जिहादी विचारधाराका परिणाम, श्रीलंकामें मुस्लिमोंके विरुद्घ उपद्रव, २०० लोग आए और जला दी फैक्ट्री !!


मई १५, २०१९

श्रीलंकामें मुस्लिमोंके विरुद्घ उपद्रव होनेके पश्चात दूसरी रात भी निषेधाज्ञा (कर्फ्यू) लगा दी गई । इससे पूर्व मुस्लिमोंके विरुद्घ हिंसा भडक उठी थी और घरों व दुकानोंको लक्ष्य बनाया गया था । एक व्यापारीने बताया कि सोमवार, १३ मईको उनकी फैक्ट्रीमें लगभग २०० लोगोंकी भीड आई और तोड-फोड करके आग लगा दी !

 

ईस्टरके अवसरपर क्रमबद्ध विस्फोटके तीन सप्ताह पश्चात श्रीलंका उपद्रवका लक्ष्य बना हुआ है । समाचारोंके अनुसार ‘फेसबुक’, ‘व्हाट्सएप’ और ‘वाइबर’पर प्रतिबन्धके पश्चात मंगलवार, १४ मईको ‘ट्विटर’को भी अस्थायी रूपसे बन्द कर दिया गया । लगभग ७० लोगोंको बन्दी बनाया गया है ।

 

राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेनाके परामर्शदाता (सलाहकार) शिराल लकथिलाकाने कहा, “शासन इसपर नियन्त्रण स्थापित करनेके लिए प्रतिबद्ध है और आज रातके पश्चात इसपर पूर्ण रूपसे नियन्त्रण पा लिया जाएगा ।”

 

एक मुस्लिम व्यापारीने बीबीसीसे कहा, “हम कई स्थानोंको देख सकते हैं, जहां निषेधाज्ञा (कर्फ्यू) लगाई गई है । सेना बंदूकोंके साथ सडकोंपर हैं; परन्तु वे हिंसाके विरुध्द कोई कार्यवाही नहीं कर रहे हैं ।”

 

मुस्लिम अब परिवाद कर रहे हैं; परन्तु एक राष्ट्र, जो इस्लामिक आतंकका लक्ष्य बना है, उसमें इस्लामिक शिक्षाका पूर्ण योगदान है, यह मानना पडेगा । यदि मुसलमानोंने पहले ही उसका विरोध किया होता तो आज यह स्थिति ही क्यों उत्पन्न होती ! यदि मुस्लिम समाज सत्यमें चाहता है कि वह शान्तिपूर्ण ढंगसे रहे तो जिहादी शिक्षाओंका विरोध करना ही होगा; अन्यथा आप किसी अन्य देशमें जाकर यदि विष प्रसारित करेंगें तो वे क्यों रहने देंगें ? श्रीलंका भी कोई इस्लामिक देश नहीं है; परन्तु आज जो हो रहा है, उसके लिए जिहादी शिक्षा ही उत्तरदायी है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 


स्रोत : आजतक

 



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


सूचना: समाचार / आलेखमें उद्धृत स्रोत यूआरऍल केवल समाचार / लेख प्रकाशित होनेकी तारीखपर वैध हो सकता है। उनमेंसे ज्यादातर एक दिनसे कुछ महीने पश्चात अमान्य हो सकते हैं जब कोई URL काम करनेमें विफल रहता है, तो आप स्रोत वेबसाइटके शीर्ष स्तरपर जा सकते हैं और समाचार / लेखकी खोज कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रकाशित समाचार / लेख विभिन्न स्रोतोंसे एकत्र किए जाते हैं और समाचार / आलेखकी जिम्मेदारी स्रोतपर ही निर्भर होते हैं। वैदिक उपासना पीठ या इसकी वेबसाइट किसी भी तरहसे जुड़ी नहीं है और न ही यहां प्रस्तुत समाचार / लेख सामग्रीके लिए जिम्मेदार है। इस लेखमें व्यक्त राय लेखक लेखकोंकी राय है लेखकद्वारा दी गई सूचना, तथ्यों या राय, वैदिक उपासना पीठके विचारोंको प्रतिबिंबित नहीं करती है, इसके लिए वैदिक उपासना पीठ जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। लेखक इस लेखमें किसी भी जानकारीकी सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता और वैधताके लिए उत्तरदायी है।

विडियो

© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution