आयुर्वेद

घरका वैद्य – बथुआ (भाग-६)


बथुआ सागसे यकृतकी रक्षा करें : जब हम औषधि लेते हैं, तो कभी-कभी चिकित्सा, प्रभावके पश्चात भी वह अपना दुष्परिणाम (अवशेष) छोड देती है । अवशेष यकृतद्वारा अवशोषित किया जाता है और धीरे-धीरे शरीरमें फैलाया जाता है । एक अध्ययनसे पता चलता है कि बथुएकी पत्तियां, कुछ औषधियोंके अवशेषोंके लिए एक अच्छा प्रतिरक्षात्मक होती हैं […]

आगे पढें

घरका वैद्य – बथुआ (भाग-५)


आंखोंके स्वास्थ्यके लिए बथुएका साग : आजकल बच्चे तकनीकी उपकरणोंसे इतने जुड चुके हैं कि वे अपनी छोटीसी आयुमें ही आंखोंकी कार्य क्षमताको खो देते हैं । बथुएमें जस्ता और लौह सामग्री अच्छी मात्रामें होती है, जो हमारी दृष्टिको उत्तम बनाए रखनेमें सहायता करती है । मुखकी समस्या दूर करे : मुखकी दुर्गन्ध एक बहुत […]

आगे पढें

घरका वैद्य – बथुआ (भाग-४)


पथरी : १ गिलासभर कच्चे बथुएके रसमें शक्कर मिलाकर प्रतिदिन पीनेसे पथरी गलकर बाहर निकल जाती है । बथुएके गुण अम्लपित्त (एसिडिटीको) दूर करे : वात (Gastric) और अम्लताको (Acidity) न्यून करनेकी क्षमता बथुएके पत्तोंमें विद्यमान रहती है; क्योंकि यह मलबद्धताको (‘कब्ज’को) ठीक करनेमें सहायता करता है और हमारे पाचन तन्त्रको स्वस्थ्य रखता है । […]

आगे पढें

घरका वैद्य – बथुआ (भाग-३)


बथुआ खानेके लाभ वृक्कके (गुर्देके) लिए :‘गुर्दे’की विफलताके (kidney failure) फलस्वरूप शरीरमें रक्तकी आपूर्ति और मूत्रके उचित प्रवाहमें बाधा हो सकती है । जिससे शरीर दुर्बल हो सकता है । बथुएका सेवन ‘गुर्दे’की पत्थरीसे छुटकारा पाने और यूटीआई (UTI) जैसे मूत्रपथके संक्रमणके उपचारमें भी सहायता कर सकता है । मधुमेहके लिए बथुआ सागके लाभ : […]

आगे पढें

घरका वैद्य – बथुआ (भाग-२)


घटक : वनस्पति विशेषज्ञोंके अनुसार, बथुएमें लौह, सोना, क्षार, पारा, ‘कैरोटिन’, ‘मैग्नीशियम’, ‘कैल्शियम’, ‘फॉस्फोरस’, ‘पोटैशियम’, ‘प्रोटीन’, वसा तथा ‘विटामिन-सी’ व ‘बी-२’ पर्याप्त मात्रामें पाए जाते हैं । इनके अतिरिक्त इसमें ‘कार्बोहाइड्रेट’, ‘राइबोफ्लेबिन’, ‘नियासिन’, तांबे और लोहेकी मात्रा अधिक होती है तथा इसमें ‘थायमिन’ भी पाया जाता है । बथुएमें पाए जानेवाले पोषक तत्त्व प्रति १०० […]

आगे पढें

घरका वैद्य – बथुआ (भाग-१)


बथुएको विशेष रूपसे आप और हम ‘खरपतवार’के (Weed) रूपमें जानते हैं, और हममेंसे बहुतसे लोग बथुएके लाभ जाने बिना ही इसे नष्ट भी कर देते हैं । सम्भवतः उन लोगोंको यह पता नहीं होता कि बथुआ (Bathua) बहुतसे स्वास्थ्य लाभोंसे भरा हुआ है और भारतमें एक स्वस्थ शाकके (सब्जीके) रूपमें प्रसिद्ध है । बथुएको वैज्ञानिक […]

आगे पढें

घरका वैद्य – काली मिर्च (भाग-२)


* ‘जुकाम’की स्थितिमें यह प्रयोग करें  !  २ ग्राम कालीमिर्चको पीसकर चूर्ण बना लें ! ‘गर्म’ दूधमें आवश्यकतानुसार मिश्री मिला लें ! कालीमिर्चके चूर्णको फांककर ऊपरसे दूध पी लें ! इससे ‘जुकाम’में लाभ मिलेगा । * पेटमें कीडेकी समस्या है तो यह प्रयोग करें ! ५-६ कालीमिर्चको पीसकर चूर्णकर लें । सवेरे कालीमिर्चका चूर्ण फांककर […]

आगे पढें

घरका वैद्य – काली मिर्च (भाग-१)


काली मिर्च एक लता जातिका पौधा है, जिसका तना काष्ठीय होता है । इसका तना स्तम्भाकार होता है, जो गठानोंपर अधिक मोटा होता है । इसकी पत्तियां ४ से ७ इंचतक लम्बी तथा २ से ५ इंचतक चौडी होती हैं । प्रत्येक पर्णपर ५ से ९ तक शिरायें स्पष्ट दिखाई देती हैं । पुष्प लम्बी-लम्बी […]

आगे पढें

घरका वैद्य – पालक (भाग-१)


पालक ‘अमरन्थेसी’ कुलका फूलनेवाला पौधा है, जिसकी पत्तियां एवं तने शाकके रूपमें खाए जाते हैं । पालक शीतऋतुमें उत्पन्न होनेवाला शाक है तथा यह पालेको सहन कर सकता है; किन्तु अधिक उष्णता नहीं सह सकता है । इसमें जो गुण पाए जाते हैं, वे सामान्यतः अन्य शाकमें (सब्जीमें) नहीं होते । यही कारण है कि […]

आगे पढें

घरका वैद्य – क्रिस्टल चिकित्सा (भाग-२)


कुल सात चक्र हैं, मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा व सहस्रार । चक्र प्रणालीको सन्तुलित करनेमें ‘क्रिस्टल’के साथ ‘रेकी’ या प्राणशक्ति प्रणाली चिकित्सा अत्यन्त सहायक है । यह प्रत्येक क्षेत्रपर उपयुक्त रंगका एक पत्थर रखकर किया जा सकता है । प्रत्येक चक्रको अपनी ऊर्जा और पूरे शरीरके समग्र सद्भावमें परिवर्तनके बिना अपने कम्पनसे मेल […]

आगे पढें

© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution