अहं निर्मूलन (भाग-६)


द्वेष करना
ईर्ष्यालु व्यक्तिका अहं अधिक होता है । अर्थात यदि आपमें भी यह अवगुण है तो आपका भी अहं अधिक है यह समझ लें और सतर्क होकर इस घातक अहंके लक्षणको दूर करें ! यह अवगुण घातक इसलिए होता है; क्योंकि इसके प्रबल होनेपर मनुष्यकी बुद्धि भ्रष्ट होकर उससे अपराध भी हो सकते हैं । हमारे धर्मग्रन्थोंमें जो इतिहास संरक्षित है उसमें ऐसे अनेक प्रसंग हैं जो इस अवगुणके कारण मनुष्यका क्या-क्या पतन हुआ ?, यह दर्शाते हैं । ईर्ष्यालु व्यक्तिमें जब यह अवगुण प्रबल हो जाता है तो वह अपने निकटके परिजनका भी सुख या प्रगति सहन नहीं कर पाता है ।
    वस्तुत: ईर्ष्याके साथ अनेक दुर्गुण स्वतः ही उभर आते हैं; इसलिए जब भी किसीके प्रति इर्ष्या हो तो अन्तर्मुख होकर इस दोषको कम करने हेतु प्रयास करना चाहिए ! सभी व्यक्तियोंको ईश्वर, उसके पूर्व जन्मोंके कर्म एवं इस जन्मके प्रयास अनुरूप फल देते हैं । इसलिए ईर्ष्या करनेके स्थानपर अपने प्रयास बढाने चाहिए । अधिकांश ईर्ष्यालु लोगोंमें धैर्य और सन्तोष नहीं होता है, उन्हें जो मिला है उसके प्रति कृतज्ञताका भाव नहीं होता है या बहुत न्यून होता है; इसलिए ऐसा होता है । ईर्ष्या करनेसे किसीको कुछ अधिक नहीं मिलता है; अपितु उसका सूक्ष्म आवरण अवश्य ही काला हो जाता है । इसलिए साधक प्रवृत्तिके लोगोंके मनमें यदि किसी भी व्यक्तिके प्रप्ति ईर्ष्या हो तो उन्होंने सर्वप्रथम उन्हें जो भगवान या गुरुने दिया है उसके लिए कृतज्ञता व्यक्त करना चाहिए एवं ईर्ष्याके दोष दूर करने हेतु प्रार्थना करते हुए स्वयंसूचना देना चाहिए । प्रार्थना कुछ इस प्रकार करना चाहिए, “हे प्रभु मेरे मनमें अमुक-अमुकके (व्यक्तिका नाम बोलें) लिए द्वेषके विचार आ रहे हैं, इन विचारोंसे मेरा मन अशुद्ध हो रहा है, आप ही मुझपर कृपा करें और मैं उनकी प्रगति या सुखको स्वीकारकर उनसे निष्पक्ष व सरल भावसे प्रेम कर सकूं, ऐसी आप कृपा करें !” ऐसी प्रार्थना बार-बार करनेसे निश्चित ही आपपर ईश्वर या गुरुकी कृपा होगी और साथ ही जब भी ऐसे विचार आएं तो इससे पहले कि ऐसे अशुद्ध विचारके कारण आपसे कोई चूक या अपराध हो जाए आप स्वयंसूचना देना भी आरम्भ करें ! मैंने कई बार प्रगत अवस्थाके साधकोंमें भी यह दुर्गुण देखा है एवं इस कारण उनपर गुरुकृपाको अवरुद्ध होते देखा है । ईर्ष्याको घटानेका एक और उपाय है अपने प्रेम बढाएं ! एक मां अपने बच्चोंसे कभी भी ईर्ष्या नहीं करती है; इसलिए अपने भीतर प्रेम बढाएं !


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