पुत्र या अपने वंशजोंपर मृत्यु उपरान्त सद्गति हेतु न रखें अधिक विश्वास, अपने कल्याण हेतु करें योग्य साधना


शास्त्र है यदि किसीकी मृत्यु हो गई और उस सद्गति मिल गई; किन्तु वह व्यक्ति जीवन्मुक्त नहीं हुआ अर्थात ६१% आध्यात्मिक स्तर नहीं हुआ तो आपको उसके पुण्य अनुसार कोई लोक प्राप्त होता है या वह जीवात्मा पितरलोकमें प्रतीक्षारत रहता है; किन्तु यदि उसके पुत्रने तीन वर्ष सतत आपके लिए श्राद्ध नहीं किए तो आपको पुनः प्रेत योनि प्राप्त होगी; इसलिए अपना लक्ष्य ६१% आध्यात्मिक स्तर रखकर अधिकसे अधिक समय साधनाको दें ! कलियुगी पुत्र या जामाता (दामाद) या भाई-भतीजेपर अधिक विश्वास न करें ! वे अपना आध्यात्मिक कल्याण तो कर नहीं पाते हैं, अपने पितरोंका क्या करेंगे ?



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