श्रीगुरु उवाच

श्रीगुरु उवाच –  हमारे श्रीगुरुका गुरुपूर्णिमा निमित्त सन्देश 


   ‘गुरुपूर्णिमा सनातन संस्कृतिको प्राप्त गौरवशाली गुरुपरम्पराको कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करनेका दिन है । जिस प्रकार गुरुका कार्य समाजको आध्यात्मिक उन्नतिके लिए मार्गदर्शन देना है, उसी प्रकार समाजको कालानुसार मार्गदर्शन देना भी गुरुपरम्पराका कार्य है ।      वर्तमानमें भारत सहित सम्पूर्ण पृथ्वी सङ्कटकालसे गुजर रही है । इस पूरे वर्षमें बाढ स्थिति, दंगे (साम्प्रदायिक उपद्रव), […]

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श्रीगुरु उवाच


साम्यवादियोंको प्रारब्ध इत्यादि शब्द भी ज्ञात नहीं होते; अतः वे साम्यवाद शब्दका उपयोगकर, उपहासके पात्र सिद्ध होते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)

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चुनाव जीतने हेतु राजनीतिज्ञोंको जनताको प्रलोभन देना पडता है । इसके विपरीत साधना करनेवालेको ईश्वर स्वयं चुनते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)

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युवावस्थामें साधना करनेका महत्त्व : वृद्धावस्था आनेपर वृद्धावस्था अर्थात क्या ? इसका अनुभव होता है । इस अनुभवके उपरान्त वृद्धावस्था देनेवाला पुनर्जन्म नहीं चाहिए,  ऐसा प्रतीत होने लगता है;  परन्तु तबतक साधना करके पुनर्जन्म टालनेका समय निकल चुका होता है I ऐसा न हो;  इसलिए युवावस्थासे ही साधना करें ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत […]

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अन्य धर्मीय, धनका लोभ देकर हिन्दुओंको अपने धर्ममें सम्मिलित करते हैं, वहीं हिन्दू धर्ममें सिखाई जानेवाली साधनाका महत्त्व ज्ञात होनेपर अन्य धर्मीय हिन्दू धर्मका स्वतः ही पालन करते हैं ।- परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)

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हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनासे मिलेगा सर्व हिन्दुओंको आधार पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका इत्यादि देश ही नहीं, भारतके कश्मीर सहित सभी हिन्दू आधारहीन हो गए हैं । यह आधार देने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करना अपरिहार्य हो गया है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)

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बुद्धिप्रामाण्यवादियोंकी हास्यास्पद सोच ! कोई बालक ‘माता-पिता कौन ?’ इसकी शोध (खोज) करनेका प्रयत्न करे तथा उत्तर न मिलनेपर, ‘माता-पिता होते ही नहीं हैं’, उसका यह कथन जितना हास्यास्पद है, उतना ही बुद्धिप्रामाण्यवादियोंका ‘ईश्वर नहीं हैं’, यह कहना हास्यास्पद है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन […]

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हिन्दू राष्ट्र क्यों आवश्यक ? स्वतन्त्रताप्राप्तिसे आजतक, अर्थात पिछले ६८ वर्षोंमें जनताको शुद्ध जल तथा वायुतक उपलब्ध न करवा सकनेवाले सर्वपक्षीय राज्यकर्ता राज्य करनेके योग्य हैं क्या ? इन्हें सत्ताच्युतकर, अब हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करें ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)

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शासन एक भी मस्जिद अथवा गिरिजाघर अपने अधिकारमें नहीं लेता, यह ध्यान रखें ! शासनने (सरकारने) महाराष्ट्र स्थित श्रीतुळजाभवानी मन्दिर (तुळजापुर), श्रीविठ्ठल-रुक्मिणी मन्दिर (पंढरपुर), श्रीसिद्धिविनायक मन्दिर (मुम्बई) तथा श्रीसाईबाबा मन्दिर (शिर्डी), आन्ध्र प्रदेश स्थित श्रीतिरुमला तिरुपति मन्दिर (तिरुपति), उसी प्रकार केरलका श्रीगुरुवायूर मन्दिर (त्रिचूर) तथा श्रीअय्यप्पा मन्दिर (शबरीमला) ऐसे हिन्दुओंके प्रसिद्ध तथा सहस्रों अन्य मन्दिर […]

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     मन्दिरमें देवताकी सेवा करनेवाले कर्मचारी दर्शनार्थियोंको दर्शन देनेके अतिरिक्त क्या करते हैं ? उन्होंने दर्शनार्थियोंको धर्मशिक्षण दिया होता, उन्हें साधना सिखाई होती तो हिन्दुओंकी तथा भारतकी ऐसी दयनीय अवस्था नहीं हुई होती । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)

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