संस्कार, संस्कृति एवं भाषा

समाज हित हेतु जो आवश्यक है उसे लिखना मेरा धर्म है


एक व्यक्तिका पत्र आया है -“आप इस प्रकार काम वासना संबन्धित उद्बोधनात्मक लेख न डालें, इससे आपकी आध्यात्मिक छवि धूमिल हो जाएगी ! ” इसका उत्तर इसप्रकार है  – शासन तो सबको लैंगिक शिक्षा (सेक्स एडुकेशन) दे रही है, लिव- इन रिलेशनशिप, गे रिलेशनशिपको मान्यता दे रही है,  प्रसार माध्यम(मीडिया) मनरंजनके नामपर अश्लील चित्र, साहित्य […]

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समाजके विनाशकी ओर बढनेके कारण


भ्रष्टाचारग्रस्त, व्याभिचारग्रस्त भारतमें इस प्रकारके कोई न कोई समाचारका प्रकाशित होना  इस देशका दुर्भाग्य बन गया है ! समाजके आजके सारे तथाकथित आदर्श (रोल मॉडल) बने हुए नायक वस्तुतः खलनायक और खलनायिका हैं तभी तो समाज विनाश की ओर बढ रहा है ! -तनुजा ठाकुर

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धर्मं शिक्षणके अभावके कारण हिन्दुओंमें अपनी संस्कृतिके प्रति निर्माण हो गयी है हीन भावना !


कुछ दिवस पूर्व दिल्लीमें एक युवा संस्कार वर्गका आयोजन किया गया था, वहांपर भोजन करते समय कुछ बच्चोंको आश्रममें भी चम्मचसे प्रसाद (दोपहरका भोजन) करते देख, मैंने उन सबको हाथसे प्रसाद ग्रहण करनेके लिए कहा; क्योंकि आश्रमका भोजन तो स्वर्ग लोकमें भी नहीं मिलता, तो एक बालिकाने कहा, जिसकी मां भी वहीं बैठी भोजन कर […]

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