अध्यात्म एवं साधना

पुत्र या अपने वंशजोंपर मृत्यु उपरान्त सद्गति हेतु न रखें अधिक विश्वास, अपने कल्याण हेतु करें योग्य साधना


शास्त्र है यदि किसीकी मृत्यु हो गई और उस सद्गति मिल गई; किन्तु वह व्यक्ति जीवन्मुक्त नहीं हुआ अर्थात ६१% आध्यात्मिक स्तर नहीं हुआ तो आपको उसके पुण्य अनुसार कोई लोक प्राप्त होता है या वह जीवात्मा पितरलोकमें प्रतीक्षारत रहता है; किन्तु यदि उसके पुत्रने तीन वर्ष सतत आपके लिए श्राद्ध नहीं किए तो आपको […]

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कोरोना सम्बन्धी संक्रमणके विषयमें कुछ जिज्ञासुओं, कार्यकर्ताओं व साधकोंकी अनुभुतियां


कोरोना संक्रमणके कालमें उपासनासे जुडे हुए कुछ सदस्योंको कोरोना संक्रमण हो गया । ऐसेमें कुछ सदस्य तो अच्छेसे साधना पहलेसे ही करते थे एवं कुछ नूतन जुडे हुए थे, उन्हें कोरोना संक्रमण होनेपर, कुछ आध्यात्मिक उपचार बताए गए, जिससे उन्हें अप्रत्याशित लाभ हुआ, यह लेखमाला उसी सम्बन्धमें है – जनपद गाजियाबादके श्री. मृत्युन्जय सिन्हाकी अनुभूति […]

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पाकिस्तानका क्षुद्र कृत्य, हिन्दुओंके लिए निकाली स्वच्छता कर्मचारी और भृत्यकी (चपरासीकी) नियुक्ति 


२६ मई, २०२१      पाकिस्तान अपने आतङ्कवादी जिहादके लिए विश्व विख्यात है और समय-समयपर इसका भी परिचय देता रहता है । अब पाकिस्तानने एक नूतन विवाद आरम्भ कर दिया है, पाकिस्तानमें हिन्दुओंको स्वच्छता कर्मचारी और ‘चपरासी’की नियुक्तिका विज्ञापन प्रकाशित हुआ है, जिसके उपरान्त विश्वके हिन्दू भडक गए हैं । पाकिस्तानके इस निर्णयने एक बार […]

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अपने युवा होते बच्चोंको साधना हेतु क्यों प्रवृत्त करें ? (भाग-१)


अपने युवा होते बच्चोंको साधना हेतु अवश्य ही प्रवृत्त करें, इससे आपको और उन्हें दोनोंको ही अनेक लाभ होंगे । आपको ये सभी लाभ समझमें आएं और आप अपने युवा बच्चोंको साधना हेतु प्रवृत्त करें; इसीलिए यह लेखमाला आपसे साझा कर रही हूं । साधनासे जीवनको मिलती है योग्य दिशा मैंने धर्मप्रसारके मध्य अनेक घरोंमें […]

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साधको, यदि साधना सम्बन्धी एक ही बातको बार-बार बतानेपर आप उसे नहीं करते हैं तो समझ लें कि आपमें साधकत्व नहीं है ।


साधको, यदि साधना सम्बन्धी एक ही बातको बार-बार बतानेपर आप उसे नहीं करते हैं तो समझ लें कि आपमें साधकत्व नहीं है । साधकत्व और गुरुकृपा या ईश्वरीय कृपाका सीधा सम्बन्ध होता है । इसलिए स्वयंके भीतर साधकत्व निर्माण करने हेतु प्रयत्नशील हों अन्यथा आनेवाले आपतकालमें आपको पछताना पडेगा और अब आपातकालकी तीव्रता बढनेमें समय […]

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शाश्वत पदकी प्राप्ति हेतु करें साधना !


आध्यात्मिक दृष्टिकोणके अभावमें हम मायाके पद-प्रतिष्ठा, धन-दौलतमें फंसे रहते हैं, इस विश्वमें प्रत्येक वर्ष अनेक लोग मायाके ऊंचे पदको प्राप्त करते हैं एवं कुछ समय पश्चात सेवा निवृत्त होते हैं, जिसके पश्चात उनका महत्त्व भी घट जाता है; परन्तु चिरन्तन यश तो मात्र खरे भक्तोंको और सन्तोंको प्राप्त होता है । आकाशमें ध्रुव तारा, इस […]

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साधक अहं निर्मूलन क्यों करें ? (भाग-१)


अपनी आध्यात्मिक यात्राके मध्य मैंने अहंके कारण साधकोंको कष्ट होते या अटकते हुए देखा है । कुछ साधकोंको बार-बार बतानेपर भी वे अपने अहंको कम करनेका प्रयास नहीं करते हैं; इसलिए सोचा कि अपने अनुभूत किए हुए कुछ तथ्योंको साझा करती हूं । हो सकता है इससे उन्हें ज्ञात हो कि अहं निर्मूलन करना क्यों […]

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स्वस्थ रहने हेतु कुछ महत्त्वपूर्ण सूत्र (भाग-८)


प्रातः मुखधावन करनेके पश्चात मुखमें ठण्डे जलको भरकर नेत्रोंमें शीतल जलके छीटें मारनेसे नेत्रकी ज्योति बनी रहती है । उदित एवं अस्त होते हुए सूर्यकी लाल किरणोंको देखनेसे भी नेत्र ज्योति बनी रहती है । मल-मूत्र त्याग करते समय अपनी दांतोंको भींचकर नित्य क्रिया करनेसे दांत स्वस्थ रहते हैं । भोजन करनेके पश्चात या कुछ […]

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खरा साधक कौन ?


एकान्तमें नेत्र बन्दकर ध्यान करते हुए इन्द्रिय निग्रह करना सरल है, खरा योगी वह है जो इस संसारमें विचरते हुए खुले नेत्रोंसे अपनी इन्द्रियोंका निग्रह कर सके ! कीचडमें रहकर भी, जो कीचडमें न सन पाए ऐसा कमल समान अनासक्त साधक जीव ही, जितेन्द्रिय एवं योगी कहलानेका अधिकारी होता है ।

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साधको, जब सन्त कुछ आज्ञा दें तो उसे प्राथमिकतासे पूर्ण करनेका प्रयास करें !


साधको, जब सन्त कुछ आज्ञा दें या आदेश दें तो उसे प्राथमिकतासे पूर्ण करनेपर उस आज्ञामें निहित सन्तके सङ्कल्पके कारण, उस कृत्यको करने हेतु हमें शक्ति एवं ज्ञान स्वतः ही प्राप्त होते हैं । आज्ञापालन करनेके कारण मनोलय होता है एवं गुरुकृपा मिलती है । जब सन्त कुछ करने हेतु कहते हैं, तो हो सकता […]

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