म्यांमार जानेके नामपर भयभीत होकर शिविरोंसे भागे रोहिंग्या !


नवम्बर १३, २०१८

रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थी उन्हें इस सप्ताहके मध्यमें वापस म्यांंमार भेजे जानेसे बचनेके लिए बांग्लादेशके शरणार्थी शिविरोंसे भाग रहे हैं ! समुदायके नेताओंने सोमवार, १२ नवम्बरको यह जानकारी दी । अधिकारी रोहिंग्या शरणार्थियोंको बृहस्पतिवारसे बौद्ध बहुल म्यामार वापस भेजे जानेकी योजना बना रहे हैं । ये शरणार्थी म्यामारमें उनपर हुए अत्याचारके पश्चात् वहांसे भाग निकले थे । संयुक्त राष्ट्रने इस क्रूरताको ‘नस्लीय सफाया’ नाम दिया था । समुदायके नेताओंके अनुसार इस संभावनाने शिविरोंमें रह रहे लोगोंको आतंकित कर दिया और कुछ ऐसे परिवार ,जिन्हें सबसे पहले वापस भेजा जाना था , वहांसे भाग गए । जामतोली शरणार्थी शिविरके नूर इस्लामने कहा, ‘‘अधिकारी शरणार्थियोंको निरन्तर वापस जानेके लिए प्रेरित करनेका प्रयास कर रहे हैं, परन्तु इसके उलटे वे भयभीत होकर दूसरे शिविरोंमें भाग रहे हैं !’’ योजनाके अन्तर्गत बृहस्पतिवार, १४ नवम्बरसे लगभग २२६० रोहिंग्या मुसलमानोंको दक्षिणपूर्वी कॉक्स बाजार जनपदकी सीमासे स्वदेश वापस भेजा जाना है ।
वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्रके शीर्ष शरणार्थी अधिकारीने कहा है कि विस्थापित रोहिंग्या शरणार्थियोंकी म्यामार वापसी केवल उनकी ‘स्वतन्त्र रूपसे व्यक्तकी गई इच्छा’पर होनी चाहिए । संयुक्त राष्ट्रके आकलनके अनुसार गत वर्ष २५ अगस्तसे लगभग सात लाख अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुस्लिम म्यामारके रखाइन प्रान्तमें हिंसासे बचनेके लिए बांग्लादेश जा चुके हैं । संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) फिलिप्पो ग्रेंडीने रविवार, ११ नवम्बरको एक वक्तव्यमें कहा कि शरणार्थियोंकी वापसी उनके स्वतन्त्र निर्णयपर आधारित होनी चाहिए । म्यांंमारके मुस्लिम अल्पसंख्यक रोहिंग्या समुदायके विरुद्घ अगस्त २०१७ के बादसे हिंसा आरम्भ हो गई थी, जिसके पश्चात् हजारों लोगोंको रखाइन प्रान्तमें अपने घर छोडकर बांग्लादेशमें शरण लेनी पडी थी ।
“मानवता और भावनाएं अपने स्थानपर है, परन्तु यदि कोई समुदाय से दुष्कर्म, लव-जिहाद, राष्ट्र सुरक्षाके लिए हानिकारक आदिके दोषी पाए गए हैं तो कोई राष्ट्र ऐसोको शरण क्यों देगा ?, इसपर विचार करें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जनसत्ता



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