अफरीदीने कहा, पुत्रियोंको क्रिकेट नहीं खेलने दूंगा, वो आभ्यन्त्रिक खेलमें (इंडोर स्पोर्ट्समें) भाग ले सकती हैं !!


मई १२, २०१९

पाकिस्तानके पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी अपनी पुत्रियोंको क्रिकेट या कोई घरके बाहरके खेल खेलनेकी आज्ञा नहीं देना चाहते हैं । शाहिदने कहा कि यदि पुत्रियां आभ्यन्त्रिक खेलमें (इंडोर स्पोर्ट्समें) भाग लेना चाहती हैं तो वे स्वतन्त्र हैं । पूर्व ‘ऑलराउंडर’ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके इस निर्णयका कारण सामाजिक और धार्मिक है । शाहिदकी आत्मकथा ‘गेम चेंजर’में इसका वर्णन है । आत्मकथाके कारण अफरीदी कई पूर्व क्रिकेटरोंके लक्ष्यपर हैं ।

अफरीदीकी चार पुत्रियां हैं – अन्शा, अज्बा, अमारा और अक्शा । उन्होंने आत्मकथामें परिवारके बारेमें कुछ बातें बताईं । शाहिदने लिखा, ”नारीवादी विचारोंके समर्थक मेरे निर्णयके बारेमें जो चाहें कह सकते हैं; परन्तु मैं अपनी पुत्रियोंको बाह्य खेल या क्रिकेट खेलनेकी आज्ञा नहीं दे सकता हूं ।”

शाहिदने बताया कि उनकी पुत्रियां खेलमें अच्छी हैं । अज्बा और अमारा अभी छोटी हैं और उन्हें खेलना रुचिकर लगता है; परन्तु क्रिकेट नहीं, केवल आभ्यन्त्रिक खेल (इंडोर गेम) खेल सकती हैं । इतना ही नहीं वे किसी सार्वजनिक खेल प्रतियोगिताका भाग नहीं बन सकती हैं ।

 

“समयके परिपेक्षमें विश्व पर्याप्त दूरी चलकर आगे आ चुका है; परन्तु इस्लाम आज भी उन घिसी-पिटी बातोंको ढोकर महिलाओंको केवल सन्तोत्पत्तितक सिमित रखना चाहते हैं, उन्हें कामवासनाका साधन मानते हैं और उनपर अत्याचार करते हैं और ऐसा नहीं है कि केवल खेलके परिपेक्ष्यमें ऐसा है । महिलाएं कोई धार्मिक क्रिया भी नहीं कर सकती हैं, उसपर भी मौलवियोंका ही अधिकार है । एक अन्तर्राष्ट्रीय खिलाडीकी यह मानसिकता है तो शेष इस्लामिक लोगोंकी मानसिकताका अनुमान लगाया जा सकता है ! क्या इस्लाम पुरुषोंपर भी कोई प्रतिबन्ध लगाता है ? मर्यादामें रहकर यदि कोई कार्य किए जाए तो वह उचित ही होता है । इस्लामके लोगोंको अब यह जाननेकी आवश्यता है; अन्यथा समय स्वतः ही सीखा देगा !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : भास्कर



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