आयुर्वेद

क्यों करें मिट्टीके घडेके जलका उपयोग ?


 मिट्टीके घडेमें रखे जलका उपयोग शारीरिक दृष्टिसे अत्यन्त लाभकारी होता है । मिट्टीमें पाए जानेवाले तत्त्वोंके कारण, उसमें कई प्रकारके रोगोंसे लडनेकी क्षमता पाई जाती है । विशेषज्ञोंके अनुसार मिट्टीके पात्रोंमें जल रखा जाए, तो उसमें मिट्टीके गुण आ जाते हैं;  इसीलिए घडेमें रखा जल हमें स्वस्थ बनाए रखनेमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है । शीतकपाटिकाका […]

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आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें (भाग – २३.२)


विभिन्‍न प्रकारकी खुम्बियोंके अध्‍ययनमें, जिनमें ‘शिटिक’ और ‘मैटेक’ आदि सम्मिलित हैं, ज्ञात हुआ है कि उनमें ‘पोटैशियम’की मात्रा अधिक पाई जाती है । ‘पोटैशियम’ रक्‍त वाहिकाओंमें एक वाहिका-विस्फारकके (वैसोडीलेटरके) रूपमें……

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आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २३.१)


खाद्य खुम्बी (संस्कृत नाम – भूमिकन्दक; हिन्दी नाम – कुकुरमुत्ता, छत्रक, अंग्रेजी – मशरूम) शाकाहारी या मांसाहारी प्रत्येक वर्गके लोगोंके लिए भोजनका एक शाकाहारी विकल्प है और हो भी क्‍यों न ?, क्योंकि इसमें ऐसे पोषक तत्व उपस्थित…..

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आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २२.२)


हल्दीको गिलोयके पत्तोंके रसके साथ पीसकर खुजलीवाले अंगोंपर लगानेसे और ३ चम्मच गिलोयका रस और १ चम्मच मधुको (शहदको) मिलाकर प्रातःकाल व संध्यामें पीनेसे खुजली समाप्त हो जाती है…..

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आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २२.१)


गिलोय (संस्कृत नाम – गुडूची, ज्वरअरिः, छिन्ना, जीवन्ती; अंग्रेजी नाम – टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया; अन्य नाम – अमृता, छिन्नरुहा, चक्रांगी), एक बहुवर्षिय लता होती है । इसके पत्ते पानके पत्तोंकी भांति होते हैं । गिलोयकी लता वन, खेतोंकी मेड……

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मिटटीके पात्रोंका दैनिक जीवनमें क्यों करें उपयोग ?


मिट्टीके बर्तनमें भोजन पकानेसे भोजनके सर्व पोषक तत्त्वोंका सुरक्षित रहना पुरातन कालसे हमारे यहां मिट्टीके पात्रोंका उपयोग होता आया है । कुछ वर्षो पूर्वतक भी गांवमें अनेक घरोंमें मिट्टीके बर्तन उपयोगमें लिए जाते थे । घरोंमें दाल पकाने, दूध गरम करने, दही जमाने, चावल बनाने और आचार रखनेके लिए मिट्टीके बर्तनोंका उपयोग होता रहा है […]

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