आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २६.३)


‘भाग – २६.२’में हमने लौकीके रस, तेल व कुछ लाभोंके विषयमें जाना था । आज हम लौकीसे होनेवाले कुछ अन्य लाभोंके विषयमें जानेंगें ।
* गर्भावस्थामें – गर्भावस्थाके समय लौकीके रस या शाकका प्रयोग करना लाभप्रद सिद्ध हो सकता है । लौकीका रस गर्भाशय सम्बन्धी विकारोंको दूर करनेमें सहायक है; इसलिए जिन महिलाओंको बार-बार गर्भपात हो जाता है, उन्हें कुछ दिवस लौकीका रस या शाक प्रयोग करना चाहिए । इससे गर्भाशय सशक्त होगा और साथ ही गर्भस्थ शिशुका पोषण होता है, शिशु स्वस्थ और उचित भारके (वजनके) साथ जन्म लेता है ।
* भार न्यून करनेमें – यदि आप शरीरके भारसे उद्विग्न हैं तो व्यायामके साथ खानपानपर विशेष ध्यान दें । इसके लिए नियमित व्यायामके पश्चात प्रतिदिन १०० मिलीलीटर लौकीका रस पीना चाहिए । लौकी अन्य पदार्थोंकी तुलनामें शीघ्रतासे भार न्यून करती है । लौकीको उबालकर नमकके साथ (सेन्धा नमक) लेनेसे भार कुछ ही दिनोंमें न्यून हो जाता है । इसके साथ ही लौकीका रस ‘विटामिन’, ‘पोटैशियम’, लौह, जल और ‘फाइबर’से परिपूर्ण होता है । लौकीके रसमें विद्यमान पोषक तत्त्व शरीरकी चयापचय दरमें वृद्धि करते हैं और पाचन तन्त्रको सुचारु रूपसे कार्य करनेमें सहायता करते हैं । इसमें ‘फाइबर’की मात्रा अधिक होती है, जिससे भूख नहीं लगती और पेट भरा-भरासा लगता है; अतः यदि नियमित रूपसे प्रातःकाल खाली पेट लौकीके रसका सेवन किया जाए तो यह भार न्यून करनेमें अत्यधिक लाभकारी सिद्ध हो सकता है ।
* त्वचाके लिए – यदि आप अल्प समयमें मुखको भीतर और बाहरसे कान्तिमान करना चाहते हैं तो इसके लिए नियमित लौकीका सेवन करना चाहिए । यह मुखको स्वच्छ, सुंदर और आकर्षक बनाती है । लौकीका रस जठरकी स्वच्छता करता है । इससे मुखपर धूप और प्रदूषणसे होनेवाले मुंहासे और धब्बोंसे छुटकारा मिलता है और त्वचा सुन्दर दिखाई देने लगती है । यदि ‘सनटैन’से (धूपकी कालिमासे) बचना चाहतें हैं तो दिनमें ३-४ बार ‘टैनिंग’वाले स्थानपर लौकीका रस लगाएं । लौकीके प्राकृतिक ब्लीचिंग तत्त्व ‘टैन’ त्वचाको हल्का करते हैं । लौकीका नियमित रूपसे सेवन रक्तको शुद्ध करता है । लौकी आंतरिक रूपसे शरीरको स्वच्छकर त्वचाको स्वस्थ, कान्तियुक्त और कोमल बनानेमें सहायता करती है । समान अनुपातमें खीरे और लौकीका उपयोग करके एक ‘फेस पैक’ बनाएं, यदि चाहें तो इसमें बेसन और दही भी मिला सकते हैं । इसे मुखपर लगभग बीस मिनटतक लगाकर रखें, तदोपरान्त उष्ण जलसे धो लें । यह त्वचाको पोषण देगा और इससे त्वचा कोमल भी रहेगी । प्रतिदिन प्रातःकाल एक गिलास लौकीका रस त्वचाके लिए लाभप्रद होता है ।
* रक्त शुद्धिमें  – लौकी रक्त शोधकका कार्य करती है । लौकीको उबालकर उसमें बिना नमक मिलाए, प्रत्येक दिवस खानेसे रक्त शुद्धि हो जाता है, साथ ही फुंसियां आदि भी अल्प हो जाएंगीं । आधा कप लौकीके रसमें मिश्री मिलाकर प्रातः और संध्याकालमें पीनेसे भी रक्त शुद्ध हो जाता है ।
* शीतलता प्रदान करनेमें – ग्रीष्म ऋतुमें लौकी और अधिक लाभप्रद है । लौकी शरीरकी उष्णता दूर करती है । मस्तिष्कमें या पेटमें गर्मीकी समस्या हो तो लौकी अत्यधिक लाभप्रद है । पैरोंके तलवोंपर लौकीके टुकडेको रगडनेसे शरीरमें शीतलता आती है ।
अगले भागमें (२६.४) हम लौकी व इसके रससे होनेवाले कुछ अन्य लाभोंके विषयमें जानेंगें ।



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