चीनकी दोहरी नीति, पडोसी देशोंमें आतंकका समर्थन और स्वयंके देशमें बनाए ३०,००० मुस्लिम आतंकी बन्दी !


मार्च १८, २०१९

 

पडोसी देश चीनने आतंकवादसे युद्धके प्रकरणपर श्वेत-पत्र जारी किया है । चीनपर शिंजियांग प्रान्तमें मानवाधिकार हननके आरोप लगते रहे हैं । संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोगने अपने ब्यौरेमें कहा था कि राष्ट्रपति शी जिनपिंगके सत्ता सम्भालनेके पश्चात मानवाधिकार हननके प्रकरण और अधिक हो गए हैं । अब चीनने दावा किया है कि उसने गत पांच वर्षोंमें शिंजियांग प्रान्तसे १३,००० इस्लामिक आतंकियोंको बन्दी बनाया है । चीनका शिंजियांग प्रान्त पृथकतावाद और कट्टरवादके नियन्त्रणमें है । चीनके इस पश्चिमी प्रांतमें रह रहे उईगर मुसलमान स्वयंको तुर्कके निकट मानते हैं; परन्तु चीनने “The Fight Against Terrorism and Extremism and Human Rights Protection in Xinjiang” नामक ब्यौरेमें कहा है कि २०वीं शताब्दीके आरम्भमें ही यहां पैन-इस्लामिक और पैन-तुर्की सोच फैल गई थी ।

ब्यौरेमें चीनने कहा है कि इस क्षेत्रमें इस्लामके आनेके साथ ही यहांकी धार्मिक संरचनामें परिवर्तन आ गया और शासकोंने युद्ध और बलपूर्वक इस्लामको प्रसारित किया । चीनने साथ ही यह भी दावा किया कि उसने क्षेत्रमें मानवाधिकारकी रक्षा की है । यह संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोगकी ‘वर्ल्ड रिपोर्ट २०१८’ में कही गई बातोंके एकदम विपरीत है । यूएनने कहा था कि चीन उईगर मुसलमानोंकी परम्पराको संककारी मानता है । संयुक्त राष्ट्रने कहा था कि चीनने क्षेत्रके कुछ भागोंमें लोगोंको बलात एक शासकीय निगरानी (सर्विलेंस) विनियोग (ऐप) ‘डाउनलोड’ करनेको विवश किया ।

जबकि, चीनने अपने ब्यौरेमें दावा किया है कि उसने २०१४ से अबतक १२९९५ आतंकियोंको बन्दी बनाया, २०५२ विस्फोटक सामग्रीको अधिकृत किया, १५८८ हिंसक एवं आतंकी समूहोंको नष्ट किया, ३०,६४५ लोगोंको ४८५८ अवैध धार्मिक गतिविधियोंके लिए दण्डित किया । चीनने अंक गिनाते हुए कहा कि कई तो ऐसे आतंकी थे, जिन्होंने दण्ड पानेके पश्चात भी पुनः वही कार्य किया । ऐसे लोगोंपर और भी अधिक कार्यवाही की गई । चीनने कहा है कि शासनसे लेकर विद्यालयोंतक, प्रत्येक स्थानपर धार्मिक बीज बोए जा रहे थे, जिसपर नियन्त्रण पानेके लिए प्रत्येक प्रयास किए गए ।

चीनने क्षेत्रमें विकास कार्योंको गिनाते हुए दावा किया कि उसने आतंक और पृथकतावादको समाप्त करनेके लिए जनताके लिए विकास कार्योंका आश्रय लिया है । चीनने अपने प्रयासोंकी प्रशंसा करते हुए कहा कि इन्हीं सब उपायोंके कारण गत २ वर्षोंसे शिंजियांगमें कोई हिंसक आतंकी गतिविधि नहीं हुई है । चीनने दावा किया कि उसने इसके लिए किसी भी धर्म विशेष या उसकी परम्पराओंको लक्ष्य नहीं बनाया ।

 

“गत दिवसोंमें आतंकी मसूदको वैश्विक आतंकी घोषित करनेके प्रस्तावको चीनने नकार दिया और अब अपने देशमें आतंकके रोकनेके प्रयास गिनवा रहा है ! चीनमें मुसलमानोंको आतंकी बताया जा रहा है और अन्य देशोंमें ऊन्हीं आतंकी मुस्लिमोंको आश्रय दे रहा है ! यह चीनकी द्विपक्षीय नीति और भारतके प्रति विषकारी मानसिकताको प्रदर्शित करणा है और यह भी दिखाता है कि भारत भले ही कुछ भी करे; परन्तु चीन भीतर ही भीतर भारतको नष्ट करनेका ही प्रयास कर रहा है ! भारत भी अपने प्रयासोंको और तीव्र करें व शस्त्रमें किसी अन्यपर निर्भर रहनेके स्थानपर आत्मनिर्भर बने और आतंकका समूल विनाश करे, जिससे निकटवर्ती देशोंकी यह कुठाघात नीति असफल हो !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : ऑप इण्डिया



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