चीनने मुसलमानोंपर किया कडा नियन्त्रण, मुसलमानोंके घरके बाहर लगाए ‘क्यूआर कोड’ !


सितम्बर १४, २०१८

चीनके शिनजियांग प्रान्तमें ‘उइगर मुस्लिमों’के अतिरिक्त दूसरे अल्पसंख्यकोंके विरुद्ध चीनी शासनकी कडाई कोई नई बात नहीं है । अब विवरण आया है कि चीनके शिनजियांगमें १० लाख से अधिक मुस्लिम गुम (लापता) हैं । इनके बारेमें कहा जा रहा है कि चीनके कम्युनिस्ट शासनने उन्हें शिविरोंमें बन्द किया हुआ है । यहां पर उन्हें उन्हें कम्युनिस्टके विचारोंकी घुट्टी पिलाई जा रही है । कहा जा रहा है कि उन्हें कथित रूपसे देशभक्त बनाया जा रहा है । चीन चाहता है कि उनकी उइगर पहचान समाप्त हो जाए ।

चीन इस समय एक लोग और एक राष्ट्रके सिद्धान्तपर कार्य कर रहा है । ऐसे में वह उइगर, उजबेक और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायके लोगोंको अपना लक्ष्य बना रहा है । चीनने उइगर मुसलमानोंपर दृष्टि रखनेके लिए उइगर मुसलमानोंके घरके बाहर ‘क्यूआर कोड’ लगाया जा रहा है । चीनपर यह आरोप ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) नामक संगठनने अपने विवरणमें लगाए हैं । संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनोंने इनपर चिन्ता व्यक्त की है । शिनजियांगमें बडी संख्यामें तुर्की भाषा बोलने वाले उइगर मुस्लिम रहते हैं । यहां आन्दोलन हो चुके हैं और चीनकी सत्ता इनमें से कईको अलगाववादी मानती है ।

अभी आए एक विवरणके अनुसार, चीनमें सुरक्षा अधिकारी किसी घरमें घुसने से पूर्व घरके द्वारपर लगे यन्त्रको चलभाषसे स्कैन करते हैं । विवरण बनाने वाले एक व्यक्तिका इस नई योजनाके बारेमें कहना है कि चीनी शासन मानव अधिकारोंपर प्रहार कर रही है । यह गत कई दशकों से अनदेखा किया जा रहा है । दूसरी ओर चीनका प्रशासन इसे नकार रहा है । उसका कहना है कि उन यन्त्रकी सहायता से जनगणना नियन्त्रण और घर-घर दी जानेवाली सेवाओंमें सहायता मिलती है ।

कहा जा रहा है कि इन लोगोंको डिटेंशन शिविरमें रखा जा रहा है, जहां उन्हें अपने धर्मको भूलने का प्रयास कराया जा रहा है । चीनमें एक अमेरिकी प्रतिनिधिमण्डलने अल्पसंख्यकोंका बडी संख्यामें बन्दी बनानेकी घटना बताया था । चीनने इन सभी आरोपोंको नकारा है । उसका कहना है कि वह अपने देशकी एकता और अखण्डताके लिए ऐसा कर रहा है । चीनके विदेश मन्त्रालयके प्रवक्ता गेंग शुआंगका कहना है कि चीन अपने सभी नागरिकोंके धार्मिक हितोंकी रक्षा करता है । सभी प्राचीन समूह अपनी धार्मिक स्वतन्त्रताका पूरा लाभ ले रहे हैं ।

 

“चीन इन धर्मान्धोंकी वास्तविकता से परिचित है, इस हेतु ऐसा करना उचित ही है । भारत जैसे देशने धार्मिक स्वतन्त्रताके इस तथाकथित राग अलापने से ही आज राष्ट्रपर इतना गहरा संकट खडा है” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जी न्यूज



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