संस्कार, संस्कृति एवं भाषा

शिक्षण प्रणालीमें माता- पिताका सम्मान करना, वृद्धावस्थामें देखभाल करना ये सर्व संस्कार न सिखाने का दुष्परिणाम !


इस देशकी शिक्षण प्रणालीमें यदि बच्चोंको माता-पिताका सम्मान करना, उनकी वृद्धावस्थामें देखभाल करना ये सर्व संस्कार दिए जाते तो आज बिहार शासनको माता-पिताका न देखभाल करने वालोंको कारागारकका दण्ड देनेके विधान पारित नहीं करने पडते ! इससे ही इस देशके शासन व्यवस्थाकी सोच किसी समस्याके समाधान हेतु कितनी सतही है यह ज्ञात होता है | 

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मिस इंडिया प्रतिस्पर्धा के दुष्परिणाम !


इस देशमें यदि मिस इंडियाके स्थानपर सबसे सुशील कन्याकी प्रतिस्पर्धा होती तो आज सुशील कन्याओंकी इस देशमें कोई कमी नहीं होती किन्तु मिस इंडिया देखकर अधिकतर आधुनिक युवतियां अंग प्रदर्शन करती हैं, अपने बाह्य सुन्दरताके वर्धनमें लगी रहती हैं और परिणाम तो आप देख ही रहे हैं ! 

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वर्तमान शिक्षापद्धति दिशाहीन होना !


हम अपने बच्चोंको जिहादी एवं क्रूर मुगलोंकी सात पीढीका इतिहास सिखाते हैं, जिसका व्यवहारिक जीवनमें कोई उपयोग नहीं होता | यदि दादा और परदादा, नाना व परनानाका नाम सिखाते तो कमसे कम श्राद्धके समय पंडितको उनका नाम तो वे बता पाते ! छि: कितनी दिशाहीन है हमारी शिक्षापद्धति !

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उपनाम और गोत्र ज्ञात होनेका महत्व !


हम जाति प्रथाके समर्थक नहीं हैं; किन्तु उपनाम और गोत्रका नाम ज्ञात रहनेसे, आपके पश्चात आनेवाली पीढीके आपके वंशज अपने पूर्वजोंका नाम, मूल स्थान, कुलदेवी इत्यादि ज्ञात कर सकते हैं…..

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धर्मशिक्षण देकर समाजको नीतिवान बनानेसे ही पैशाचिक कुकर्म रुकेंगे !


क्या बलात्कार हेतु मृत्युदण्डका विधान बनानेसे भारतमें बलात्कार रुक जायेंगे ? समाजको धर्मशिक्षण देकर उसे नीतिवान बनानेसे ही इसप्रकारके पैशाचिक कुकर्म रुकेंगे ! आज समाजमें न राजा धर्मनिष्ठ है और न ही प्रजा; इसलिए नित्य नूतन प्रकारके कुकर्म घटित होते हैं और निधर्मी राजनेता अपराधको न्यून करने हेतु सतही स्तरके उपाय करते हैं; अतः अपराध […]

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पाक कला (भाग-८)


प्राचीन कालसे ही लोहेके बर्तनमें भोजन बनानेकी पद्धति हमारे यहां प्रचलित है ।  यदि तरकारी(सब्जी) लोहेकी कढाईमें बनायी जाए तो उस व्यंजनमें भी लौह तत्त्व आ जाता है जो हमारे शरीरके लिए बहुत आवश्यक एवं उपयोगी होता है । लोहेके बर्तनमें कोई व्यंजन बनानेसे पूर्व उसे अच्छेसे मंज लेना चाहिए; क्योंकि अनेक बार जब हम […]

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पाक कला (भाग-१३)


प्रेशर कूकरमें बनानेके स्थानपर यूं ही  मिटटी, पीतल, कांसा या स्टीलके पतीलेमें बनाएं | ऐसे दाल खानेसे तो स्वादिष्ट होते ही हैं, इनकी पौष्टिकता अधिक प्रमाणमें बनी रहती है | ऐसी दालें सुपाच्य होती है; क्योंकि इसमें अग्नि और जल तत्त्व उचित…..

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धर्मके पतनका कुप्रभाव कलाके क्षेत्रमें भी स्पष्ट दिख रहा है!


धर्मके पतनका कुप्रभाव कलाके क्षेत्रमें स्पष्ट रूपसे देखा जा सकता है | पूर्वकालमें चित्रपट जगतमें आदर्श एवं वीर नारियोंपर चित्रपट बनाये जाते थे, अब आपराधिक……

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विद्या अति सुखमें प्राप्त नहीं की जा सकती है!


विद्या अति सुखमें प्राप्त नहीं की जा सकती है, आजकल माता-पिता अपने बच्चोंको वातानुकूलित विद्यालयोंमें भेजते हैं; क्योंकि उन्हें ही यह तथ्य ज्ञात नहीं होता ।

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पाक कला (भाग-१२)


जैसा कि आपको बताया कि प्रतिदिन भोजन बनानेकी अपेक्षा महाप्रसाद बनानेका प्रयास करें, इससे इसे ग्रहण करनेवालेका मन परिष्कृत होगा या विवेक (सात्त्विक बुद्धि) भी जागृत होगा, घरमें रोग-शोक सब न्यून होंगे । पाक कलामें मात्र भोजन बनानेकी पद्धतिका महत्त्व नहीं….

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