आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २७.५)


‘भाग – २७.४’ में हमने करेलेके लाभोंके विषयमें जाना था, आज हम इससे होनेवाले कुछ अन्य लाभोंके विषयमें जानेंगें ।
* कान्तियुक्त त्वचाके लिए – यदि आप करेलेका सेवन नहीं करना चाहते हैं तो इसका मुखलेप (फेस-पैक) लगाकर त्वचाको कान्तियुक्त बना सकते हैं । करेलेमें ‘विटामिन-सी’, लोहा, ‘बिटा-केराटिन’, ‘पोटैशियम’, ‘कैल्शियम’के साथ-साथ अन्य कई पोषक तत्त्व होते हैं, जो त्वचाको विषमुक्त करते हैं और साथ ही कीटाणुओंसे रक्षा करते हैं । इसके लिए खीरा और करेलेका मिश्रण बनाएं और उसे मुख और गलेपर लगाकर १५-२० मिनटतक छोड दें, तदोपरान्त साधारण जलसे उसे धो लें । खीरेके स्थानपर हल्दी और नीमका प्रयोग भी अति गुणकारी है । हल्दी और नीममें प्रदाहरोधी (एंटी-इंफ्लेमैट्री) गुण होते हैं । करेला, हल्दी और नीमके पत्तोंका मिश्रण बनाएं और मुखपर १०-१५ मिनटतक लगाकर हल्के गुनगुने जलसे इसे धो लें । इसमें दूध भी मिला सकते हैं । दूधमें ‘लैक्टिक अम्ल’ होता है, जो त्वचापर गन्दगीको स्वच्छ करनेमें सहायता करता है । करेलेके रसके साथ घृतकुमारी (एलोवेरा) और १ चम्मच मधु मिलाकर भी मुखपर प्रयोग कर सकते हैं ।
* विसूचिकामें (हैजा, उल्टी-दस्तमें) लाभप्रद – करेलेके तीन बीजों और तीन काली मिर्चको घिसकर, जल मिलाकर पीनेसे वमन आदि बन्द हो जाते हैं । अम्लपित्तके रोगी, जिन्हें भोजनसे पूर्व वमन (उल्टियां) होता है, उन्हें करेलेके पत्तोंको सेंककर सेंधा नमक मिलाकर खानेसे लाभ होता है । इसके अतिरिक्त करेलेके रसमें थोडा जल और काला नमक मिलाकर सेवन करनेसे तुरन्त लाभ मिलता है । जलोदरकी समस्या होनेपर भी दो चम्मच करेलेका रस जलमें मिलाकर पीनेसे लाभ होता है ।
* भार न्यून करनेमें – करेला रक्तमें शर्कराके स्तरको नियन्त्रित रखता है, जो भार न्यून करनेमें सहायक है । करेला ‘इन्सुलीन’को कार्यरत करता है और जब इन्सुलिन कार्यरत होता है तो शर्करा मोटापेमें परिवर्तित नहीं होता है; परिणामस्वरूप भार न्यून होता है । इसके अतिरिक्त करेलामें वसा, ‘कैलोरी’ और ‘कार्बोहाइड्रेट’ अल्प मात्रामें होते हैं । यह ‘कार्बोहाइड्रेट्स’के उपापचयको बढाकर शरीरमें एकत्रित वसाकी मात्राको अल्प करता है । इसके अतिरिक्त इसमें घुलनशील फाइबर उच्च मात्रामें पाए जाते हैं । ‘फाइबर’ पचनेमें थोडा समय लेता है, जिससे पेट भरा-भरासा अनुभव होता है; अतः अधिक खानेका मन नहीं करता है । इसमें जल तत्त्वकी भी अधिक मात्रा होती है, जिससे भार न्यून होता है । २०१२ में प्रकाशित एक अध्ययनके अनुसार करेलेके बीजका तेल शरीरमें वसा संचयको अल्प करनेमें प्रभावी है । करेलेका रस और एक नींबूका रस मिलाकर प्रातः सेवन करनेसे शरीरमें उत्पन्न विषैले तत्त्व और अनावश्यक वसा अल्प होते हैं और मोटापा दूर होता है ।
* खांसीमें (कफमें) लाभप्रद – खांसी होनेपर करेलेका सेवन करना चाहिए । करेलेमें ‘फॉस्फोरस’ होता है, जिसके कारण कफवाली (बलगमवाली) खांसीमें लाभ होता है । एक चम्मच करेलेके रसमें तुलसीके पत्तोंका रस मिलाकर रात्रिमें पिएं और इसका एक माहतक सेवन करें । इसमें मधु (शहद) भी मिलाया जा सकता है ।
अगले ‘भाग २७.६’में हम करेलेसे होनेवाले कुछ अन्य लाभोंके विषयमें जानेंगें ।



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