अध्यात्म एवं साधना

ज्योतिष विज्ञानके अनुपालन हेतु साधना आवश्यक !

दो दिवस पूर्वके एक लेखके सन्दर्भमें एक ज्योतिषीने पूछा है कि आपने जो लिखा वह सत्य है, मैं पहले अपने दुखोंके निराकरण हेतु ज्योतिषियोंके पास जाता था एवं उनके बताये हुए कुछ उपाय करनेपर मेरे कष्ट न्यून हुआ और मैं इसी कारण इस शास्त्रकी ओर आकृष्ट हुआ और आज यह मेरे जीविकोपार्जनका माध्यम है और आपके लेखको पढकर मैं अपनी स्थितिको आपके कथन अनुरूप ही पा रहा हूं; किन्तु मैं अब यह व्यवसाय नहीं छोड सकता हूं, कृपया बताएं मैं क्या कर सकता हूं ?


दो दिवस पूर्वके एक लेखके सन्दर्भमें एक ज्योतिषीने पूछा है कि आपने जो लिखा वह सत्य है, मैं पहले अपने दुखोंके निराकरण हेतु ज्योतिषियोंके पास जाता था एवं उनके बताये हुए कुछ उपाय करनेपर मेरे कष्ट न्यून हुआ और मैं इसी…..

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ज्योतिष विद्या अर्जित करने हेतु साधना आवश्यक !


आजकल अनेक लोग ज्योतिषी बन जाते हैं । इसमें अधिकांश तो पहले अपने दुखोंका कारण जानने हेतु ज्योतिषियोंके चक्कर काटते हैं और यदि उन्हें कोई समाधान मिल जाता….

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प्रार्थना – भावजागृतिका एक महत्त्वपूर्ण घटक (भाग – १६)


भावजागृति करने हेतु ‘सत’के वातावरणमें रहना चाहिए अर्थात हमारा प्रत्येक कर्म सात्त्विक हो, हमारी वृत्ति सात्त्विक हो, धर्म अधिष्ठित हो, इस हेतु कष्ट उठानेकी वृत्ति निर्माण करनी…..

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प्रार्थना – भावजागृतिका एक महत्त्वपूर्ण घटक (भाग – १५)


जिस आराध्य देवताका हम मन्त्र या नाम जपते हैं, उनकी विशेषताओं, कार्य एवं लीलाओंका भी अभ्यास करना चाहिए, इससे आराध्यके प्रति प्रेम और आदर भाव निर्माण होता है….

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प्रार्थना – भावजागृतिका एक महत्त्वपूर्ण घटक (भाग – १४)


नामजप करते समय हमारा भाव कैसे होना चाहिए ?, जिससे वह ईश्वर चरणोंतक पहुंचे, इसके विषयमें अब हमने पूर्वके लेखोंमें कुछ तथ्य जाने थे, इसी क्रममें कुछ और तथ्य जानेंगे । यह भी आपको क्यों बता रहे हैं ?; क्योंकि अनेक…..

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‘उपासना’की एक और विदेशमें रहनेवाली साधिका हुई जीवनमुक्त !


जब मुझे मेरे श्रीगुरुने अप्रैल २००८ में घर जाकर साधना करनेकी आज्ञा दी तो एक प्रकारसे मैं अत्यधिक प्रसन्न थी; क्योंकि बाल्यकालसे मेरी वृत्ति अन्तर्मुखी है, समष्टि कार्य हेतु वृत्तिको बहिर्मुख…..

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प्रार्थना – भावजागृतिका एक महत्त्वपूर्ण घटक (भाग – १३)


धनलालसासे जिसप्रकार धनवानकी स्तुति (इन्सान) करता है, वैसे यदि विश्वकर्तासे (भगवानसे)  प्रार्थना करे, तो कौन बंधन मुक्त न हो ? अर्थात अध्यात्ममें सब कुछ…..

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मांसाहार क्यों न करें ? (भाग – ९)


अमेरिकाके डॉ. इ बी.एमारी तथा इंग्लैंडके डॉ. इन्हाने अपनी विश्व विख्यात पुस्तकों ‘पोषणका नवीनतम ज्ञान’ और ‘रोगियोंकी प्रकृति’में स्पष्ट रूपसे माना हैं कि अण्डा मनुष्यके लिए विष है ……..

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मांसाहार क्यों न करें ? (भाग – ८)


हमारे द्रष्टा सन्तोंने तो अपनी सूक्ष्म इन्द्रियोंकी सहायतासे मांसाहारके कारण होनेवाले मात्र शारीरिक ही नहीं अपितु मानसिक और आध्यात्मिक, तीनों ही स्तरके हानिको सत्त्व, रज और तमके सूत्रोंमें लाखों वर्ष पूर्व ही बता दिया था; किन्तु अब तो पाश्चात्य देश, जहां वे दिवसका प्रथम आहार भी मांसाहारसे आरम्भ करते हैं, वे भी अपने आधुनिक वैज्ञानिक […]

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मांसाहार क्यों न करें ? (भाग – ७)


पेड-पौधे, मिट्टी, प्रकाश और हवासे अपना भोजन आप ही बना लेते हैं; परन्तु पशु और मनुष्य अपना भोजन हेतु या जीवित रहने हेतु वनस्पति या दूसरे जीव-जंतुओंपर निर्भर रहते हैं । प्रकृतिने दो प्रकारके पशु बनाए हैं, शाकाहारी और मांसाहारी…..

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