आहारदोष साधक जब साधना पथपर अग्रसर होता है तो अनके बार उसे अपेक्षित यश नहीं मिलता है, उसके पीछे अनेक कारण होते हैं । साधकको उन अवरोधोंको दूर करनेका प्रयास करना चाहिए ! तो आजसे हम ऐसे ही कुछ अवरोधोंके विषयमें जानेंगे ! ऐसा कहा गया है, ‘जैसा खाए अन्न, […]
ईर्ष्यालु व्यक्तिका अहं अधिक होता है । अर्थात यदि आपमें भी यह अवगुण है तो आपका भी अहं अधिक है यह समझ लें और सतर्क होकर इस घातक अहंके लक्षणको दूर करें ! यह अवगुण घातक इसलिए होता है; क्योंकि इसके प्रबल होनेपर मनुष्यकी बुद्धि भ्रष्ट होकर उससे अपराध भी हो सकते हैं । हमारे धर्मग्रन्थोंमें ……
अहम् निर्मूलनकी प्रक्रिया भी दोषनिर्मूलनकी प्रक्रियाके समान ही होती है । जैसे दोषनिर्मूलन हेतु हमें अपनी चूकें एवं उसके उत्तरदायी दोषको लिखकर उसे दूर करने हेतु स्वयंसूचना देना होती है, वैसे ही अहंके भी कुछ लक्ष्ण होते हैं । उन लक्षणोंके अनुरूप जब भी हमसे अयोग्य वर्तन होता है, उसे अपनी अहम् निर्मूलन …..
साधको, सत्सेवा मिले तो सौभाग्य व कृतज्ञताके भावसे, यह सेवा ‘परिपूर्ण सेवा हो’, इस भावसे करनेका प्रयास करें, इसे बोझ न समझें ! बोझ या कार्य समझकर करनेवालोंसे ईश्वर अधिक समय सेवा नहीं कराते हैं । – (पू.) तनुजा ठाकुर
वर्तमान कालमें सामान्य व्यक्तिपर रज-तमका आवरण इतना अधिक हो गया है कि सत्सेवा अर्थात ईश्वरप्राप्तिका माध्यम है; इसलिए उसे ‘सत्यम शिवम् और सुन्दरम’के सिद्धान्त अनुसार करना चाहिए, यह साधकोंको बार-बार सिखानेके ……
मैं पिछले कुछ वर्षोंसे आपके बताए अनुसार प्रतिदिन बैठकर नामजप करनेका प्रयास करता हूं | विगत कुछ दिवसोंसे जब भी मैं नेत्र खोल कर नामजप करता हूं तो मेरा ध्यान भटक जाता है एवं आंखें बंद कर करता हूं तब नामजप अच्छेसे होता है; परन्तु नींदका झोंका लग जाता है; साथ ही मुझे यह भान होता है कि मुझसे नींदमें भी नामजप हो रहा है । ऐसेमें मैंने क्या करना चाहिए, कृपया मार्गदशन करें ? - एक साधक, देहली
वर्तमान कालमें सर्वत्र रज-तमका प्रकोप अत्यधिक बढ गया है; इसलिए सबको नामजप नेत्र खोलकर करने हेतु कहा गया है ! यह सत्य है कि जिसका अध्यात्मिक स्तर ५० % से अधिक होता है, उन्हें नेत्र बंदकर नामजप करनेमें बहुत अधिक आनंद …..