संस्कार, संस्कृति एवं भाषा

विद्यार्थियोंके गुण संवर्धनमें असफल रही है आधुनिक मैकाले शिक्षण पद्धति !


अनालस्यं ब्रह्मचर्यं शीलं गुरुजनादरः ।  स्वावलम्बः दृढाभ्यासः षडेते छात्र सद्गुणाः ॥ अर्थ : अनालस्य, ब्रह्मचर्य, शील, गुरुजनके लिए आदर, स्वावलम्बन और दृढ अभ्यास, ये छह छात्रके सद्गुण हैं । वर्तमान कालकी शिक्षण पद्धतिमें ऐसे गुणोंको आत्मसात करने हेतु नहीं सिखाया जाता है; इसलिए आजकी युवा पीढी आलसी होती है । आप उन्हें पांच किलो तरकारी […]

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अच्छे पुरोहितोंके अभाव का कारण, वे जिस दक्षिणा व सम्मानके पात्र हैं, वह हिन्दू समाज नहीं देता !


कुछ समय पहले हम एक व्यक्तिके पुष्प (अस्थियां) लेकर प्रयागराज गए थे । हमारे साथ एक नगरके कुछ प्रतिष्ठित धनाढ्य भी गए थे । अस्थि विसर्जनसे पूर्व एक छोटीसी संक्षिप्त श्राद्धविधि की गई और उसके पश्चात पुरोहितने दान हेतु जो इच्छा है, वह अर्पण करने हेतु कहा । वहां उपस्थित सभी पुरुषोंको पुरोहितको दान देनेके […]

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स्त्रीको ‘मैडम’ नहीं, अपितु बहन, दीदी, भाभी, चाची, काकी, मौसी, बुआ जैसे अदरार्थी शब्दोंसे सम्बोधित करें !


दो दिवस पूर्व इन्दौरकी एक ‘दूकान’में कुछ आवश्यक सामग्री क्रय करने गई थी । उस ‘दूकान’के स्वामीने मुझे दीदी कहकर सम्बोधितकर अपनी सामग्री दी । आप सोच रहे होंगे इसमें विशेष बात क्या है ? धर्मप्रसारके मध्य यहां-वहां जाना होता ही है और आज उत्तर भारतके छोटे-छोटे उपनगरोंमें (कस्बोंमें) पुरुषवर्ग स्त्रियोंको ‘मैडम’ कहकर सम्बोधित करने […]

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बच्चियोंको बाल्यकालसे पुरुषोंके वस्त्र क्यों नहीं पहनाना चाहिए ?


इस बार नवरात्रमें निकटके ग्रामसे कुछ कन्याओंको कन्या पूजन हेतु बुलाया था । जब मैं हवनकर कन्या पूजन हेतु कन्याओंके पास गई तो मुझे देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि मात्र दो कन्याओंने लडकियोंवाली वेशभूषा अर्थात फ्रॉक पहना था, शेष सभी कन्याएं लडकोंवाली वेशभूषामें थीं । ये बच्चियां सभी सात वर्षसेअल्प आयुकी थीं अर्थात ऐसी वेशभूषा […]

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बहुतसे घरोंमें पुरोहिताईका नियोजनकर हडबडीमें पूजन करानेवाले पण्डितगण !


किसी विशिष्ट व्रत या त्योहारके समय कुछ पण्डितगण लोभमें आकर बहुतसे घरोंमें पुरोहिताईका नियोजन कर लेते हैं और उसके पश्चात वे सभी घरोंमें पूजन कराते समय, जैसे अपना कोई कार्य निपटा रहे हों, ऐसी प्रवृत्तिसे सब कुछ हडबडीमें करते और कराते हैं । आधा समय तो उनका ध्यान घडीपर रहता है ! ऐसे पण्डितोंसे विनती […]

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नित्य धुले हुए वस्त्र पहनना, यह धर्माचरण का एक भाग हैं !


कुछ दिवस पूर्व मुझे एक लेख अकस्मात मिला, जिसमें लिखा था कि ‘जीन्स’को अधिक दिवसतक अच्छा रखना है तो उसे कमसे कम धोना चाहिए । तीन माहमें एक बार धोएं तो वह और अधिक दिन चलेगा । हमारे हिन्दू धर्ममें प्रत्येक दिवस स्नानके पश्चात धुले हुए वस्त्र पहननेका सात्त्विक विधान है । हमारे यहां निर्धनसे […]

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त्रिगुणातीत सन्तोंके आगे राजसिक और तामसिक व्यक्तिने नमन करना चाहिए, इसके विपरीत हो तो दालमें कुछ काला है !


कई बार मेरे कार्यक्रममें कुछ मेरे शुभचिन्तक लोग नेता, अभिनेता, क्रिकेटर जैसे प्रसिद्ध व्यक्तिको मुख्य अतिथिके रूपमें बुलानेका हठ करते हैं; उन्हें लगता इससे कार्यक्रमको प्रसिद्धि सहजतासे मिलेगी; परन्तु मेरा ऐसा मानना है कि आजके नेता, अभिनेता ये सब अधिकांशतः रजोगुणी और तमोगुणी होते हैं, जिनके लिए धन एवं ऐश्वर्य ही उनके देवता होते हैं, […]

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हिन्दुओंको धर्मशिक्षण देना आवश्यक !


कुछ दिवस पूर्व मैं इंदौरके मानपुर आश्रमके निकट एक ग्राममें प्रवचन हेतु गई थी । मैंने देखा कि वहांके भागवत कथाके मध्य भजनमें छोटी बच्चियां नाच रही थीं । उनमें से कुछ बच्चियोंने आजके प्रचलित फटे जीन्स पहन रखे थे । यदि समय रहते हिन्दुओंको धर्मशिक्षण नहीं दिया गया तो जैसे यहांके विवेकशून्य पालक अपने […]

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युवा पीढीको दिशाहीन करनेवाले व्यभिचारी चित्रपट जगतका सर्वनाश होना चाहिए !


अब सबको समझमें आ रहा है कि ये चित्रपटकी अभिनेत्रियां इतने वीभत्स वस्त्रोंको, मादक पदार्थोंका सेवनकर ही पहना करती थीं; क्योंकि कोई भी सामान्य महिला या युवतीके लिए इतना निर्लज्ज होकर सार्वजनिक स्थानपर जाना सम्भव है ही नहीं । युवा पीढीको दिशाहीन करनेवाले ऐसे व्यभिचारी चित्रपट जगतका ही सर्वनाश होना चाहिए, जिसने इस समाजके उच्च […]

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जिनके बच्चे आज्ञापालन नहीं करते, उनके पालकोंमें भी आज्ञापालनके संस्कार नहीं होते हैं !


मैंने पाया है कि जिनके बच्चे अपने पालकोंकी बात नहीं मानते हैं, उनके पालकोंमें भी आज्ञापालनके संस्कार नहीं होते हैं । उपासनाके आश्रममें गृहस्थ साधना हेतु आते ही रहते हैं, तो कुछ गृहस्थोंने कहा कि मेरे बच्चे मेरी कोई बात नहीं मानते हैं, अपनी मनमानी करते हैं । इसकारण उन्हें कष्ट होता है और हमें […]

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