समाजको दिशाहीन करनेवाले धर्मगुरु !


आज गुरुपदपर विराजमान कुछ कथावाचकों एवं तथाकथित सन्तोंके भक्तोंकेद्वारा शंका समाधान सुनकर एक बात तो समझमें आती है कि इन्हें सूक्ष्मका अंशमात्र भी ज्ञान नहीं है ! एक ऐसे ही मार्गदर्शकने अपने भक्तोंको बताया कि पूर्वकालमें हिन्दू पितृपक्षके समय अधिक कालतक धार्मिक अनुष्ठानमें व्यस्त होनेके कारण शुभ वस्तुएं क्रय करनेका उन्हें समय नहीं मिलता था ! देखे उनके इस तर्कमें अध्यात्म कहां है ? ऐसे ही हैं आजके अनेक धर्मगुरु, बुद्धिसे परे सूक्ष्म अध्यात्मशास्त्र आधारित हिन्दू धर्मको ये, तथाकथित धर्मगुरु शंका समाधान करते समय ऐसे तर्क देते हैं कि उसका अध्यात्मसे दूर-दूर तक कोई सम्बन्ध ही नहीं होता है ! समाजको दिशाहीन करनेवाले ऐसे धर्मगुरु हिन्दू राष्ट्रमें नहीं होंगे इसलिए हिन्दू राष्ट्र शीघ्र चाहिए ! 



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