श्रीगुरु उवाच

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ईश्वरके समष्टि कार्यका महत्त्व एक-एक भक्तको सहाय्य करनेवाले देवताओंसे समष्टिको सहाय्य करनेवाले श्रीरामकृष्णादि अवतार सभीको निकट लगते हैं ।  – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)

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तृतीय महायुद्धमें आरोग्य क्षेत्रमें भारतका सर्वश्रेष्ठत्व पुनः सिद्ध होगा ! पहले आयुर्वेदके कारण भी भारतका नाम सर्वत्र था । आगे आनेवाले तृतीय महायुद्धके कालमें आधुनिक वैद्य (डॉक्टर) तथा औषधि उपलब्ध नहीं होगी । तब भारतके अतिरिक्त अन्य देशोंके नागरिकोंको व्याधि भोगने अथवा मृत्युको प्राप्त होनेके अतिरिक्त अन्य कोई पर्याय नहीं होगा । इसके विपरीत भारतमें […]

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वैयक्तिक जीवनमें अधिक कार्य करनेपर अधिक धन मिलता है; इसलिए सभी जन सहर्ष अधिक कार्य (ओवर टाईम ) करते हैं; परन्तु राष्ट्र और धर्मके लिए एक घण्टा सेवा करनेको कोई इच्छुक नहीं होता । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)

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बुद्धिप्रामाण्यवादी, सर्वधर्मसमभाववादी एवं साम्यवादियोंके कारण हुई है देश तथा धर्मकी अवस्था दयनीय बुद्धिप्रामाण्यवादियोंके कारण हिन्दुओंकी ईश्वरपर श्रद्धा नष्ट हुई । सर्वधर्मसमभाववादियोंके कारण हिन्दुओंको हिन्दूधर्मकी अद्वितीयताका ज्ञान नहीं हो पाया और साम्यवादियोंके कारण हिन्दुओंने  ईश्वरपर विश्वास करना त्याग दिया । इस कारण ईश्वरकी कृपा न होनेसे हिन्दू तथा भारत, इनकी अवस्था दयनीय हो चुकी है । […]

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नेत्रहीन कहता है, दृश्य जगत नामक ऐसा कुछ नहीं है । उसी प्रकार अन्धश्रद्धा निर्मूलन समितिवाले और बुद्धिप्रमाणवादी कहते हैं कि सूक्ष्म जगत, भूत इत्यादि कुछ नहीं; इसलिए कि उन्हें सूक्ष्म विषय समझनेकी जिज्ञासा ही नहीं होती और उनमें सूक्ष्म जगत अनुभव करनेके लिए जो साधना करनी होती है, उसे करनेकी उनकी क्षमता भी नहीं […]

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शिष्यकी पात्रता अनुसार, गुरुके सिखानेकी पद्धति उत्तम स्तरका शिष्य : ऐसा शिष्य व्यास मुनिके सुवचन ‘शिष्यादिच्छेत् पराजयम्’को चरितार्थ करता है, अर्थात गुरु उस शिष्यसे हार मान लेते हैं । इसका भावार्थ यह है कि ऐसे शिष्यसे गुरुकी अपेक्षा होती है कि वह आत्मज्ञानी हो जाए । मध्यम स्तरका शिष्य : ऐसे शिष्योंको गुरु उनकी शंकाओंका […]

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श्राद्ध परिपूर्ण करना आवश्यक सासको पूरनपोळी (महाराष्ट्रमें खाई जानेवाली एक प्रकारकी मीठी रोटी) रुचिकर थी; इसलिए बहूने सासके श्राद्धपर प्रातः ९ बजे पूरनपोळी बनाकर मुंडेरपर रखी । मध्याह्न ४ बजेतक उसे कौआ छूने नहीं आया । तत्पश्चात उसे स्मरण हुआ कि सासू मांको पूरनपोळीपर घी रुचिकर लगता था; इसलिए जैसे ही उसने पूरनपोळीपर घी परोसा, […]

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हास्यास्पद बुद्धिप्रामाण्यवादी जैसे यदि नेत्रहीन कहे कि ‘दृष्टि जैसा कुछ होता ही नहीं’ या जिसने सूक्ष्मदर्शक यन्त्र(माइक्रोस्कोप) न देखा हो और वह कहे कि ‘वैसा कुछ होता ही नहीं’, यह कथन जितना हास्यास्पद है, उससे अधिक हास्यास्पद तथाकथित बुद्धिप्रामाण्यवादियोंका यह कथन है, कि ‘सूक्ष्म जगत, मृत्योत्तर जीवन जैसा कुछ नहीं होता ।’ – परात्पर गुरु […]

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हिन्दू राष्ट्र आवश्यक क्यों ?    एक भी भ्रष्टाचारमुक्त एवं सक्षम शासकीय विभाग दिखाइए एवं उसके स्थानपर अनेक कोटि रुपये लीजिए !’ ऐसी घोषणा करनेपर रुपए लेनेवाला कोई नहीं होगा । यह है, भारतीयोंको दिया गया लोकतन्त्रका उपहार । आइए, इसे समाप्त करने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करें ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, […]

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 ‘निधर्मी हिन्दू’ संकट आनेपर अथवा मरते समय किसका नाम लेंगे ? संकट आनेपर अथवा मृत्युके समय ‘मुसलमान’ अल्लाहका, ‘ख्रिस्ती’ यीशुका, ‘बौद्ध’ बुद्धका तथा ‘जैन’ महावीरका नाम लेते हैं । इससे उनको थोडी-बहुत शान्ति मिलती है । तथाकथित बुद्धिप्रामाण्यवादी ‘निधर्मी हिन्दू’ किसीका भी नाम नहीं लेते; इसलिए उन्हें शान्ति नहीं मिलती । – परात्पर गुरु डॉ. […]

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