कलियुगमें कर्मकाण्डकी अपेक्षा उपासनाकाण्डको अधिक महत्त्व क्यों है, इसका एक उदाहरण !


तीन-चार माह पूर्व मैंने हवनके लिए एक सुप्रसिद्ध पूजन सामग्री भण्डारसे लकडी क्रय की थी; क्योंकि वर्षाके कारण आसपासकी लकडियां गीली थीं ।
मैंने उनसे आमकी लकडी मांगी थी । कल उन लकडियोंको जब एक ग्रामीण श्रमिकको धूप लगाने हेतु बोला तो उसने कहा कि यह तो महुआकी लकडी है, अपने आश्रममें ही तो है यह वृक्ष, आपने बाहरसे क्यों क्रय किया ?
मुझे सुनकर थोडा क्षोभ हुआ और ज्ञात हुआ कि हमारे ऋषियोंने कलियुगमें कर्मकाण्डकी अपेक्षा उपासनाकाण्डको अधिक महत्त्व क्यों दिया है ?


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution