संस्कार, संस्कृति एवं भाषा

भजन नहीं, क्षात्रधर्म साधनाकी है आजके हिन्दुओंको है आवश्यकता !


एक शुभचिंतकने मुझसे कहा कि आपकी वाणी अत्यन्त मधुर है; अतः आप अपने प्रवचनमें आधे समय भजन करें, इससे आपके प्रवचन अधिक प्रभावी होंगे । मैंने कहा, “जिस प्रकार अति दक्षता कक्षके (ICU) रोगीको प्राणवायु (oxygen) दिया जाता है, उसीप्रकारकी स्थिति आजके हिन्दुओंकी है । उसे धर्मको जान कर, धर्माचरण करनेकी आवश्यकता है । भजन […]

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चरित्र ही है व्यक्तित्वका आभूषण


स्वामी विवेकानन्द विश्व धर्म सम्मलेनमें भाग लेने शिकागो (अमेरिका) गए थे । उनके भगवे वेशभूषाको देखकर एक विदेशी महिलाने उनका उपहास करते हुए पूछा, “यह क्या है ?” वे वाक्पटु तो थे ही, तपाक उत्तर दिया, “यह आपका देश है, जहां दर्जी और वेषभूषा आपके व्यक्तित्वका निर्माण करता है; परन्तु हमारे देशमें चरित्र, व्यक्तित्वका निर्माण […]

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स्त्रियोंने अपने ससुराल पक्षको मनसे अपनानेका महत्व !


एक बात जो मैंने अपने धर्मप्रसारके मध्य पाया है कि जो स्त्रियां अपने पति या ससुरालसे या अपने ससुराल पक्षसे मानसिक दूरी रखती हैं अर्थात पतिको तो अपना लेती हैं किन्तु…..

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हिन्दुओंको धर्माभिमुख करने हेतु पाठ्यक्रमोंमे धर्मकी शिक्षा देना आवश्यक !


हिन्दू धर्ममें इतने व्रत-त्यौहार होते हुए भी यदि हिन्दू धर्माभिमुख और ईश्वराभिमुख  न हो पाए तो इससे अधिक दुःखकी बात और क्या हो सकती है ? किन्तु वर्तमान भारतमें ऐसा ही हो रहा है यह हिन्दुओंको विधिवत धर्मशिक्षण नहीं मिलनेके कारण ही है इसीलिए हिन्दुओंको धर्माभिमुख करने हेतु पाठ्यक्रमोंको धर्मकी शिक्षा देना अनिवार्य करना चाहिए […]

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स्त्रियो, आपको जैसी बहु चाहिए, अपनी पुत्रीमें वैसे ही गुण डालें !


स्त्रियो, आपको जैसी बहु चाहिए, अपनी पुत्रीमें वैसे ही गुण डालें !  ध्यान रहे आपकी पुत्री ही कहींकी बहु बनती है ! – तनुजा ठाकुर 

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हिन्दू बहुल देशमें धर्मशिक्षण की दुर्दशा !


सोनाक्षी सिन्हाके रामायणसे सम्बन्धित उत्तर न देनेपर अनेक लोग उसका उपहास कर रहे हैं, ऐसे सभी लोगोंसे पूछना चाहेंगे कि क्या इसके लिए हमारी शिक्षण पद्धति दोषी नहीं है ? आज सामान्य हिन्दुओंको धर्मका ज्ञान है ही कहां ! और अनेक लोग ….

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ब्राह्मणों! मद्यपान करना ही हो तो पुरोहिताई छोड दें !


मैंने पाया है कि आजकल कुछ ब्राह्मण जो कर्मकाण्ड करते हैं वे मद्यपान करते हैं ! दो वर्ष पूर्व मैं दिसम्बरके माहमें काशी गई थी ! वहांके ज्योतिर्लिंगके दर्शनसे निकलकर जब हम मंदिर प्रांगणमें स्थित कुंवेकी प्रदक्षिणा लगा रहे थे तो वहीं बैठे एक पण्डेने हमारे एक…….

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बहुतसे घरोंमें पुरोहिताईका नियोजन कर हडबडीमें पूजन कराने वाले पण्डितगण !


किसी विशिष्ट व्रत या त्यौहारके समय कुछ पण्डितगण लोभमें आकर बहुतसे घरोंमें पुरोहिताईका नियोजन कर लेते हैं और उसके पश्चात वे सभी घरोंमें पूजन कराते समय जैसे अपना कोई कार्य निपटा रहे हों, ऐसी प्रवृत्तिसे सब कुछ हडबडीमें करते और कराते हैं …..

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देवताको पुष्प तोडकर न चढाएं !


पुष्पको तोडकर उसे विद्रूप करनेसे उस पुष्पमें देवताको आकृष्ट करनेकी क्षमता न्यून हो जाती है; इसलिए यजमानको जितना आवश्यक हो उतना पुष्प लानेको कहें…..

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पण्डितोंने पूजनमें करना चाहिए सात्त्विक सामग्री का उपयोग !


पूजन करते समय पण्डितोंने इस बातका ध्यान रखना चाहिए कि पूजनमें उपयोगमें ली जाने वाली सामग्री यथासम्भव सात्त्विक हों | यथासम्भव इसलिए कह रही हूं क्योंकि इस घोर कलियुगमें पूर्ण रूपसे सभी सात्त्विक ….

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