बालाकोट एयरस्ट्राइकके पश्चात भयभीत पाकिस्तान लगा आतंकियोंकी सुरक्षामें, पहना रहा सेनाकी वेशभूषा !!


मार्च ३०, २०१९

 

बालाकोटमें आतंकियोंपर ‘एयरस्ट्राइक’के पश्चात पाकिस्तान शासन भयभीत है । उसने आतंकी गुटोंको पाक गुप्तचर विभाग ‘आईएसआई’की वेशभूषा पहननेका आदेश दिया है । आईएसआई आदेश है कि आतंकी पाकिस्तानी सेनाकी वेशभूषा पहनें, इससे वो भारतीय विभागोंके रडारसे बच सकते हैं । समाचारोंके अनुसार, ‘आईएसआई’ने १६ मार्चको आतंकियोंके उच्च अधिकारियोंके साथ एक बैठकमें ये निर्देश दिए थे ।

बालाकोटमें भारतकी कार्यवाहीके पश्चात ‘पीओके’के ४ आतंकी शिविरोंको भी दूर स्थानान्तरित किया जा रहा है । इससे इन शिविरोंकी सुरक्षा अच्छे ढंगसे की जा सकेगी । गुप्तचर विभागके अनुसार, पाकिस्तानने निकयाल और कोटली क्षेत्रमें उपस्थित लश्कर और जैश-ए-मोहम्मदके आतंकियोंको कहा है कि वो अपने शिविरोंको सीमासे दूर रखें । इस क्षेत्रमें आतंकियोंके चार शिविर हैं । पाकिस्तानको लगता है कि भारतीय सैटेलाइट प्रत्येक समय उनके शिविरोंको देख रहे हैं । जैसे ही आंतकी शिविरोंसे बाहर निकलते हैं, भारतीय सेनाको उनकी जानकारी मिल जाती है और वो शीघ्र ही मार दिए जाएंगें । यदि वो पाकिस्तानी सेनाकी वेशभूषामें होंगे तो उनका अभिज्ञान कर पाना कठिन होगा ।

१६ मार्चको निकयाल क्षेत्रमें आतंकियों और पाकिस्तानी सेनाकी एक उच्च स्तरीय बैठक हुई । इसमें पाकिस्तानी आइएसआइ, पाकिस्तानी सेनाके दो बडे अधिकारी, लश्कर आतंकी और पाकिस्तानी आतंकियोंको भारतमें घुसपैठ करवानेवाला सहायक अशफाक भी था ।


‘आईएसआई’ने यह निर्णय किया है कि वो ‘जैश-ए-मोहम्मद’को अधिक धन देगा, जिससे घाटीके भीतर जैश निरन्तर बडी घटना कर सके । सुरक्षा विभागसे जुडे एक अधिकारीके अनुसार, आतंकियोंके कई शिविर पाकिस्तानी सेनाके शिविरमें स्थानांतरित किए जा रहे हैं । इन शिविरके बाहर पाकिस्तानी सेनाका कडा पहरा बैठा दिया गया है ।

 

“इससे ही पाकिस्तानकी सत्यता उजागर होती है । पाकिस्तान समूचे विश्वमें आतंकके विरुद्ध कार्यवाहीका ढोंग करता है; परन्तु पीछे-पीछे आतंकको सुरक्षा प्रदान कर रहा है और इसमें शंका नहीं कि पाकिस्तान एकाकी यह दुस्साहस नहीं कर सकता है । अवश्य ही बाहरी देशोंसे भी वह समर्थन पा रहा है । गत दिवसोंमें चीनके भी पाकिस्तानी आतंकियोंके समर्थनमें आनेके प्रकरण सामने आए हैं । सभी देश एकत्र होकर आतंक समर्थक राष्ट्रोंके विरुद्ध खडे हो तभी आतंकका अन्त सम्भव है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : भास्कर



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