श्रीगुरु उवाच

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हिन्दुओंकी स्थिति अत्यन्त दयनीय होनेका कारण हिन्दू शब्दकी व्याख्या है, ‘हीनान् गुणान् दूषयति इति हिन्दु:’, हीनान् गुणान् अर्थात हीन या कनिष्ठ, ऐसे रज एवं तमोगुणका, ‘दूषयति’ अर्थात नाश करनेवाला । इस व्याख्यानुसार देखें तो मात्र १०% हिन्दू ही वास्तविक हिन्दू हैं, शेष ९०% केवल जन्महिन्दू हैं ! इसी कारण हिन्दुओंकी स्थिति, विश्वमें ही नहीं; अपितु […]

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हिन्दुओंकी स्थिति अत्यन्त दयनीय होनेका कारण हिन्दू शब्दकी व्याख्या है, ‘हीनान् गुणान् दूषयति इति हिन्दु:’, हीनान् गुणान् अर्थात हीन या कनिष्ठ, ऐसे रज एवं तमोगुणका, ‘दूषयति’ अर्थात नाश करनेवाला । इस व्याख्यानुसार देखें तो मात्र १०% हिन्दू ही वास्तविक हिन्दू हैं, शेष ९०% केवल जन्महिन्दू हैं ! इसी कारण हिन्दुओंकी स्थिति, विश्वमें ही नहीं; अपितु […]

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साधनाके मध्य अनुभूति आनेके पीछे कारण १. प्रवासके समय कोई दृश्य क्यों दिखाई देता है ?, इसके पीछे कोई कारण नहीं होता, तब भी उन्हें प्रवासके अनुभव होते हैं । उसीप्रकार अध्यात्मके सूक्ष्म प्रवासमें भी अनुभूतियां होती हैं । २. ईश्वरको अनुभूतिसे कोई सीख देनी होती है । ३. कभी-कभी मायावी अनिष्ट शक्तियां भी अच्छी […]

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राष्ट्रका उत्थान मात्र आध्यात्मिक स्तरके प्रयासोंसे सम्भव ! किसी व्यक्तिका प्रारब्ध परिवर्तित करना लगभग असम्भव होता है । यदि उसे परिवर्तित करना ही हो तो, तीव्र साधना करनी पडती है । ऐसेमें भारतका प्रारब्ध, शारीरिक, मानसिक तथा बौद्धिक स्तरपर प्रयत्न करनेसे पलटना सम्भव होगा क्या ?, इस हेतु आध्यात्मिक स्तरके उपाय अर्थात् साधनाका बल चाहिए

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हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाकी आवश्यकता बाल्यकालसे ही नैतिकता तथा आचारधर्म न सिखानेवाले पालक एवं शासनके कारण भारतमें सर्वत्र अनाचार एवं राक्षसी वृत्ति प्रबल हो गई है ! इस स्थितिके कारण बलात्कार, भ्रष्टाचार, विविध अपराध, देशद्रोह तथा धर्मद्रोहका प्रमाण अपरिमित होकर देश रसातलको गया है । इसपर उपाय मात्र एक, और वह है, धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना […]

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साधको, चारों वर्णानुसार साधना नहीं कर पा रहे हैं; ऐसेमें व्यथित न हों ! धर्मरक्षणके वर्णानुसार अग्रिम चार प्रकार हैं । कुछ साधक सोचते हैं कि चारों वर्णानुसार साधनाकर शीघ्र प्रगति करें ! वे यह समझ लें कि केवल ईश्वर ही चारों वर्णानुसार साधनाके उदाहरण हमारे समक्ष रख सकते हैं । हमारे पास बुद्धि, धन, […]

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अब सन्तोंका भी हो रहा है अंग्रेजीकरण ! अपने यहां आदर्श जीवनकी लाखों बातें रामायण, महाभारत, पुराण इत्यादिमें होते हुए भी कुछ सन्त उनके नियतकालिकोंमें पाश्चात्योंकी कथाएं प्रेमपूर्वक छापते हैं ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्थासाभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (http://sanatanprabhat.org)

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कालानुसार हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना है अवश्यम्भावी  हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना हेतु किसीको कुछ भी करनेकी आवश्यकता नहीं है; क्योंकि कालमहिमाके अनुसार वह होनेवाला ही है; परन्तु इस कार्यमें जो तन-मन-धनका त्याग कर सहभागी होंगे, उनकी साधना होगी तथा वे जन्म-मृत्युके फेरोंसे मुक्त हो जाएंगे । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी […]

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साम्प्रदायिक साधनामें बहुदा भक्तों की प्रगति न होने से उनका साधना सम्बन्धित विश्वास डगमगाता है । ऐसा न हो, इसलिए ‘जितने व्यक्ति, उतनी प्रकृति, उतने साधना मार्ग’  यह सिद्धान्त ध्यानमें रखकर सम्प्रदायके प्रमुखोंने उसप्रकार मार्गदर्शन करना चाहिए । इस हेतु उन्हें विविध साधनामार्गोंका अभ्यास करना आवश्यक है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, […]

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राजकीय पक्षके नेता तथा कार्यकर्ताको यदि कोई धन तथा पदका लोभ दे तो वे दूसरे पक्षमें जाते हैं  | इसके विपरीत भक्त ईश्वरका पक्ष त्यागकर, ईश्वर चरणोंका स्थान त्यागकर अन्यत्र कहीं नहीं जाता | – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था  साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (http://sanatanprabhat.org)

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