संस्कार, संस्कृति एवं भाषा

पण्डितोंद्वारा पूजन कराते समय अज्ञानतावश होनेवाली चूकें !


पिछले तीन वर्षोंसे उपासनाके आश्रममें या भिन्न स्थानोंपर हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना निमित्त भिन्न कर्मकाण्डीय अनुष्ठान हो रहा है ! उस मध्य मैंने भिन्न पण्डितोंद्वारा पूजन कराते समय अज्ञानतावश कुछ चूकें करते पाया तो उसे मैं समष्टि हितार्थ आपसे साझा कर रही हूं….

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सात्त्विक एवं पारम्परिक वस्त्र साडीको तामसिक कैसे करना, यह आजके कोई डिजाइनरसे सीखें !


सात्त्विक एवं पारम्परिक वस्त्र साडीको सिलकर या उसे भिन्न प्रकारसे धारण करवाकर, तामसिक कैसे करना चाहिए, यह आजके कोई तमोगुणी डिजाइनरसे सीखें ! यह सब समाजको सत्त्व-रज-तमके सिद्धांत, शिक्षण प्रणालीमें न सिखानेका ही परिणाम है !

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अपने बच्चोंको सिखाने हेतु धर्म सीखें !


जैसे हमारे पास दस रुपए होंगे तो ही हम उसे अपने बच्चोंको दे सकते हैं, वैसे ही यदि हमारे पास जब धर्म और साधनाकी जानकारी होगी तो ही हम उसे अपने बच्चोंसे दे सकते हैं……….

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कर्मठ व्यक्तिका सर्वत्र होता है सम्मान!


जो कर्मठ होते हैं उनका सर्वत्र सम्मान होता है और जो देहचोर (आलसी) होते हैं वे कभी किसीके प्रिय नहीं बनते ! आजकी पीढीमें आलस्य रुपी दोष बहुत अधिक है इसलिए वे ऐसे स्थानपर जब भी जाते हैं जहां उन्हें थोडा अधिक श्रम करना पडे तो उनकी सबसे अनबन हो जाती है । आज अधिकांश […]

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आजकी आधुनिक कही जानेवाली स्त्रियोंके माथेपर टीका क्यों नहीं टिकता !


पूर्व कालमें और आज भी, अनेक विवाहित स्त्रियां माथेसे टीका नहीं हटाती हैं और आजकी आधुनिक स्त्रियोंके माथेपर टीका लगानेको कहें तो ‘वह टिकती नहीं है’, वे ऐसा कहती हैं । जो टीका सहस्रों वर्षोंसे विवाहित स्त्रियोंके श्रृंगारका अविभाज्य अंग रहा है, वह आजकी आधुनिक कही जानेवाली स्त्रियोंके माथेपर क्यों नहीं टिकता है, इसपर उन्हें […]

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पारिवारिक तथा सामाजिक जीवनके लिए घातक है ‘स्मार्ट फोन’


अत्याधुनिक तकनीकसे युक्त चलभाष उपकरण अर्थात ‘स्मार्टफोन’ हमारे जीवनका अभिन्न अंग बनता जा रहा है । प्रायः यह देखनेमें आता है कि कई लोगोंका तो पूरा दिन चलभाषके सहारे ही व्यतीत होता है …..

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शिक्षण प्रणालीमें माता- पिताका सम्मान करना, वृद्धावस्थामें देखभाल करना ये सर्व संस्कार न सिखाने का दुष्परिणाम !


इस देशकी शिक्षण प्रणालीमें यदि बच्चोंको माता-पिताका सम्मान करना, उनकी वृद्धावस्थामें देखभाल करना ये सर्व संस्कार दिए जाते तो आज बिहार शासनको माता-पिताका न देखभाल करने वालोंको कारागारकका दण्ड देनेके विधान पारित नहीं करने पडते ! इससे ही इस देशके शासन व्यवस्थाकी सोच किसी समस्याके समाधान हेतु कितनी सतही है यह ज्ञात होता है | 

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मिस इंडिया प्रतिस्पर्धा के दुष्परिणाम !


इस देशमें यदि मिस इंडियाके स्थानपर सबसे सुशील कन्याकी प्रतिस्पर्धा होती तो आज सुशील कन्याओंकी इस देशमें कोई कमी नहीं होती किन्तु मिस इंडिया देखकर अधिकतर आधुनिक युवतियां अंग प्रदर्शन करती हैं, अपने बाह्य सुन्दरताके वर्धनमें लगी रहती हैं और परिणाम तो आप देख ही रहे हैं ! 

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वर्तमान शिक्षापद्धति दिशाहीन होना !


हम अपने बच्चोंको जिहादी एवं क्रूर मुगलोंकी सात पीढीका इतिहास सिखाते हैं, जिसका व्यवहारिक जीवनमें कोई उपयोग नहीं होता | यदि दादा और परदादा, नाना व परनानाका नाम सिखाते तो कमसे कम श्राद्धके समय पंडितको उनका नाम तो वे बता पाते ! छि: कितनी दिशाहीन है हमारी शिक्षापद्धति !

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उपनाम और गोत्र ज्ञात होनेका महत्व !


हम जाति प्रथाके समर्थक नहीं हैं; किन्तु उपनाम और गोत्रका नाम ज्ञात रहनेसे, आपके पश्चात आनेवाली पीढीके आपके वंशज अपने पूर्वजोंका नाम, मूल स्थान, कुलदेवी इत्यादि ज्ञात कर सकते हैं…..

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