर आरोप !!


मई २६, २०१९

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बैनर्जीने लोकसभा चुनावमें पार्टीके खराब प्रदर्शनके पश्चात पश्चिम बंगालके मुख्यमन्त्री पदसे त्यागपत्रकी शनिवार, २६ मईको प्रस्तुति की; परन्तु तृणमूल कांग्रेसने इसे नकार दिया । बैनर्जीने भाजपापर आरोप लगाया कि उसने पश्विम बंगालमें वोट प्राप्त करनेके लिए लोगोंका धार्मिक आधारपर ध्रुवीकरण किया । पश्चिम बंगालकी ४२ लोकसभा सीटोंमेंसे भाजपाने १८ पर विजय प्राप्तकर तृणमूल कांग्रेसको एक झटका दिया है । तृणमूल कांग्रेसने २२ सीटें जीती हैं, जो कि २०१४ में आई ३४ सीटोंसे अल्प है ।

बैनर्जीने पार्टीके सभी उम्मीदवारों और वरिष्ठ नेताओंके साथ घंटे भर चली बैठकके पश्चात कहा, ”मैं मुख्यमन्त्री पदसे त्यागपत्र देना चाहती थी । कुर्सी मेरे लिए कुछ नहीं है । यद्यपि पार्टीने उसे नकार दिया । मुझे कुर्सीकी आवयकता नहीं; परन्तु कुर्सीको मेरी आवयकता है ।”

उन्होंने कहा, ”जिस पार्टीने कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखाई, वह सीटें जीत गई । मेरा मानना है कि मैंने लोगोंके लिए अधिक किया है । अब मुझे अपनी पार्टीके लिए काम करनेकी आवयकता है ।” उन्होंने कहा, ”धनबल और धार्मिक विभाजनने बडा खेल खेला । प्रशासनको गत पांच माहसे भारतके चुनाव आयोगने अपने हाथमें ले लिया था । मैं ऐसेमें मुख्यमंत्री कैसे रह सकती हूं ?; इसीलिए मैंने पद छोडनेकी प्रस्तुति की ।”

उल्लेखनीय है कि भाजपा, बंगालमें तृणमूलके लिए चुनौती देनेवाली मुख्य पार्टीके रूपमें उभरी है । गत मतदानमें भाजपाको बंगालमें लोकसभाकी दो सीटें मिली थीं । ममताने भाजपाके शानदार प्रदर्शनपर संदेह उत्पन्न किया । उन्होंने दावा किया, ”यह बडी विजय संदेहसे परे नहीं है । यह अत्यधिक आश्चर्यजनक है कि कैसे विपक्षका कई राज्योंमें पूर्ण रूपसे सफाया हो गया ।” उन्होंने दावा किया कि ईवीएमको इसप्रकारसे प्रोग्राम किया गया था कि भाजपाको एक लाखसे अधिक वोटकी बढत मिले ।

उन्होंने आरोप लगाया, ”हो सकता है कि इसमें विदेशी हाथ हो । कोटि रुपये व्यय करके वोट क्रय किए गए । उत्तर बंगालमें हम असमसे सीमा साझा करते हैं । राज्यके वित्त मन्त्री (हेमंत विश्व सरमा) यहां दो सप्ताहसे बैठे हुए थे । वह यहां क्या कर रहे थे ? सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) मतदाताओंको ले गई और उनके लिए वोट करनेके लिए बाध्य किया । चुनाव आयोग चुनावके मैचके ‘मैन ऑफ द मैच’ है ।”

उन्होंने कहा कि भारतके चुनाव आयोगका रवैया ”पक्षपातपूर्ण” था । तृणमूल कांग्रेस प्रमुखने यह भी कहा कि भाजपाने चुनाव जीतनेके लिए राज्यमें आपातकाल जैसी स्थिति बनाई । उन्होंने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी और भाजपापर कटाक्ष करते हुए कहा, ”राजीव गांधीको ४०० सीटें मिली थीं । क्या वे संसद चला पाये ? इसलिए, ऐसा अहंकार ठीक नहीं है । विपक्षी नेताओंने जब प्रश्न उठाये तो उन्हें पाकिस्तानी कहा गया ।” उन्होंने कहा कि वे साम्प्रदायिकताके विरुद्ध अपनी लडाई जारी रखेंगीं ।

“ममता दीदी ! यदि चुनाव आयोगका रवैया सही रहता तो तृणमूल सीधा मतदान प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाती; क्योंकि जिस प्रकार तृणमूलने बंगालमें आतंक मचाया था, उससे तो किसी भी दलको मतदान से बाहर कर दिया जाता और वोटों का ध्रुवीकरण भाजपाने नहीं, वरन हिन्दुओंसे पक्षपातकर आपने किया है; अतः नैतिक रूपसे त्यागपत्र देकर सन्यास लेने, यही उचित होगा; परन्तु आप सम्भवत‌: ऐसा नहीं करेंगी; क्योंकि आपको कुर्सीकी आवश्यकता है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान



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