चीनमें रहते हैं करोडो ईसाई, लेकिन प्रार्थनाके लिए नहीं है कोई गिरिजाघर !


सितम्बर १५, २०१८

पुयांग : चीनके वामपन्थी शासनके धर्मोंको चीनी ढंगसे ढालने और विकास परियोजनाओंके लिए प्राचीन क्षेत्रोंको ढहानेका अभियान तेज करनेके चलते हेनान प्रान्तमें रोमन कैथोलिकों समुदायके पास प्रार्थना करनेके लिए कोई स्थान नहीं बचा है । मध्य चीनमें कैथोलिक गिरिजाघरके बाहर लगे एक शासकीय साइन पट्टपर बच्चोंको प्रार्थनामें नहीं सम्मिलित होनेकी चेतावनी दी गई है ।

अवैध गिरिजाघर गिराए जा रहे हैं । पादरी अपने समुदायके लोगोंकी निजी सूचना अधिकारियोंको दे रहे हैं । चीनमें ईसाईयोंके लिए इसी प्रकारका वातावरण बना हुआ है । यह अभियान और तेज होता जा रहा है । सन् १९५१ में वेटिकन और बीजिंगके आपसी सम्बन्ध कटु हो गए थे; यद्यपि अब उनमें सुधार आया है और बीजिंगके बिशपकी नियुक्तिके अधिकारको लेकर जारी विवाद अब कुछ सुलझता दिख रहा है ।

इस विवादके कारण चीनके लगभग १,२०,००,००० कैथोलिक दो समूहोंमें बंट गए हैं । एक समूह जो शासनद्वारा स्वीकृत धर्माधिकारीको मानता है और दूसरा वह जो रोम समर्थक गिरिजाघरके स्वीकृत नियमोंको मानता है । गिरिजाघरके शीर्षसे ‘क्रॉस’ हटा लिए गए हैं, मुद्रित धार्मिक सामग्रियों और पवित्र चीजोंको अधिकृत कर लिया गया है और चर्चद्वारा चलाए जाने वाले केजी विद्यालयोंको बन्द कर दिया गया है ।

चर्चको राष्ट्रीय धवज फहराने और संविधानको प्रदर्शित करनेको कहा गया है, जबकि सार्वजनिक स्थानोंसे धार्मिक प्रतिमाओंको हटानेको कहा गया है ।

 

“चीनको इन धर्मान्धोंकी वास्तविकता ज्ञात है, इसलिए वह इनकी जडे उखाड रहा है । क्या भारत इन धर्मान्धोंके विरुद्ध कार्यवाही करेगा ?, जो प्रत्येक दिवस हिन्दू धर्मके लिए संकट बनते जा रहे हैं !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान



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