अहम् निर्मूलन (भाग-२)


अहम् निर्मूलनकी प्रक्रिया भी दोषनिर्मूलनकी प्रक्रियाके समान ही होती है । जैसे दोषनिर्मूलन हेतु हमें अपनी चूकें एवं उसके उत्तरदायी दोषको लिखकर उसे दूर करने हेतु स्वयंसूचना देना होती है, वैसे ही अहंके भी कुछ लक्ष्ण होते हैं । उन लक्षणोंके अनुरूप जब भी हमसे अयोग्य वर्तन होता है, उसे अपनी अहम् निर्मूलन बहीमें लिखना चाहिए और उसके साथ ही योग्य कृति क्या होना चाहिए ?, यह भी लिखना चाहिए एवं यदि लक्षण तीव्र हो तो पुनः दोष निर्मूलन समान ही स्वयंसूचना देना चाहिए तथा उसमें अपेक्षित सुधार हो रहा है क्या ?, इसका प्रतिदिन निरीक्षणकर उसके प्रसंग लिखने चाहिए, इससे वह लक्षण न्यून होने लगता है ।
आजसे हम अहंके एक-एक लक्षणोंके विषयमें जानेंगे । जैसे बहिर्मुख प्रवृत्तिके व्यक्तिको स्वयंमें कोई दोष दिखाई नहीं देता है, वैसे ही ऐसे लोगोंको स्वयंमें अहं भी दिखाई नहीं देता है । इसलिए जब आपको ये लक्षण बताए जाएंगे तो वृत्तिको अन्तर्मुखकर स्वयंसे सोचें कि मुझमें भी ये अहंके ये लक्षण हैं, यदि हैं तो उससे यदि आपका या आपके साथ रहनेवालोंको कष्ट हो रहा है तो उसे दूर करनेका आजसे प्रयास आरम्भ करें ! ध्यान रहे अहंकारी व्यक्ति किसीको भी प्रिय नहीं होता है ! उसे ईश्वर या गुरुकी कृपा भी नहीं मिलती है । इसलिए चाहे व्यवहार हो या अध्यात्म अहम् निर्मूलन करना अति आवश्यक होता है ।
तो आज अहंका प्रथम लक्षण देखते हैं :-
हठ करना
        हठ करना या अपनी ही बातपर अडे रहना यह अहंकारका लक्षण है । हठ और दृढ निश्चयमें समानता नहीं होती है । अपनी ही बातपर अडे रहना, दूसरोंकी बात न सुनना या दूसरे व्यक्तिकी परिस्थिति या पक्षको न सुनना, स्वयंके वक्तव्य या दृष्टिकोणको श्रेष्ठ समझना, इन सब कारणोंसे लोग हठ करते हैं । हठी व्यक्ति सभी परिस्थितिमें स्वयंको उसके अनुकूल नहीं ढाल पाता है । अनेक बार उनके परिजन या मित्रको उनके इस हठी वर्तनके कारण कष्ट भी होता है ! उनका यह हठ अनेक बार दुराग्रहमें परिवर्तित हो जाता है, जिस कारण  अनेक बार उनके मित्र या परिजनको कष्ट होता है और वे उनसे दूरी बना लेते हैं । हठी व्यक्ति किसी भी नूतन बातको शीघ्र स्वीकार भी नहीं करता है । सरल शब्दोंमें कहें तो व्यक्तिकी वृत्ति जितनी हठी होती है, उसमें सुनने, सीखने या परिस्थिति अनुरूप स्वयंको ढालनेकी वृत्ति उतनी ही कम होती है और इस कारण उसका अहं उतना ही अधिक तीव्र होता है ।
 हठ जहां व्यक्तिके चरित्रको नकारात्मकता देता है, वहीं दृढ निश्चय व्यक्तिके सकारात्मक व्यक्तित्वका अभिज्ञान (पहचान) कराता है; अतः इन दोनोंके मध्य भेदको समझना भी अति आवश्यक है; इसलिए इसे यहां इसका संक्षेपमें उल्लेख कर दिया है ।


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