आयुर्वेद

घरका वैद्य – मर्दन चिकित्सा (भाग-९)


विशेष : ध्यान रहे दुग्ध स्नानके पश्चात जलस्नान करनेपर दूधकी चिकनाई अथवा गन्ध शरीरपर शेष नहीं रहनी चाहिए, अन्यथा स्नान स्वास्थ्यकर सिद्ध नहीं होगा तथा ऐसे त्रुटिपूर्ण स्नानसे हानि भी हो सकती है ।      दुग्धस्नानमें कच्चे (बिना ओटाए) और नूतन दूधका ही प्रयोग करना चाहिए ! शरीरके बालोंवाले भागपर दूधका प्रयोग निरर्थक है […]

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घरका वैद्य – मर्दन चिकित्सा (भाग-६)


मर्दन या मालिश का आवश्यक ज्ञान उबटन और अभ्यंग स्नान : उबटनको यदि संयुक्त घर्षण और तेल स्नान कहा जाए तो असत्य नहीं होगा; क्योंकि उबटनमें तेलयुक्त पदार्थके मिश्रणसे शरीरका तेल स्नान भी हो जाता है और साथ ही साथ सम्पूर्ण रूपसे उसका घर्षण तथा मर्दन (मालिश) भी । उबटनसे शरीरको सभी लाभ होते हैं, […]

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भोजनके समय अत्यधिक ठण्डे शीतल पेयका न करें सेवन


आजकल पाश्चात्य भोजनालयोंमें भोजनके साथ शीतलपेय परोसनेका प्रचलन है और नेत्र मूंदकर विदेशियोंको अनुकरण करनेवाले भारतीय, उन्हें बडे गर्वसे पीते हैं और स्वयंको आधुनिक समझते हैं; किन्तु आयुर्वेद अनुसार ऐसा नहीं करना चाहिए । वस्तुत: भोजनके समय किसी भी प्रकारका, सामान्य तापमानसे नीचे कोई भी शीतल पेय, विशेषकर कृत्रिम शीतल पेय कदापि न पिएं और […]

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घरका वैद्य – मर्दन चिकित्सा (भाग-४)


यदि यह स्नान उचित रीतिसे किया जाए तो इसका प्रभाव शरीरके ऊपरी भागकी त्वचापर इतना अच्छा पडता है कि देखकर आश्चर्य होता है । कुछ दिनोंके पश्चात समूचा शरीर ‘मलमल’की भांति कोमल हो जाता है और त्वचापर एक प्रकारका आकर्षक लावण्य आ जाता है । विशेष : शुष्क घर्षणस्नानमें तेल या इसी प्रकारकी किसी अन्य […]

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घरका वैद्य – मर्दन (मालिश) चिकित्सा (भाग-३)


प्रत्येक ‘मालिश’के पश्चात यदि रोगी न्यूनतम आधे घण्टेतक वस्त्र ओढकर विश्रामकर ले तो इससे विशेष लाभ होता है । नित्यकी ‘मालिश’से भूख खुल जाती है, नींद अच्छी आने लगती है, त्वचा कोमल, लचीली और चमकीली हो जाती है । शरीरका रंग खुल जाता है । शुष्क घर्षण स्नान : शुष्क घर्षण स्नान और कुछ नहीं, […]

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घरका वैद्य – मर्दन (मालिश) चिकित्सा (भाग-२)


इनकी जानकारी निम्नलिखित है : दीर्घ मर्दन : ये विस्तृत रूपसे हाथ घुमाकर होता है, जैसे पीठ, हाथ, पांव आदिका मर्दनमें किया जाता है । ह्रस्व मर्दन : दीर्घ मर्दनसे अल्प विस्तृत और आस-पास हाथ घुमाकर होता है, जैसा स्नायुओं तथा मणकोंपर किया जाता है । मण्डल मर्दन : मण्डलाकार मर्दन हाथ घुमाकर होता है, […]

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घरका वैद्य – मर्दन चिकित्सा (भाग-१)


मर्दन अर्थात मालिश चिकित्सा : यह एक अति प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है और आज भी भारतके घर-घरमें यह प्रचलित है । इस अंकमें हम आपको इस चिकित्सा प्रणालीके कुछ तत्त्वोंसे परिचय कराते हैं । मर्दनके विभिन्न प्रकारोंका वर्णन तथा मर्दनसे लाभ : मर्दनकी विविध विधियोंको समझानेसे पूर्व इस सम्बन्धमें कुछ विशेष बातें समझ लेनी चाहिए […]

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घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – उद्गीथ प्राणायाम (भाग-३)


उद्गीथ प्राणायाम प्रत्येक आयुके व्यक्तिके लिए लाभदायक है । जब भी मनमें तनाव और उद्विग्नता अनुभव हो, तब इस प्राणायामका अभ्यास करके मन शान्त किया जा सकता है । ★ वायुविकार (गैस), अम्लता (एसीडिटी) और उदरके (पेटके) अन्य रोग उद्गीथ प्राणायामसे दूर हो जाते हैं । उद्गीथ प्राणायाममें सतर्कता ★ उद्गीथ प्राणायाममें श्वासको शरीरके भीतर […]

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घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – उद्गीथ प्राणायाम (भाग-२)


उद्गीथ प्राणायामकी समय सीमा उद्गीथ प्राणायाममें श्वास शरीरके भीतर लेनेका समय तीनसे पांच ‘सेकेण्ड’का रखें ! ★ “ॐ”के जपके साथ जब श्वास बाहर छोडें, तब उसका समय पन्द्रहसे बीस ‘सेकेण्ड’तक, अपनी शक्ति अनुसार खींचनेका प्रयास करें ! (ध्यान रहे, अपने शरीरकी मर्यादामें रहकर ही बल लगाएं !) ★ एक सामान्य व्यक्ति उद्गीथ प्राणायाम अभ्यासको प्रतिदिन […]

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घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – उद्गीथ प्राणायाम (भाग-१)


उद्गीथ प्राणायामको “ओमकारी जप” भी कहा जाता है । यह एक अति सरल प्राणायाम है और एक प्रकारका ध्यानाभ्यास भी है । उद्गीथ प्राणायाम प्रतिदिन प्रातःकाल करनेसे व्यक्तिको अनेक शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं । उद्गीथ प्राणायाम चिन्ता, ग्लानि, द्वेष, दुख और भयसे मुक्ति दिलाता है । इस प्राणायामके अभ्याससे ध्यान-शक्ति बढ जाती है, […]

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