आयुर्वेद

अपराजिताके औषधीय गुण


अपारिजिता एक आयुर्वेदिक और सुलभ बारहमासी बेल है जो उष्‍णकटिबंधीय क्षेत्रोंमें होती है । यह एक औषधीय गुणोंवाली जडी बूटी है जो सामान्य घरेलू पौधोंकी भांति घरोंमें उगाई जाती है । अपारिजिता पौधेको बहुत ही कम देखभालकी आवश्‍यकता होती है । अपारिजिताके संपूर्ण पौधेके संपूर्ण भाग औषधीय उपयोगके लिए हैं । विशेष रूपसे इस पौधेकी […]

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आयुर्वेदका महत्त्व आयुर्वेदके विद्यार्थियोंको महाविद्यालयमें पढाने की आवश्यकता !


आजकल जब एलोपेथी चिकित्साके महाविद्यालयमें कुछ विद्यार्थियोंको स्नातकमें प्रवेश नहीं मिलता है तो वे आयुर्वेद चिकित्सा पद्धतिसे स्नातककी उपाधि ले लेते हैं जिसमें प्रतिस्पर्धा एलोपेथीकी तुलनामें अल्प प्रमाणमें होता है एवं आयुर्वेदसे स्नातक लेनेके पश्चात वे एलोपेथी चिकित्सासे रोगियोंका उपचार करते हैं ! ऐसे सभी वैद्योंको वस्तुत: आयुर्वेदका महत्त्व ही ठीकसे नहीं पढाया जाता है; […]

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आयुर्वेद, स्वदेशी चिकित्सा पद्धति या वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतिको विद्यालयोंमें सिखानेकी आवश्यकता !


पाठयक्रमोंमें योगासन, पप्राणायाम, भोजन कैसे करें, जल कितना और कब पीएं, घरमें उपलब्द्ध सामग्रियोंका रोग-निवारण हेतु कैसे उपयोग कर सकते हैं, जैसे सामान्य एवं सरल बातोंको….

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विरुद्ध आहार (भाग -२)


दूधके साथ दही , मूली , मूलीके पत्ते , खट्टे पदार्थ,  नमक , कच्चे सलाद , इमली, खरबूजा, बेलफल,…….. खट्टे फल का सेवन स्वास्थ्यके लिए हानिकारक होता है…..

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विरुद्ध आहार लेना स्वास्थ्यके लिए हानिकारक हो सकता है, इसे लेना टालें ! (भाग – १)


आजकल अनेक लोग जब भिन्न प्रकारके व्यंजन बनाते हैं तो उसे बनाते समय कुछ बडी चूकें करते हैं जैसे मैंने देखा है कि कुछ लोग तरकारी या पनीरके भिन्न प्रकारके व्यंजन बनाते समय उसमें दूध डालते हैं, दूध और नमक यह आयुर्वेद अनुसार विरुद्ध …..

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मांसाहार क्यों न करें ? (भाग – १४)


विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) मांस उत्पादोंको ‘एस्बेस्टस’ और ‘सिगरेट’की भांति कैंसरजनक (कारसेनोजिनिक) तत्वोंमें वर्गीकृत करता है । आपको बता दें, विदेशोंमें…..

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आयुर्वेदका शास्त्र वृहद एवं मनुष्यके लिए कल्याणकारी !


आयुर्वेदकी परिभाषा एवं व्याख्यासे ही यह शास्त्र कितना वृहद एवं मनुष्य मात्रके लिए कल्याणकारी है ?, यह ज्ञात होता है । आयुर्वेद विश्वमें विद्यमान वह साहित्य है, जिसके अध्ययनके…..

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मांसाहार क्यों न करें ? (भाग – १३)


आप सभीने बर्ड फ्लू और स्वाइन फ्लूका नाम सुना होगा । यह रोग मुर्गे और सुअरोंके माध्यम मनुष्योंतक पहुंचती है । यह रोग हमारे शरीर तक तभी पहुंचती है जब हम इस रोगसे ग्रस्त जीवको….

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मांसाहार क्यों न करें ? (भाग – १३)


आयुर्वेदाचार्य चरकके अनुसार यदि कोई पशु अपने प्राकृतिक वातावरणमें नहीं रह रहा है या उस भोगौलिक क्षेत्रका मूल निवासी नहीं है या किसी किसी ऐसे वातावरणमें…..

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भोजनके साथ कृत्रिम शीतपेय विष समान है !


आजकल पाश्चात्य भोजनालयोंमें भोजनके साथ शीतपेय परोसनेका प्रचलन है और जो भारतीय विदेशियोंको नेत्र मूंदकर अनुकरण करनेवाले हैं, वे उसे बडे इतराकर सेवन करते हैं; किन्तु ऐसा नहीं करना चाहिए । वस्तुत: भोजनके समय किसी भी प्रकारका, सामान्य तापमानसे नीचेका कोई भी शीतल पेय, विशेषकर कृत्रिम शीतल पेय पदार्थ कदापि न पीएं, इससे जठराग्नि बुझ […]

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