शिव स्तुति


नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय।

नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै न काराय नम: शिवाय ।।

अर्थ : उन महेश्वरको वंदन करती हूं जिनके गलेमें सर्पका हार है, जिनके त्रिनेत्र हैं, जिनके सम्पूर्ण अंगमें भस्म लगा है, जो नित्य है, शुद्ध है, दिगंबर है जो ‘न’ अक्षरके प्रतीक हैं !



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