आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २३.१)


खाद्य खुम्बी (संस्कृत नाम – भूमिकन्दक; हिन्दी नाम – कुकुरमुत्ता, छत्रक, अंग्रेजी – मशरूम) शाकाहारी या मांसाहारी प्रत्येक वर्गके लोगोंके लिए भोजनका एक शाकाहारी विकल्प है और हो भी क्‍यों न ?, क्योंकि इसमें ऐसे पोषक तत्व उपस्थित होते हैं, जो शरीरके लिए अति आवश्यक होते हैं । वैज्ञानिकोंका मानना है कि यह एक जैविक प्रकारकी कृषि उत्पाद है और इसमें अधिक मात्रामें ‘प्रोटीन’ और ‘विटामिन’ होते हैं । यह कुकुरमुत्ता प्रजातिकी है, कुकुरमुत्ता एक मृतोपजीवी जीव है, जो हरित लवकके अभावके कारण अपना भोजन स्वयं संश्लेषित नहीं कर सकता है । इसका शरीर थैलसनुमा होता है, जिसको मूल (जड), तना और पत्तीमें नहीं विभाजित किया जा सकता है । खाने योग्य कुकुरमुत्तोंको ‘खुम्बी’ कहा जाता है ।
घटक – खाद्य खुम्बी (मशरूम) पौष्टिक होते हैं, इनमें ‘प्रोटीन’, रेशा व ‘फोलिक अम्ल’ होते हैं, जो सामान्तया अन्य शाक, खाद्यान्न व ‘अमीनो एसिड’में नहीं होते हैं ।
इनके अतिरिक्त इसमें ‘विटामिन -डी, बी-६, सी’, ‘थायमिन’, ‘मैग्नीशियम’, ‘राइबोफ्लेविन’, ‘नियासिन’, लौह तत्व, ‘फॉस्फोरस’, ‘पोटैशियम’, ‘जिंक’, तांबा, ‘सिलेनियम’ आदि प्रचुर मात्रामें मिलते हैं । इसमें घुलनशील ‘बीटा ग्‍लूकेन्‍स’ भी होते हैं, जो हमारे स्‍वास्‍थ्‍यके लिए लाभप्रद होते हैं ।
सेवन विधि – खाद्य खुम्बीका प्रयोग मुख्यतः शाक (सब्जी) बनानेमें होता है । इसका शाक भिन्न-भिन्न प्रकारसे बनाया जा सकता है । इसके अतिरिक्त इनका अचार व सूप भी बनाकर सेवन किया जा सकता है ।
आइए, खाद्य खुम्बीके लाभोंके विषयमें जानते हैं –
* रक्तवसा (कोलेस्ट्रॉल) – मशरूम शरीरका भार न्यून करनेमें सहायक होता है; क्‍योंकि इसमें ‘प्रोटीन’ तो प्रचुर मात्रामें होता है; परन्तु वसा और ‘कार्बोहाइड्रेट’ अल्प मात्रामें होते हैं । इसमें ‘फाइबर’ और कुछ किण्वक (एंजाइम) भी होते हैं, जो रक्तवसाको न्यून करनेमें सहायक होते हैं । यह ‘एलडीएल’ (खराब कोलेस्‍ट्रॉल) और ‘एचडीएल’के (अच्‍छे कोलेस्‍ट्रॉलके) मध्य सन्तुलन बनाकर हृदय सम्बन्धी रोग, जैसे हृदयाघातमें लाभप्रद है ।
* रक्त अल्पता (एनीमिया) – ‘एनीमिया’ रोग रक्तमें लौहतत्वकी न्यूनताके कारण होता है, जिसके फलस्‍वरूप थकान, सिरमें वेदना, अल्प स्नायुतन्त्र कार्यप्रणाली और पाचन सम्बन्धी समस्‍याएं होती हैं । खुम्बीमें सामान्‍यता ८०-९० प्रतिशत लोहा मिलता है, जिसे हमारा शरीर लगभग सम्पूर्ण अवशोषित कर सकता है, जिसके कारण  शरीरमें लाल रक्‍त कोशिकाओंके निर्माणको बढावा मिलता है और रक्त अल्पता दूर होती है, साथ ही, प्रतिरोधक क्षमताका विकास होता है ।
* कर्करोगमें – इसमें ‘बीटा-ग्‍लूकेन्‍स’ और संयुग्मित ‘लिनोलिक अम्ल’ उपस्थित होता है, जिसके कारण स्‍तन और ‘प्रोस्‍टेट’ दोनों प्रकारके कर्करोगको रोकनेमें यह अत्यधिक प्रभावी होता है । ‘लिनोनिक अम्ल’, विशेष रूपसे ‘एस्‍ट्रोजन’के हानिकारक प्रभावोंको दबानेमें सहायक है, वहीं ‘बीटा-ग्‍लूकेन्‍स’, ‘पोस्‍टेट कर्करोग’की कोशिकाओंके विकासको रोकते हैं । खुम्बी आक्सीकरण-रोधी गुणोंमें (एंटी-ऑक्‍सीडेंट्समें) समृद्ध है, जो शरीरमें हानिकारक मुक्त कणोंसे लडते हैं । यदि इनपर नियन्त्रण नहीं किया जाता है तो ये मुक्‍त होकर शरीरको हानि पहुंचाते हैं, जो अन्तत: कर्करोगका रूप ले लेता है ।  ‘सेलेनियम’ एक खनिज है, जो मशरूममें पाया जाता है, जो यकृत किण्वकोंके (एंजाइम्‍सके) कार्यमें सहायता करता है, इसप्रकार खुम्बी शरीरमें कर्करोगके कारकोंको दूर करनेमें सहायक है ।
* मधुमेह – खाद्य खुम्बीको मधुमेहके लिए एक उत्तम और प्रभावशाली औषधिके रूपमें प्रयोग किया जा सकता है । मशरूममें कोई वसा, रक्तवसा नहीं होती, इसमें ‘कार्बोहाइड्रेट’की मात्रा अत्यल्प होती है, ‘विटामिन’ और ‘प्रोटीन’ प्रचुर मात्रामें होते हैं । यह एक अच्‍छा ‘इंसुलिन’ और ‘एंजाइम’ धारक होता है, जो भोजनसे ‘स्‍टार्च’ और शर्कराको तोडनेमें सहायक हैं । वे कुछ यौगिकोंको सम्मिलित करनेके लिए भी उपयोग किए जाते हैं, जो यकृत, अग्‍न्‍याशय और अन्‍य अन्त:स्रावी ग्रन्थियोंकी उचित कार्यशैलीमें सहायता करते हैं, जिससे शरीरके ‘इंसुलिन’ और उसके उचित विनियमनका निर्माण होता है । इसके प्राकृतिक जीवाणुरोधी (एंटीबायोटिक) गुणोंसे मधुमेह रोगियोंको सहायता मिलती है ।
* प्रतिरक्षा प्रणालीके लिए  – मशरूममें विद्यमान एक शक्तिशाली आक्सीकरण-रोधी (एंटी-ऑक्‍सीडेंट) ‘एर्गोथियोनिन’ बाहरी संक्रमणोंसे सुरक्षा प्रदान करनेके साथ ही प्रतिरक्षा प्रणालीको बढानेमें अत्यधिक प्रभावी होता है । वास्‍तवमें यह एक ‘एमिनो अम्ल’ होता है जिसमें ‘सल्‍फर’ होता है, जो सामान्यतया शरीरमें अल्प होता है । खुम्बीमें उपस्थित आक्सीकरण-रोधी (एंटी-ऑक्‍सीडेंट) प्रतिरक्षा प्रणालीको बढानेके लिए अद्वितीय माना जाता है । इसमें प्राकृतिक जीवाणुनाशक होते हैं, जो सूक्ष्मजीव (माइक्रोबियल) विकास और अन्‍य कवक संक्रमणोंको रोकते हैं, ये ‘पॉलिसेकेराइड’, ‘बीटा-ग्‍लूकेन्‍सश’ शरीरकी प्रतिरक्षा प्रणालीको उत्तेजित और नियन्त्रित कर सकते हैं और ‘अल्‍सर’ और ‘अल्‍सर’के घावोंको ठीक कर सकते हैं ।
कल हम खुम्बीसे (मशरूमसे) होनेवाले कुछ अन्य लाभों व प्रयोगमें सावधानियोंके विषयमें जानेंगें ।



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