श्रीगुरु उवाच

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किसी राजनैतिक दल अथवा बडे संगठन में कोई पद मिलने की अपेक्षा ईश्‍वर का भक्त होना अच्छा है ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था

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सात्विक चित्रकार देवताके सात्त्विक चित्र निकालते हैं । इसके विपरीत म.फि. हुसेन जैसे तामसिक चित्रकार देवताओंके नग्न एवं तामसिक चित्र निकालते हैं । इसमें आश्‍चर्यकी बात यह है कि इस संदर्भमें मृतप्राय हिन्दुओंने अनेक वर्षोंतक कुछ भी नहीं किया, जिस कारण अगली पीढीपर भी वैसे ही संस्कार हुए हैं ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत […]

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कहां बंगालमें साम्यवादियों और मुसलमानोंकी तुष्टिकरण (चापलूसी) करनेवाले वर्तमानके हिन्दू, तो कहां हिन्दू धर्मको विश्‍वमें सर्वोच्च स्थान दिलवानेवाले बंगालके ही रामकृष्ण परमहंस के शिष्य विवेकानंद ! । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था

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विवाह उपरान्त ससुराल जानेपर कन्याओंके मनपर थोडा तनाव रहता है; क्योंकि ससुरालके व्यक्ति, वहांकी कार्यपद्धति इत्यादि, सब उसके लिए नूतन होता है । तनाव न लगे, इस हेतु जैसे किसी कार्यालयमें चाकरी (नौकरी) लगनेपर हम वहांकी सब पद्धति ज्ञात करते हैं, उसी प्रकार ससुराल जाकर वहांकी कार्यपद्धति ज्ञात करनी है, ऐसा दृष्टिकोण रखनेपर उन्हें तनाव […]

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सकाम प्रार्थनासे साधना महत्त्वपूर्ण कारण निम्नलिखित हैं – १. प्रार्थनासे प्रारब्ध शून्य नहीं होता, मात्र साधनासे होता है । २. प्रार्थनामें स्वेच्छा होती है तथा साधनासे स्वेच्छाका नाश करना होता है । `साधना योग्य हो’, ऐसी प्रार्थना करनेकी अपेक्षा वह समय साधनाको देना, उदा. नामजप, सेवाके लिए देना महत्त्वपूर्ण है । – परात्पर गुरु डॉ. […]

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समानशीले व्यसनेषु सख्यम् ।’ अर्थात् समान स्वभावके अथवा संकटमें फंसे लोगोंकी मैत्री स्वतः ही हो जाती है, ऐसा सिद्धान्त है । इस सिद्धान्तके अनुसार बुद्धिप्रामाण्यवादी एवं उनके समान अनिष्ट शक्तियोंसे आवेशित लोग श्मशानमें पार्टी(भोज) अथवा विवाह भी करते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात […]

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भारतके सभी राजनीतिक दलोंके शासकोंकी भ्रष्टाचारसे इकट्ठा की गई संपत्ति सरकारी कोष में डाली जाए, तो भारतको विश्‍वसे भीख नहीं मांगनी पडेगी । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था

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हिन्दू राष्ट्रकी जनता १५ अगस्त, २६ जनवरी इन राष्ट्रीय दिवसोंका उपयोग, अवकाशके फलस्वरूप दूरदर्शनके कार्यक्रम देखनेमें नहीं, अपितु समाज, राष्ट्र और धर्मकी सेवा करने हेतु करेगी । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था

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बुद्धिवादी, अर्थात परम मूर्ख धर्मद्रोही ! ईश्‍वरको बुद्धिसे नहीं समझा जा सकता, तथापि बुद्धिवादी कहते हैं, “ईश्‍वर नहीं होता !“ यह बहुत बडी मूर्खता है !’ – –  परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : https://sanatanprabhat.org/

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हिन्दुओ ! स्वार्थके साथ-साथ राष्ट्र और धर्मका भी विचार करो ।

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