अध्यात्म एवं साधना

शास्त्र वचनोंमें सकाम और निष्काम साधनाका महत्त्व


त्रैविद्या मां सोमपाः पूतपापायज्ञैरिष्ट्वो स्वर्गतिं प्रार्थयन्ते ।
ते पुण्यमासाद्य सुरेन्द्रलोकमश्नन्ति दिव्यान्दिवि देवभोगान्‌ ॥ – श्रीमद्भागवद्गीता (९:२०)
अर्थ : तीनों वेदोंमें विधानकिए…….

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साधको, दूसरोंका विचार करना साधना है


१. साधको, आप जब कुछ दिवसके लिए आश्रममें आते हैं या आश्रमसे जानेका नियोजन करते हैं और आपके पास पर्याय हो तो मध्य रात्रि या प्रातः तीन या चार बजेके वायुयान, रेलयान या बसयानसे यात्रा करना टालें ! यह इसलिए कहा जा रहा है; क्योंकि मैंने देखा है कि आज अधिकांश लोगोंमें दूसरोंका विचार करना, […]

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अहंकारी किसीकी शरणमें रहकर साधना नहीं कर सकता है !


एक बार मेरे एक परिचितने जो मुझसे आयुमें दस वर्ष बडे थे, अकस्मात मुझसे मिले और मिलते ही मुझे झुककर चरण स्पर्श किया, मैं इसके लिए तैयार नहीं थी और इसकी कल्पना भी नहीं कर सकती थी और उनके उस वर्तनसे मुझे बहुत आश्चर्य हुआ, मैंने उनसे कहा, “आप मुझसे आयुमें बडे हैं, आपको इसप्रकार […]

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साधक सीखनेकी वृत्ति निर्माण करें !


जब भी हम कोई नूतन सेवा करते हैं तो हमसे चूकें होती हैं, इसके पीछे उस सेवाके प्रति अनभिज्ञता एवं हमारे दोष उत्तरदाई होते हैं । कुछ साधक सेवा इसलिए नहीं करना चाहते हैं; क्योंकि उनसे चूकें होंगी और उनकी चूकें या तो उन्हें स्वयं बतानी पडेगी या उन्हें बताया जाएगा । (हमारे श्रीगुरुने हमें […]

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ब्रह्मचर्य-आश्रम क्या है ?


ब्रह्मचर्यका अर्थ होता है ब्रह्मको चरना या ब्रह्मकी चर्चा व चर्चामें ही रत रहना । दूसरा अर्थ जो प्रचलित है वह है इंद्रियोंका संयम रखना । विद्यार्थी और संन्यासीका यह कर्तव्य…..

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जीवनमें सदैव धर्म और अध्यात्मको प्राथमिकता दें !


जो लोग अपने जीवनमें धर्म और अध्यात्मको प्राथमिकता नहीं देते हैं, जब उनके जीवनमें विषम परिस्थितियां आती हैं तो ईश्वर भी उनकी सहायता नहीं करते हैं ! सामान्य लोगोंके जीवनमें कष्ट उनके इस जन्म या किसी और जन्मके अधर्मका परिणाम होता है, उसका फल सृष्टिके कर्मफल सिद्धांत अनुसार भोगना ही पडता है, उस नियमको बनानेवाले […]

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साधना हेतु पुरुषार्थ ही योग्य पुरुषार्थ होता है !


कुछ लोगोंको लगता है कि उन्होंने जो धन कमाए हैं वह उनके पुरुषार्थके कारण है ! धनका योग प्रारब्धके अनुसार सहज प्राप्त होता है ! यदि वह क्रियामाणसे प्राप्त होता तो एक ही माता-पिताद्वारा संस्कारित या सुशिक्षित सन्तानें जो एक समान क्रियामाणसे प्रयास करते हैं, वे एक समान धनी होते; किन्तु ऐसा होता नहीं है, […]

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आश्रम व्यवस्था (भाग – ३)


आश्रमव्यवस्थाका जहां शारीरिक और सामाजिक आधार है, वहीं उसका आध्यात्मिक अथवा दार्शनिक आधार भी है । भारतीय मनीषियोंने मानव जीवनको केवल प्रवाह न मानकर……

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मांसाहार क्यों न करें ? (भाग – १२)


मांसाहारसे मांसकी वृद्धिको वैज्ञानिकोंने कर्करोग जैसी व्याधियोंमें ट्यूमरकी वृद्धिके साथ सम्बंधित होनेके प्रमाण पाए हैं I वैज्ञानिकोंके मध्य आहार एवं कर्करोगके मध्यके संबंधको….

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प्रार्थना – भावजागृतिका एक महत्त्वपूर्ण घटक (भाग – १८)


हे प्रभु, अभी मैं पूजा करने जा रहा हूं, पूजा पूर्व आप हमारे पूजा-घर, हमारे वास्तु एवं हमारे चारों ओर अभेद्य सुरक्षा कवच निर्माण करें, जिससे मेरी पूजा निर्विघ्न एवं एकाग्रतापूर्वक हो सके । मेरी आजकी पूजा एवं आरती आपके….

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