धर्मधारा-निधर्मी मैकालेशिक्षण पद्धतिके कारण वर्तमान पीढीका आध्यात्मिक पतन


आजके मैकाले शिक्षित युवा पीढीको जब भी आगामी कालकी भीषणताके विषयमें बताती हूं तो अनेक युवा एवं युवतियां कहते हैं कि सन्तवृन्द ऐसे कैसे भविष्यके विषयमें देखकर बता सकते हैं, हम उनकी बातोंको कैसे सत्य मान लें ? तब मुझे भान होता है कि इस निधर्मी शिक्षण पद्धतिके कारण हमारे देशकी वर्तमान पीढीका आध्यात्मिक पतन किस सीमातक हो चुका है ? वे बुद्धिसे परेकी किसी भी बातको मानना नहीं चाहते हैं । उनका सन्तोंसे विश्वास पूर्णरूपेण उठ चुका है अर्थात इस शिक्षण पद्धतिने एवं पाश्चात्य संस्कृतिके अन्धानुकरणने ऐसे लोगोंकी बुद्धिभ्रष्ट कर दी है । अब मुझे भान होने लगा है कि सन्तोंने बार-बार क्यों कहा है कि आगामी कालमें विश्वकी चालीस प्रतिशतसे अधिक जनसंख्या कालकी ग्रास बनेगी ! आनेवाले रामराज्यमें मात्र सात्त्विक जीवात्माएं ही रहनेवाली हैं, इसकी स्पष्ट प्रतीति अब मिलने लगी है ।



Leave a Reply

Your email address will not be published.

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution