१२ वर्षीय बच्चीकी आतंकियोंद्वारा हत्यासे त्रस्त होकर व्यक्तिने किया न्यूजीलैंडकी मस्जिदमें आक्रमण !!


मार्च १६, २०१९

न्यूजीलैंडमें क्राइस्टचर्चके मस्जिदमें एक व्यक्तिने गोलियां चला दी और ४९ लोगोको मार डाला; परन्तु यह कोई बतानेको सज्ज नहीं है कि उसने ऐसा क्यों किया ?


जिस व्यक्तिने मस्जिदमें विनाश किया, उसका नाम ब्रेंटन टैरंट है, जोकि एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक है, उसे ऐसा करनेके लिए आतंकवादियोंने ही विवश किया था ।

एक १२ वर्षीय बालिका थी, जिसका नाम था एब्बा एकरलैंड, जिसे २०१७ में आतंकियोंने निर्ममतासे मार डाला था । वो अपने घर वापस लौट रही थी, तभी उसकी हत्या की गई थी ।

जिस व्यक्तिने ये आक्रमण किया, उसने उससे पहले ‘फेसबुक’पर सीधा प्रसारण किया था, जिसमे उसने बताया था कि वो ऐसा क्यों कर रहा है ?, उसने स्वयंको स्कॉटिश, अंग्रेज और आयरिश मूलका बताया था, उसने लिखा था कि एब्बा एकरलैंडका बदला लेनेके लिए आक्रमण कर रहा हूं !

अप्रैल २०१७ में स्टॉकहोम नामके नगरपर इस्लामिक आतंकियोंने आक्रमण किया था, इसमें ५ लोगोंको आतंकियोंने मार दिया था, इसीमेंसे एक १२ वर्षकी बच्ची एब्बा एकरलैंड थी ।

जिस आतंकीने आक्रमण किया था, उसका नाम रख्मत था, वो उज्बेकिस्तान नामके इस्लामिक मुल्कसे था और उसने ये आक्रमण ‘आइएस’का समर्थक बताकर किया था ! उसे आजीवन कारावास भी हुआ और अभी वह कारावासमें है ।

ब्रेंटन टैरंट नामके जिस व्यक्तिने न्यूजीलैंडकी मस्जिदमें विनाश मचाया, उसने कहा कि आतंकियोंके हाथों एक बच्ची एब्बाकी मृत्यु हुई, उसने मुझे झकझोरकर रख दिया और मैं उसकी हत्याको आजतक अनदेखा नहीं कर सका हूं !

 


“वस्तुतः बालिकाकी मृत्युका बदला सामान्य नागरिकोंको मारकर नहीं लिया जा सकता है और न ही हम हत्याके समर्थक हैं; परन्तु यह भी एक कटु सत्य है कि इस विश्वमें शान्ति नष्ट करनेवाला व एक पुस्तकके नामपर आतंक प्रसारित करनेवाला केवल इस्लाम है और यह हम अपने मनसे नहीं कह रहे, विश्व भरमें हो रहे आतंकी आक्रमण स्वयं बता रहे हैं ! इस्लामकी वास्तविक परिभाषा हो सकती है, व्यक्तिको ध्यानकेद्वारा आत्मासे जुडनेमें सहायक हो; परन्तु जो प्रत्यक्ष प्रमाणोंसे दिख रहा है, उसका आत्मा या परमात्मासे तो दूर-दूरतक कोई लेना-देना नहीं है ! जो इस्लामिक बन्दूक उठाते हैं, वे आतंकी कहलाते हैं और जो शेष बच जाते हैं वे बिना बन्दूक उठाए लवजिहाद, तीन तलाक, खतना, बहुविवाह आदि नृशंस कृत्योंसे समाजमें कचरा ही फैलाते हैं । प्रबुद्ध व विवेकी व्यक्ति नगण्य समान ही होते हैं ! सभी हिन्दू तो होते नहीं हैं, जो सभीप्रकारके कुकृत्य सहनकर भी मौन रहे तो कई बार ऐसी नृशंस प्रतिक्रिया देखनेको मिलती है; क्योंकि मस्जिदें विश्वभरमें आतंकियोंकी मूक सहायक सिद्ध हुई हैं, यह अनेक प्रमाणोंसे उजागर हुआ है ! यदि सामान्य मुसलमान इससे दूर रहना चाहते हैं तो शरिया और इस्लामकी उन बातोंको एकत्र होकर निराधार घोषित करेंं, जो किसीको काफिर, किसीको शैतान पूजक, बुतपरस्त आदि बताकर उनकी हत्याका आदेश देती है ! जो किसी अन्य धर्मकी युवतीको उठाकर उसका जीवन नष्ट करनेको कहती है, जो आतंकका मूल है, तभी वास्तवमें शान्ति स्थापित हो पाएगी, अन्यथा असम्भव है; क्योंकि किसीको मारकर आप स्वयं कभी भी शान्त नहीं रह सकते हैं !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : डीबीएन



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