विनाशकालकी पूर्वसूचनाका उद्देश्य भयभीत करना नहीं, चेताना है !


कुछ पाठकोंका कहना है कि आप आगामीकालकी भीषणता बताकर लोगोंको डराती क्यों हैं ? हम आपको डरा नहीं रहे हैं, अपितु सतर्क कर रहे हैं; क्योंकि जब अत्यंत विषम परिस्थितियां आपके समक्ष आ जायेंगी तो सर्वप्रथम आप जैसे लोग ही कहेंगे कि भारतमें इतने सारे सन्तों और द्रष्टाओंके होते हुए भी, किसीने हमें ऐसे विनाशकारी कालकी पूर्वसूचना क्यों नहीं दी ?, और हमारी किसीने पूर्व तैयारी क्यों नहीं कारवाई ? हम मात्र आपको आनेवाले भीषणकालकी जानकारी नहीं दे रहे हैं, अपितु उस कालकी आपको पूर्व तैयारी हेतु सर्व तथ्य बता रहे हैं | सृष्टिके घटनाक्रममें कुछ घटनाएं अवश्यम्भावी होती हैं, जिसे कोई नहीं टाल सकता है और इस हेतु सबको सतर्ककर, योग्य उपाय-योजनाएं निकालकर, सभीको उन परिस्थितियोंका सामना करने हेतु सिद्ध करना, यह द्रष्टा एवं सन्तोंका कार्य है और ऐसी परिस्थितिओंमें यही एकमात्र पर्याय भी होता है | हमारे यहां तो द्रष्टा एवं सन्तोंने सदैव ही पूर्वसूचना देकर सतर्क किया है, चाहे वह दुर्वासा ऋषिद्वारा श्रीरामका वनवासके विषयमें हो या व्यास ऋषिद्वारा दुर्योधनके जन्मको एक राक्षसका जन्म बतानेके विषयमें हो | आनेवाले दस वर्षोंमें तीसरा महायुद्ध(विश्वयुद्ध) पञ्च महाभूतोंका प्रकोप, साम्प्रदायिक उपद्रव, गृहयुद्ध, महामारी, और इनसबके माध्यमसे अत्यंत वृहद स्तरपर विध्वंस होनेकी घटनाओंके विषयमें अनेक सन्त एवं भविष्यद्रष्टा बता चुके हैं और यह भी कह चुके हैं कि इन्हें कोई टाल नहीं सकता, उसी प्रकार २०२३ में हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना भी होकर रहेगी, ये कटु सत्य है; जो कालके प्रवाहमें सत्य सिद्ध होकर रहेंगे; अतः शुतुरमुर्ग समान परिस्थितियोंके समक्ष नेत्र मूंदनेमें बुद्धिमानी नहीं; अपितु उस परिस्थिति हेतु सिद्ध होनेमें बुद्धिमानी है |



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