उपराष्ट्रपति दोस्तमके पहुंचते ही काबुल वायुयानतलपर (एयरपोर्टपर) आत्मघाती विस्फोटमें १६ लोगोंकी मृत्यु, ६० चोटिल


जुलाई २२, २०१८

एक वर्षसे निर्वासित चल रहे अफगानिस्तानके उपराष्ट्रपति अब्दुल राशिद दोस्तुमकी रविवारको वापसीपर उनके समर्थकोंकी प्रसन्नता उस समय शोकमें बदल गई, जब ‘काबुल इण्टरनेशनल एयरपोर्ट’के द्वारपर एक आत्मघाती आक्रान्ताने बम विस्फोट कर दिया । विस्फोटमें ‘कम से कम’ १६ लोग मारे गए, जबकि ६० लोग चोटिल हुए हैं; यद्यपि उपराष्ट्रपति बख्तरबन्द वाहनमें बैठे होनेके कारण बाल- बच गए ।

एक वरिष्ठ शासकीय अधिकारीके अनुसार, जिस समय विस्फोट हुआ, तब राजनेताओं और उनके समर्थकोंकी भीड शक्तिशाली पारम्परिक उज्बेक नेताका सम्मान करनेके पश्चात वापस लौट रही थी । दोस्तुमके प्रवक्ता बशीर अहमद तैयान्जने कहा कि आक्रमणके समय बख्तरबन्द वाहनमें होनेके कारण उन्हें कोई हानि नहीं पहुंची है । काबुल पुलिसके प्रवक्ता हशमत स्तानकजाईने मृतकों और चोटिलकी संख्याकी पुष्टिकी है । आन्तरिक सुरक्षा मन्त्रालयके प्रवक्ता नजीब दानिशने बताया कि आक्रान्ता पैदल ही घटनास्थलपर पहुंचा था । उन्होंने बताया कि मृतकोंमें बच्चे, सुरक्षा कर्मी और साधारण नागरिक सम्मिलित हैं ।

दोस्तुमको अपने राजनीतिक विरोधी व उत्तरी राज्य जोआजुमके पूर्व अधिकारी अहमद इशाचीका अपहरण कर उसके साथ अपने अंगरक्षकोंसे कुकर्म कराने और कई दिन तक परेशान करनेके आक्षेपमें निर्वासित किया गया था । दोस्तुमके ७ अंगरक्षकोंको इसमें दण्ड भी दिया गया था ।

मई २०१७ में निर्वासित किए गए दोस्तुम तुर्कीमें रह रहे थे और वहां से एक विशेष व्यक्तिकी भांति रविवारको शासनके आग्रहपर विमानसे वापस लौटे थे । अफगानिस्तानमें अल्पसंख्यक मानी जाने वाले उज्बेक समुदायसे सम्बन्धित दोस्तुमको मानवाधिकारोंके हननमें सबसे आगे माना जाता है ।

उत्तरी अफगानिस्तानके कई राज्योंमें निरन्तर उग्र प्रदर्शनोंके पश्चात दोस्तुमकी वापसी हुई है । इस क्षेत्रको उनका पारम्परिक स्थान माना जाता है । गत कई सप्ताहसे दोस्तुमके समर्थकोंने राजमार्ग और अन्य सडकोंके साथ ही शासकीय कार्यालयोंपर कब्जा किया हुआ था और उन्हें वापस बुलानेकी मांग कर रहे थे ।

माना जा रहा है कि राष्ट्रपति अशरफ गनीने उत्तरी अफगानिस्तानमें शान्ति बनाने और अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रपति पदके मतदानके लिए उज्बेक समर्थन सुनिश्चित करनेके लिए ही उन्हें वापस बुलाया है ; यद्यपि फारयाब राज्यके प्रदर्शनकारी नेता एहसानुल्लाह कोवान्चने कहा कि वे तब तक प्रदर्शन जारी रखेंगे, जब तक दोस्तुम स्वयं इसे बन्द करनेके लिए नहीं कहते । कोवांच इस माहके आरम्भमें बन्दी बनाए गए अपने राज्यमें दोस्तुमके प्रतिनिधि निजामुद्दीन कैसरीको छोडनेकी भी मांग कर रहे हैं ।

दोस्तुम उन लोगोंमें से एक थे, जिन्होंने २००१ में तालिबानी शासन हटानेमें अमेरिकाकी सहायता की थी । उनपर सैकडों तालिबानी आतंकियोंको ‘शिपिंग कण्टेनर’में बैठाकर मार देनेका भी आरोप है । उन्हें अफगानिस्तानके विवादित लोगोंमेंसे एक माना जाता है । शनिवारको दोस्तुमकी वापसीकी घोषणा करने वाले राष्ट्रपति गनीके प्रवक्ता हारून चक्खनसुरीने कहा था कि दोस्तुमको वापसीपर पुनः उपराष्ट्रपति पदपर नियुक्त माना जाएगा; यद्यपि उन्होंने राष्ट्रपतिसे कुकर्म वाले प्रकरणमें वैधानिक विभागोंके कार्यमें शासनके बाधक नहीं बननेकी बात भी कही थी ।

स्रोत : अमर उजाला



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