अध्यात्म एवं साधना

नामजपकी परिणामकारकताको कैसे बढायें ? (भाग -२)


प्रारम्भिक अवस्थाके साधक यदि नामजप ब्राह्म मुहूर्तके कालमें (सूर्योदयसे ७२ मिनिट पूर्व) करें तो उसे नामजपका अधिक लाभ मिलता है; क्योंकि इस कालमें वातावरणमें अधिक चैतन्य……

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धर्मधारा – सकामसे निष्काम साधनाकी ओर!


सकाम साधना करनेवाले ८० % भक्त कुछ समय उपरान्त साधना करना छोड देते हैं ; क्योंकि कुछ लोगोंकी कामना पूर्ण हो जाती हैं इसलिए वे साधना छोड देते हैं तो कुछ लोगोंकी कामना पूर्ण नहीं होती है और उनमें धैर्य नहीं होता; इसलिए उनमें साधनाके प्रति विकल्प निर्माण हो जाता है और वे साधना छोड […]

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नामजपकी परिणामकारकता कैसे बढायें ? (भाग -१)


प्रतिदिन कमसे कम एक घंटे बैठकर नामजप अवश्य करें । यदि एक ही सत्रमें एक घंटे आप नहीं बैठ सकते हैं तो दो या तीन सत्रमें बैठकर नामजप करनेका……

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बुद्धि आध्यात्मिक प्रगतिके लिए पोषक कब होती है ?!


बुद्धिका होना आध्यात्मिक प्रगतिके लिए तभी पोषक होता है जब उसका अध्यात्मविद या गुरुकी आज्ञाका पालन करने हेतु उपयोग किया जाए | अधिकांश बुद्धिवादियोंमें यह गुण नहीं होता; इसलिए बुद्धि उनकी आध्यात्मिक प्रगतिमें बाधा बन जाती है ! यह न हो; इसलिए अध्यात्ममें हमसे जो आगे हैं उनकी आज्ञा पालन करनेका प्रयास करना चाहिए !

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शास्त्र वचनोंमें सकाम और निष्काम साधनाका महत्त्व


त्रैविद्या मां सोमपाः पूतपापायज्ञैरिष्ट्वो स्वर्गतिं प्रार्थयन्ते ।
ते पुण्यमासाद्य सुरेन्द्रलोकमश्नन्ति दिव्यान्दिवि देवभोगान्‌ ॥ – श्रीमद्भागवद्गीता (९:२०)
अर्थ : तीनों वेदोंमें विधानकिए…….

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साधको, दूसरोंका विचार करना साधना है


१. साधको, आप जब कुछ दिवसके लिए आश्रममें आते हैं या आश्रमसे जानेका नियोजन करते हैं और आपके पास पर्याय हो तो मध्य रात्रि या प्रातः तीन या चार बजेके वायुयान, रेलयान या बसयानसे यात्रा करना टालें ! यह इसलिए कहा जा रहा है; क्योंकि मैंने देखा है कि आज अधिकांश लोगोंमें दूसरोंका विचार करना, […]

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अहंकारी किसीकी शरणमें रहकर साधना नहीं कर सकता है !


एक बार मेरे एक परिचितने, जो मुझसे आयुमें दस वर्ष बडे थे, अकस्मात मुझसे मिले और मिलते ही मुझे झुककर चरण स्पर्श किया, मैं इसके लिए तैयार नहीं थी और इसकी कल्पना भी नहीं कर सकती थी, और उनके उस वर्तनसे मुझे बहुत आश्चर्य हुआ, मैंने उनसे कहा, “आप मुझसे आयुमें बडे हैं, आपको इसप्रकार […]

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साधक सीखनेकी वृत्ति निर्माण करें !


जब भी हम कोई नूतन सेवा करते हैं तो हमसे चूकें होती हैं, इसके पीछे उस सेवाके प्रति अनभिज्ञता एवं हमारे दोष उत्तरदाई होते हैं । कुछ साधक सेवा इसलिए नहीं करना चाहते हैं; क्योंकि उनसे चूकें होंगी और उनकी चूकें या तो उन्हें स्वयं बतानी पडेगी या उन्हें बताया जाएगा । (हमारे श्रीगुरुने हमें […]

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ब्रह्मचर्य-आश्रम क्या है ?


ब्रह्मचर्यका अर्थ होता है ब्रह्मको चरना या ब्रह्मकी चर्चा व चर्चामें ही रत रहना । दूसरा अर्थ जो प्रचलित है वह है इंद्रियोंका संयम रखना । विद्यार्थी और संन्यासीका यह कर्तव्य…..

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जीवनमें सदैव धर्म और अध्यात्मको प्राथमिकता दें !


जो लोग अपने जीवनमें धर्म और अध्यात्मको प्राथमिकता नहीं देते हैं, जब उनके जीवनमें विषम परिस्थितियां आती हैं तो ईश्वर भी उनकी सहायता नहीं करते हैं ! सामान्य लोगोंके जीवनमें कष्ट उनके इस जन्म या किसी और जन्मके अधर्मका परिणाम होता है, उसका फल सृष्टिके कर्मफल सिद्धांत अनुसार भोगना ही पडता है, उस नियमको बनानेवाले […]

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