आर्थिक संकटको दूर करनेके कुछ उपाय (भाग-७)


बौद्धिक एवं शैक्षणिक क्षमता होते हुए भी चाकरी(नौकरी) न लगना, चाकरीमें बहुत श्रम करनेपर भी प्रोन्नति (प्रमोशन) न होना, व्यापारमें भारी हानि होना और वह भी बार-बार होना, चोरी होनेके कारण आर्थिक हानि होना, आग या दुर्घटना होनेके कारण आर्थिक हानि होना यह सब पितृदोषके कारण हो सकता है इसलिए यदि आपकी अपने जीवनमें सुख-समृद्धि चाहिए तो पितरोंको तृप्त और शान्त रखें इस हेतु पितरोंके निमित्त सनातन धर्ममें बताए अनुसार सर्व धर्माचरणका पालन करें एवं साथ ही ‘श्री गुरुदेव दत्त’का जप करें ! एवं तीव्र पितृदोष हो तो किसी सन्तकी कृपा पाने हेतु तन, मन, धन एवं बुद्धिसे उनकी शरणमें साधना करें; क्योंकि तीव्र पितृदोषमें जप, तप, पूजा इत्यादि कुछ भी अधिक फलदायी नहीं होता है !



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