संस्कार, संस्कृति एवं भाषा

जिनके बच्चे आज्ञापालन नहीं करते, उनके पालकोंमें भी आज्ञापालनके संस्कार नहीं होते हैं !


मैंने पाया है कि जिनके बच्चे अपने पालकोंकी बात नहीं मानते हैं, उनके पालकोंमें भी आज्ञापालनके संस्कार नहीं होते हैं । उपासनाके आश्रममें गृहस्थ साधना हेतु आते ही रहते हैं, तो कुछ गृहस्थोंने कहा कि मेरे बच्चे मेरी कोई बात नहीं मानते हैं, अपनी मनमानी करते हैं । इसकारण उन्हें कष्ट होता है और हमें […]

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हिन्दुओं, आश्रम, मन्दिर एवं गोमाताके प्रति अपनी वृत्तिका आत्मनिरिक्षण करें !


हिन्दुओंकी स्थिति इतनी विदारक कैसे है एवं उनकी वृत्ति ही इसके लिए कैसे उत्तरदायी है आज यह आपको बताना चाहती हूं !        अगस्त १९९९ में मैं झारखण्डके धनबाद जनपदमें धर्मप्रसारकी सेवा अन्तर्गत एक सुप्रसिद्ध मन्दिरके सामने हामरे श्रीगुरुद्वारा संकलित ग्रन्थोंका ‘स्टॉल’ लगाकर धर्मप्रसारकी सेवा किया करती थी । एक दिवस मेरे पास […]

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आदर्श किसे मनना चाहिए, यह बाल्यकालसे ही सीखाना आवश्यक !


चित्रपट जगतके कलाकारोंके आए दिन आत्महत्याके समाचार आ रहे हैं, जो निश्चित ही चिन्ताजनक हैं । सबसे अधिक दुःखकी बात यह है कि ये लोग आजकी नूतन पीढीके आदर्श बन चुके हैं; किन्तु क्या समस्याओंसे उद्विग्न होकर अपनी इहलीलाको समाप्त कर लेना बुद्धिमानी है ? क्या खरे अर्थोंमें ऐसे लोग समाजके आदर्श बनने चाहिए ? […]

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शासकोंकी निकृष्ट नीतियोंने कृषकोंको उनकी पुरातन कृषि पद्धतीसे दूर कर दिया !


आज जहां उपासनाका आश्रम है, वहां आस-पास ९५% लोग कृषक हैं; किन्तु वे सब जैविक खेतीको त्याग चुके हैं ! अज्ञानतावश वे सभी रासायनिक खेती करते हैं, रासायनिक कीटनाशकका प्रयोग करते हैं एवं उनके घरमें जो गायें हैं, वे भी अधिकतर विदेशी प्रजातिकी हैं ! मात्र सात दशकोंमें, इस देशके शासकोंकी निकृष्ट नीतियोंने कृषकोंको उनकी […]

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सदैव ही अच्छी संगतमें रहनेका प्रयास करना चाहिए !


संगतिका प्रभाव पडता ही है; इसलिए सदैव ही अच्छी संगतमें रहनेका प्रयास करना चाहिए । अच्छी संगति हमें हमारी वृत्ति अनुरूप मिलती है । जैसे मद्यपिको मद्यपि, चोरको चोर और साधुको साधु स्वतः ही मिल जाता है । हमारी वृत्ति हमारे नित्यके आचरणसे बनती है; इसलिए आचरणको सात्त्विक रखना चाहिए एवं यदि कभी अयोग्य संगतिमें […]

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आजके हिन्दुओंकी वृत्ति !


हमने ‘दैनिक’ आरम्भ किया है; क्योंकि अब अन्तर्जालकी सहज उपलब्धता अधिक समय नहीं रहेगी । कालानुसार यह सब समाजसे लुप्त हो जाएगा; अतः हमने सोचा कि जितना समय शेष है, उसमें अधिकसे अधिक लोगोंको राष्ट्ररक्षण और धर्मशिक्षण देने हेतु प्रयास करना चाहिए ……

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कथावाचकोंने त्वरित ही अपनी चूकोंको स्वीकार कर कठोर प्रायश्चित लेना चाहिए !


अब तक लोग भ्रष्ट नेताओंपर या धर्मद्रोही कलाकारोंपर मसि (स्याही), पादत्राण (जूते-चप्पल), टमाटर और अण्डे फेंकते थे अब लोगोंने कथावाचकोंकी भी धुनाई आरम्भ कर दी है । वस्तुत: व्यासपीठको कलंकित करनेवाले कथावाचकोंने त्वरित ही अपनी चूकोंको स्वीकार कर कठोर प्रायश्चित लेना चाहिए एवं सर्वप्रथम कथा बांचना बन्द कर देना चाहिए; क्योंकि व्यासपीठसे इस्लामका प्रचार-प्रसारकर, उन्होंने […]

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वैदिक उपासना पीठके वानप्रस्थ प्रकल्पकी विशेषताएं (भाग-६) / उपासनाका वानप्रस्थ प्रकल्प वृद्धाश्रमसे भिन्न कैसे होगा ? (भाग-१)


उपासनाका वानप्रस्थ प्रकल्प वृद्धाश्रम नहीं होगा; क्योंकि यहां लोग विवश होकर नहीं आएंगे; अपितु वे लोग यहां स्वेच्छासे आएंगे जिन्हें  लगेगा कि अब हमें अपने सांसारिक  उत्तरदायित्वमें न  …..

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वैदिक उपासना पीठके वानप्रस्थ प्रकल्पकी विशेषताएं (भाग-७) / उपासनाका वानप्रस्थ प्रकल्प वृद्धाश्रमसे भिन्न कैसे होगा ? (भाग-२)


   सामान्यत: वृद्धाश्रममें कोई दिनचर्याका विशेष पालन नहीं किया जाता है, वहीं वानप्रस्थ प्रकल्पमें सदस्योंकी शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक क्षमता अनुसार उनकी दिनचर्याका ……

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वैदिक उपासना पीठके वानप्रस्थ प्रकल्पकी विशेषताएं (भाग-५)


आजकल लोगोंमें वाचनकी (पढनेकी) वृत्ति बहुत ही घट चुकी है, इस बातको कोई भी अस्वीकार नहीं कर सकता है ! अब मात्र लोग धन अर्जित करने हेतु पढते हैं । एक बार चाकरी मिल गई या व्यापार चल गया तो उसके पश्चात पुस्तकको हाथ नहीं लगाते …..

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