जून १३, २०१९
भारतमें ७५ प्रतिशत हिन्दुओंका मानना है कि भारतमें सभी धर्म समान है । यह देश सभी धर्मोंके लोगोंका है । यह बात ‘सेंटर फार स्टडीज आफ डेवलपमेंट सोसायटीज (सीएसडीएस)’के सामाजिक प्रसार माध्यमोंपर किए एक सर्वेक्षणमें सामने आई है ! वहीं २० प्रतिशत लोगोंका दृष्टिकोण इससे भिन्न था । ‘सीएसडीएस’की ओरसे यह सर्वेक्षण देशमें राजनीतिको भांपनेके उद्देश्यसे किया गया था । इसमें देशकी वर्तमान स्थितिमें सामाजिक प्रसार माध्यम (सोशल मीडिया) और स्मार्ट फोनका लोगोंपर प्रभावका आकलन करना भी सम्मिलित था । ब्यौरेमें कहा गया कि सामाजिक प्रसार माध्यमोंका प्रयोग नहीं करने वाले १७ प्रतिशत लोगोंका कहना था कि ‘भारत केवल हिन्दुओंका है ।’ जबकि सामाजिक प्रसार माध्यमोंका प्रयोग नहीं करनेवाले ७३ प्रतिशत लोगोंने कहा कि भारत सभी धर्मोंके लोगोंका है । वहीं सामाजिक प्रसार माध्यमोंपर भी ७५ प्रतिशत लोगोंने यही बात कही । इससे एक बात यह भी सामने आई कि सामाजिक प्रसार माध्यम लोगोंको अपनी राय बनानेमें प्रभावित करते हैं । ‘सीएसडीएस’की ओरसे अप्रैलसे मईके मध्य देशके २६ राज्योंके २११ संसदीय क्षेत्रोंमें फील्डवर्क किया गया । सर्वेक्षणके समय कुल २४,२३६ मतदाताओंसे उनका पक्ष जानी गया । इसमें व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम प्रयोग करनेवालोंको भी सम्मिलित किया गया । ‘सोशल मीडिया’का अधिक प्रयोग करनेवाले २८ प्रतिशत लोग मानते हैं कि मुस्लिम अत्यधिक राष्ट्रवादी होते हैं, वहीं सामाजिक प्रसार माध्यमका प्रयोग नहीं करनेवाले २१ प्रतिशत लोग मानते हैं कि मुस्लिम राष्ट्रवादी होते हैं ।
“अब समझमें आ रहा होगा कि क्यों ८ राज्योंमें हिन्दू अल्पसंख्यक हो गए हैं और शेष राज्योंमें प्रताडित हो रहे हैं ? धर्मनिरपेक्षताका पागलपन इतने अच्छेसे मन मस्तिष्कमें बैठाया है कि जबतक जिहादियोंकी भीड कश्मीर और बंगालकी भांति इनपर स्वयं आक्रमण नहीं करती है, तबतक इन्हें विश्वास ही नहीं होता है । धर्मनिरपेक्ष हिन्दुओ ! एक बार किसी मुसलमान बहुल क्षेत्रमें या मस्जिदमें कुछ दिवस जाकर देखिए, सारा धर्मनिरपेक्षताका भूत उतर जाएगा !'” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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