धर्मशिक्षण और साधनाके अभावमें हिंदुओंके विवेक पूर्णत: नष्ट हो गए हैं | इसका एक उदाहरण है कि मृतकोंके लिए अपनी दिखावटी संवेदना व्यक्त करने हेतु केंडल मार्च करनेकी नौटंकी करना ! दो मिनट मौन रखकर न ही मृत आत्माओंको शांति मिलती है और न ही उन्हें मृत्यु उपरांतकी यात्रामें कोई प्रभाव पड़ता है ! परंतु आजके हिंदुओंके लिए बिना बुद्धिका उपयोग किए पाश्चात्य संस्कृतिका अंधा अनुकरण करना ही उनका मूल धर्म हो गया है ! मृतकोंके लिए केंडल मार्च करनेसे उन मृतकोंको आसुरी शक्ति मृत्यु उपरांत सरलतासे अपने नियंत्रणमें कर सकती हैं; क्योंकि मृतकोंके निमित्त उन्हें समरण कर, मोमबत्ती जलानेसे मृतककी आत्मा वहां आती है और मोमबत्ती तमोगुणी होनेके कारण उसे जलानेसे असुर सहज ही वहां आते हैं और ऐसेमें सारे मृतककी जीवात्माओंको वे एक झटकेमें अपने नियंत्रणमें कर सकते हैं और बंधक बनाकर पापकर्म करवा सकते हैं; परंतु सूक्ष्म ज्ञान विरहित आजका यह आधुनिक बुद्धि भ्रष्ट हिन्दू समाजको यह सब कहां समझमें आता है !
उत्तराखण्डमें मृतकोंके लिए आए अपनी दुखद संवेदना व्यक्त करने हेतु आए दिन सम्पूर्ण भारतमें एक नए चलनने(फ़ैशन) जन्म लिया है वह है मृतकों हेतु केंडल मार्च करना और समाचारकी मुखपृष्ठपर छा जाना !
मृत्यु उपरांत जीवात्माको यदि खरे अर्थमें सहायता करनी हो तो मृतकोंके निमित्त संकल्प लेकर एकसे पाँच घंटे किसी उच्च कोटिके देवताका नामजप का अनुष्ठान रखना चाहिए , या श्राद्ध इत्यादि विधि किसी अच्छे पुरोहितको बुलाकर करवाना चाहिए या होम हवन करना चाहिए !
परंतु आजके हिन्दू बिना कष्ट या साधना किए जो भी प्रदर्शन कर अपनी संवेदनाको प्रकट करनेकी नौटंकी करनी पडे, वह कर समाज ऋणसे अपना पल्ला झाड लेते हैं ! – तनुजा ठाकुर
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