आर्य वैदिक सनातन हिन्दू धर्मकी विशेषता (भाग – ५)


वैदिक सनातन धर्ममें नास्तिक और आस्तिक दोनों ही मतोंको मान्यता प्राप्त है ! अन्य अहिंदू पंथों समान यहां नास्तिकोंके साथ किसी भी प्रकारकी क्रूरता नहीं की जाती है; किन्तु यह स्वतन्त्रता तभी तक दी जाती है जब तक नास्तिक, समष्टिकी हानि न करें अन्यथा हिरण्यकश्यप जैसे नास्तिकोंके अंतकी व्यवस्था भी इस धर्मके संरक्षक स्वयं श्रीविष्णु करते हैं ! चार्वाक जैसे नास्तिककी विचारधाराको भी हिन्दू धर्ममें मान्यता प्राप्त है ! वैसे भी मुख्यत: भक्तिमार्गी ही देवताओंके अस्तित्त्वको मानते हैं, अन्य योगमार्ग जैसे हठयोग, ध्यानयोग, ज्ञानयोग कर्मयोगमें देवी-देवताओंकी सत्ताको स्वीकार करना अनिवार्य नहीं होता !



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