स्वस्थ रहने हेतु कुछ महत्त्वपूर्ण सूत्र (भाग-८)


  • प्रातः मुखधावन करनेके पश्चात मुखमें ठण्डे जलको भरकर नेत्रोंमें शीतल जलके छीटें मारनेसे नेत्रकी ज्योति बनी रहती है । उदित एवं अस्त होते हुए सूर्यकी लाल किरणोंको देखनेसे भी नेत्र ज्योति बनी रहती है ।
  • मल-मूत्र त्याग करते समय अपनी दांतोंको भींचकर नित्य क्रिया करनेसे दांत स्वस्थ रहते हैं । भोजन करनेके पश्चात या कुछ भी खानेके पश्चात ११ बार कुल्ला करनेसे दांतमें फंसे कण बाहर निकल जाते हैं । मुखसे दुर्गन्ध आनेका अर्थ है कि आपका पाचन व उत्सर्जन क्रियाएं सुचारू रूपसे नहीं चल रही हैं । इस हेतु आप पूर्वमें बताए गए सर्व तथ्योंका अभ्यासकर योग्य उपाय करें । मुखमें लौंग रखनेसे भी इसमें लाभ होता है ।


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