मुस्लिम विहीन हो रहा है श्रीलंकाका मन्त्रिमण्डल, सत्ता ले रहे बौद्ध अपने हाथमें !!


जून ४, २०१९

२१ अप्रैलको श्रीलंकाके भीषण इस्लामिक आतंकी आक्रमणको १ माहसे भी अधिक समय हो गया है; परन्तु वहांकी स्थिति सामान्य होती हुई नहीं दिख रही है । श्रीलंका उस राहपर चलता हुआ दिख रहा है, जिसपर पहले चीन तथा म्यांमार चल चुके हैं । आपको बता दें कि श्रीलंकाई सत्ता मुस्लिम मुस्लिम विहीन होती जा रही है तथा वहांके बौद्ध पूर्ण रूपसे सत्ताको अपने हाथमें ले रहे हैं ।

समाचारके अनुसार, श्रीलंकाई शासनमें सम्मिलित ९ मुस्लिम मन्त्रियों तथा २ प्रांतीय राज्यपालोंने सोमवार, ३ जूनको त्यागपत्र दे दिया है । यह गत २ सप्ताहसे से जारी बौद्ध समुदायके लोगोंके विरोध प्रदर्शनके दबावमें आकर दिए गये हैं । इसे लेकर चार दिनोंसे बहुसंख्यक बौद्ध समुदायके सहस्रों लोग कैंडीमें प्रदर्शन कर रहे थे । प्रदर्शनकारियोंमें बौद्ध समुदायके सांसद अतुरालिए रतना थिरो भी सम्मिलित थे, जो बौद्ध भिक्षु भी हैं ।

अतुरालिए तीनों मन्त्रियोंके त्यागपत्र और जांचकी मांगको लेकर कैंडीमें चार दिनसे आमरण अनशन कर रहे थे । अतुरालिएका आरोप है कि तीनों मुस्लिम मन्त्रियोंके सम्बन्ध कट्टरपंथी संगठन ‘नेशनल तौहीद जमात’से हैं ! श्रीलंकाके उद्योग एवं वाणिज्य मन्त्री रिशथ बाथिउथीनपर ‘आईएसआईएस’से जुडे स्थानीय इस्लामिक समूह ‘नेशनल तौहीद जमात’को समर्थन देनेका आरोप लगा !! इसी समूहने ये आक्रमण किए थे, जिसमें २५८ लोगोंके प्राण चले गए थे ।

श्रीलंकाकी २२५ सदस्यीय संसदमें १९ मुस्लिम हैं और उनमेंसे नौके पास मन्त्रिमण्डल, राज्य और उपमन्त्रीके पद हैं ।

“श्रीलंका तो अपने उज्जवल व शान्त भविष्य निर्माणको चल पडा है, जबकि बुद्धके अनुयायी बौद्ध सबसे शान्ति प्रिय और अहिंसक माने जाते हैं, वे भी अब उग्र होकर अपने अधिकार ले रहे हैं; क्योंकि वे जानते हैं कि ध्यान विप्पसनाका हो या सनातनका, आतंकके वातावरणमें तो कुछ भी नहीं हो सकता है । भारतीय शासकगण और धर्मनिरपेक्षतामें अंधे लोग इसे कब समझेंगें ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ


स्रोत : सुदर्शन न्यूज



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