हमारा रसोईघर एक आयुर्वेदिक तत्त्वज्ञानसे भरपूर शोधशाला है (भाग – ३)


हमारे रसोईघरमें मौसमके अनुसार मात्र भोजन ही नहीं पेय पदार्थ भी परिवर्तित हो जाते हैं जैसे अब ग्रीष्म ऋतु आरम्भ होनेवाली है तो हमारे यहां भिन्न प्रकारके पारंपरिक पेय घरमें  बनाए जाते हैं ! ये मात्र जिह्वा सुख हेतु नहीं बनाये जाते हैं अपितु इनके पीछे आयुर्वेदका गूढ तत्त्वज्ञान निहित होता है जैसे गर्मीमें कच्चे आमकी कैरीका पना, घर-घर बनाया जाता है एवं इसका सेवा सभी चावसे करते हैं ! यह लूसे तो बचाता ही है साथ ही शरीरमें जलका अभाव अर्थात डिहाइड्रेशन नहीं होने देता है | साथ ही इसमें जो सामग्री डाली जाती है वह पाचनको बढाता है एवं पेटकी समस्याओंको घटाता है और विटामिन सीका भी अच्छा स्रोत होता है !
उसीप्रकार छाछ, बेलका रस, सत्तूका पेय एवं निम्बू पानी भी इस कालमें पीये जाते हैं इन सबमें औषधीय गुण हैं ! यदि विस्तारसे बताउंगी तो यह लेख बहुत लंबा हो जायेगा ! संक्षेपमें यह समझ लें कि जैसे अच्छा वैद्य रोगीकी प्रकृति देखकर औषधि देता है वैसे ही हमारी गृहिणियां प्रकृति या ऋतु अनुरूप औषधीय गुणवाले आहार बनाकर सबको स्वस्थ रखती हैं !


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