संस्कार, संस्कृति एवं भाषा

तथाकथित हिन्दुओंका धर्मप्रेम !!


आजका हिन्दू प्रभु श्रीरामके समान उनेक गुणोंको आत्मसात् करनेका प्रयास तो नहीं करता; किन्तु उनके चित्रको वस्त्र रूपमें पहन कर उनकी विडम्बना अवश्य करता है । देवी-देवता, अवतार, सन्त, गुरु इनके चित्रसे चैतन्ययुक्त स्पन्दन निकलते हैं, इसलिए हम उनके स्वरूपकी पूजा करते हैं; परन्तु धर्मशिक्षणके अभावमें हम उन देवताओंके चित्रके वस्त्र पहनते हैं । वस्त्र […]

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अपने घरमें कांटे एवं पत्तियोंसे दूध निकलनेवाले पौधे न लगाएं ।


वृहतसंहितामें कहा गया है कि ऐसे पेड या पौधे जिनकी पत्तियों एवं टहनियोंको तोडनेपर दूध निकलता है, उसे घरके निकट नहीं लगाना चाहिए, इससे धनकी हानि होती है । इसीप्रकार कांटेवाले पेड एवं पौधे जैसे कैक्टस इत्यादि घरके मुख्य द्वार एवं घरके निकट होना शुभ नहीं होता है; क्योंकि कांटे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं, […]

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आजके राजनेतामें धर्मशिक्षण और साधनाका अभाव


धर्मशिक्षण और साधनाके अभावमें आजके राजनेता और गृहस्थ अपने जीवनके अन्तिम चरणमें पहुंचनेपर भी अपने पद एवं आसक्तियोंका त्याग नहीं कर पाते तथा उसीमें लिप्त रहते हुए अपने प्राण त्याग देते हैं और अपना अनमोल मनुष्य जीवन, जिसका सदुपयोग ईश्वरप्राप्ति हेतु करना चाहिए, उसे यूं ही व्यर्थ कर देते हैं । -तनुजा ठाकुर

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व्यासपीठपर जूते पहनकर जाना व्यासपीठका अपमान है !


हिन्दुओ ! व्यासपीठपर पादत्राण (चप्पल या जूते) पहनकर न जाएं और न ही उसे पहनकर दीप प्रज्ज्वलन करें ! आजकल अनेक लोग व्यासपीठपर अपने पादत्राण (चप्पल या जूते) पहन कर जाते हैं ! कुछ लोग विशेष कर, मुख्य अतिथि दीप प्रज्ज्वलन करते समय भी पादत्राण पहने हुए रहते हैं ! यह सब हिन्दुओंमें धर्मशिक्षण नहीं […]

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मृतकोंके लिए ‘केंडल मार्च’ करना – हिंदुओंके नकलची बंदर होने,धर्मभ्रष्टता एवं बुद्धिभ्रष्टता होनेका है, एक और प्रमाण !


धर्मशिक्षण और साधनाके अभावमें हिंदुओंके विवेक पूर्णत: नष्ट हो गए हैं | इसका एक उदाहरण है कि मृतकोंके लिए अपनी दिखावटी संवेदना व्यक्त करने हेतु केंडल मार्च करनेकी नौटंकी करना ! दो मिनट मौन रखकर न ही मृत आत्माओंको शांति मिलती है और न ही उन्हें मृत्यु उपरांतकी यात्रामें कोई प्रभाव पड़ता है ! परंतु […]

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दूसरों की परस्थिति को समझना और सभी का हित सोचना साधना ही है !


यदि एक भी लेख मात्र अंग्रेजी में डाल देती हूं तो कुछ व्यक्ति जिन्हें विशेषकर अङ्ग्रेज़ी नहीं आती वे अपनी तीक्ष्ण शब्दोंमें अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं और कहते हैं कि संस्कृतनिष्ठ हिन्दी सीखनेके लिए कहती हैं तो अङ्ग्रेज़ी में क्यों लिखती हैं, ईश्वरीय कृपासे ५० से अधिक देशों के एक कोटि ३५ लक्षसे भी […]

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सिक्ख, जैन, बौद्ध इन सब धर्मोंकी जननी वैदिक सनातन धर्म है।


कुछ दिवस पूर्व इटली में रहनेवाले भिन्न देशों के नागरिकों द्वारा अनुसरण किया जानेवाले भिन्न धर्म एवं पंथों के प्रतिनिधियों ने एक स्थानीय मेले के उदघाटन समारोह में अपने धर्म के विषय में कुछ मिनट बोलना था। मुझे यह कहते हुए क्षोभ हो रहा है कि जो सिक्ख धर्मके प्रतिनिधि ने बोला, उससे स्पष्ट आभास हो […]

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एक खरे हिन्दूकी व्यापकता ही उसके व्यक्तित्वका परिचय देता है !


एक व्यक्ति ने मेरे इनबॉक्स में लिखा है कि आप परदेस जाकर वहाँ की अच्छाइयों को साझा न करें ! मैं एक आध्यात्मिक समीक्षक हूंं, तटस्थ होकर प्रत्येक परिस्थिति की समीक्षा करना मेरा मूल धर्म है, जो अच्छा उसे तो अच्छा कहना ही होगा, निसर्ग की सुंदरता मुझे सदैव सम्मोहित करती रही है चाहे वह […]

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हमने इस वसुंधराके समीकरणको परिवर्तित कर दिया है !


मेरी मां कहती थीं कि चाहे जाओ नेपाल कपाल (भाग्य) साथ ही जाएगा ! यूरोप आई थी तो सोचा था कि संभवतः गर्मीसे त्राण मिलेगा ( कम प्राणशक्ति के कारण गर्मी असह्य हो जाती है ) ! परंतु यहां इटलीमें भी जब से आई हूंं तापमान 35 डिग्री के ऊपर ही हैं ! और यहांं चूंकि […]

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ऐसे आश्रमको यदि गंगा मैया लील जाए तो आश्चर्य कैसा !


पिछले वर्ष एक तीर्थ नगरी में गंगा तटपर एक अत्यधिक प्रसिद्ध संतके आश्रममें जानेकी संधि मिली । आश्रम क्या था विदेशियोंको आकृष्ट करने हेतु भरितीय संस्कृतिकी झलक देनेवाली एक तामझाम युक्त दुकान थी। आश्रमका इस परिसीमा तक व्यापरीकरण हो गया था कि वहां घुसते ही मेरे सिरमें वेदना होने लगी। मन यह सब देख क्रंदन करने […]

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